Hindi Quotes #mohit_trendster

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*) – अपने अनुभव, प्रतिभा और जो भी जीवन में अर्जित किया उसका मोल समझें पर आत्ममुग्धता से बचें। सामने वाले व्यक्ति को परसों पैदा हुआ ना मानें।

*) – निष्पक्ष होना दुनिया की सबसे कठिन कला है।

*) – किसी की सहनशीलता को उसकी कमज़ोरी मत समझें। इलास्टिक को इतना खींचने की आदत ना डालें कि वो ऐसी घड़ी में टूटे जब आपको उसकी सबसे ज़्यादा ज़रुरत हो।

*) – इतिहास कभी एक नहीं होता। इतिहास नदी की धाराओं सा इधर-उधर बह जाता है और लोग अपनी विचारधारा के हिसाब से उन धाराओं को पकड़ कर अपना-अपना इतिहास चुन लेते हैं। जो मानना है मानो पर मानने से पहले सारी धाराओं का पानी ज़रूर पीकर देखना….जिस पानी की आदत नहीं उसे पीकर शायद तबियत बिगड़ जाए पर दिमाग सही हो जाएगा।

*) – सुरक्षित राह पर जीवन को तीन से पौने चार बनाने में बाल सफ़ेद हो जाते हैं और कोई दांव लगाकर तीन से तेईस हो जाता है। अब पौने चार से शून्य दूर होता है या तेईस?

*) – सही, सकारात्मक और बिना किसी विचारधारा के प्रभाव में आकर किये गए सामाजिक अनुकूलन से समाज की अनेकों कुरीतियों से छुटकारा पाया जा सकता है।

*) – अक्सर भूल जाने लायक छोटी जीतों के गुमान में लोग याद रखने लायक बड़ी बाज़ी हार जाते हैं।

*) – कला के क्षेत्र में केवल यह सोचकर खुद को रोक लेना सही नहीं कि ऐसा पहले हो चुका होगा। शायद हो चुका हो….पर आपके नज़रिये और अंदाज़ से तो नहीं हुआ ना!

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लेखक/कवि मोहित शर्मा (ज़हन) परिचय – प्रादेषिक हिंदी समिति (उ.प्र.)

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बचपन से विभिन्न विषयों पर हिंदी, इंग्लिश में कवितायेँ, कहानियाँ लिख रहें मोहित शर्मा (ज़हन), वर्ष 2006 में इंटरनेट के संपर्क में आने के पश्च्यात अधिक सक्रियता से लेखन में जुट गये। दो या अधिक विधाओ के मेल में उन्हें महारत हासिल है जिसके अंतर्गत उन्होंने कविताओं के साथ – 2 बहुतायत में काव्य कहानियां, काव्य लेख और काव्य कॉमिक्स की रचना की। उत्तर प्रदेश हिंदी समिति इस युवा प्रतिभावान रचनाकार को शुभकामनाएँ देती है।
प्रादेषिक हिंदी समिति (उत्तर प्रदेश)

लेखक-कवि मोहित शर्मा (ज़हन) सूक्तियाँ

Mohit

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*) – किसी व्यक्ति/बात का पक्ष लेने में ज्ञान हमारी मदद भी करता है और रोकता भी है। फैसला करने से पहले विभिन्न अधिकृत-अनधिकृत घटकों से जाँचना ज़रूरी है कि उपलब्ध जानकारी का उद्गम कहाँ से हुआ है, क्योकि संभव है जिस जानकारी के बल पर हम सही-गलत का निर्णय कर रहे हों वह स्रोत से ही किसी पक्ष के स्वार्थ के लिए दूषित कर दी गयी हो।

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*) – आज़ादी की लहर में दोनों रुख के बंदे बहे,

जहाँ नर्म दल के सिपहसेलार बने खुदा…

और प्यादे तक बादशाह हो गये,

वही गर्म दल के शहीद अपने ही देश में…

क्रांतिकारियों से गुण्डे हो गये।

भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को उनकी पुण्यतिथि पर नमन !

बातों और घटनाओ का अधिकृत होना उनके लोकप्रिय होने जितना ही महत्वपूर्ण है क्योकि दुनियाभर के लोग और आने वाली पीढ़ियाँ प्रमाण के रूप में केवल दर्ज रिकार्ड्स को मानते है। धीरे-धीरे चढ़ती समय कि परतों के साथ किन्ही पीढ़ियों की विदित लोकप्रिय बातों को आगे काल्पनिक किवदंतियाँ, कहानियाँ बनते देर नहीं लगती। आवश्यकता है निष्पक्ष होकर ऐसे ऐतिहासिक कालों में सक्रीय हर घटक के अच्छे-बुरे कार्यो को पहचान कर उनसे सबक लेने की। साथ ही अनुपात देखना भी आवश्यक है, किसी घटक/व्यक्ति पर हज़ारों लोग चर्चा करें, मान्यता दें जबकि किसी समकक्ष घटक पर यह संख्या दर्जनो में हो तो दूसरा घटक अपने आप विलुप्त हो जायेगा।

*) – कंधे पर बैठे फरिश्तों के हिसाब में,

अपनों को ना सतायें….

ज़रा एहतियात रहें सोने से पहले,

सपने सिरहाने ना लगे रह जायें।

*) – Genuine citations often lack corporate-glitteriness.

*) – They say that Good ultimately wins, OK! Sir, Agreed! but the win-loss record of Good vs. Evil is like population of (Moldova vs. China).

– Mohit Sharma (Trendster)