Shayari #‎ज़हन

यूँ ही फिर दिल को कोई नयी बात लुभा गई,
गिचपिच, मन की संकरी गलियों से किसी पुरानी याद को हटा गई…
जो याद हटी….जाते-जाते आखरी बार ख़्वाब में आ गई…

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दुनियाभर को बकवास जिसने बताया,
वो रुखा दार्शनिक…एक बच्चे की मुस्कान पर रिझ गया…
कितने बही खाते सिफर में उलझे रहे,
और एक तस्वीर में सारा जहाँ सिमट गया…
अब याद नहीं…बेमतलब बातों में कितना वक़्त साथ गुज़ारा,
तुमसे आँखों के मिलने का पल मेरे पास रह गया….

जुग-जुग मरो बेटा! (कटाक्ष) – कवि मोहित शर्मा (ज़हन)

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जून 2015 में एक बार फिर महाराष्ट्र में ज़हरीली शराब पीने के बाद कई लोग मारे गए और कई अन्य अंधे हो गए व कुछ की आंतें फट गयी। परिजनों के विरोध के बाद राज्य सरकार ने मृतकों के परिजनों को 1 लाख रुपये देने की घोषणा की। पर जो अंधे हुए या जिसकी आँत फटी उनकी सहायता या पुनर्वास के लिए सरकार द्वारा कुछ नहीं किया गया। मृतकों के परिवारों से मेरी सहानुभूति है कि कुछ नियम, कानून और जागरूकता बढ़ा कर ये मौतें कम की जा सकती थी। इस विषय पर ये कटाक्ष काव्य। शब्द जानबूझ कर तीखें किये है, इनका बुरा मानें, इसको दिल पर ज़रूर लें – आवाज़ उठायें…..पर सही जगह!

जुग-जुग मरो बेटा!

रसमलाई क्या जलेबी भी लगे अब फीकी ,
जो शराब लखपति बनायें….
वो ज़हर नहीं अमृत सरीखी।
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मलाल है क़ि पूरी क़ि पूरी क्रिकेट टीम को खड़ा क्यों ना किया,
फालतू में “हम दो, हमारे दो” स्लोगन को इतना seriously ले लिया।
जबसे ट्रेजेडी का मुआवजा बँट गया,
तबसे साला हर शराबी चलती फिरती FD बन गया।
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अजीब देश है, शहीदो की विधवाएं पैसो के लिए कितनी दौड़ लगातीं है,
जबकि शराबियों के घर सरकार खुद चेक लेकर आती है।
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जब लोगो को लाख का चेक मिलते देखा,
चौल का हर बूढा आशीर्वाद देता फिरता – जुग-जुग मरो बेटा!
जनता में अचानक समाजसेवा की जगने लगी है इच्छा,
गोद लेना चाहते है लोग पियक्कड़ यतीम बच्चा।
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दहेज़ में कितना सामान मांग रहा है तेरा जीजा,
बिन आँखों के, फटी आँतों से Installment मे मत जी,
बाउजी कुछ पव्वे ब्लैक में लाएं है गटागट पीजा।
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किसी करमजले का पेट फटा,
तो कोई धरती का बोझ सूरदास बना,
असली सपूत सिर्फ वो,
जो पिके सीधा शहीद हुआ!
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– मोहित शर्मा (ज़हन)
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Bageshwari # 03 Magazine

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….in Bageshwari # 03 Magazine

Sunehri jo Meera (Poem) and Dhongi Filmkaaro ki jamaat (Article) published in May 2015 edition of Bageshwari Magazine.

Google Playstore Link – http://books.google.co.in/books/about?id=wTCzCAAAQBAJ&redir_esc=y

– Mohit Sharma (Trendster) #mohitness #mohit_trendster #trendy_baba #bageshwari #rajasthan #india

Aaj phir us dar se lautna hua…. – मोहित शर्मा (ज़हन)

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Aaj phir us dar se lautna hua….

Ek Raah mujrim tang thi,

Do musafiron ka saath chalna hua,

Ek pyaar betarteeb yun…

Kitne shikven aur ek muflis shukriya,

Aaj phir us dar se Lautna hua !

Koshish rahegi umr bhar,

Ek naam par nikle dua…

Jin kamro mey Tanhaai thi,

Wahin yaadon se milna hua..

Aaj phir us dar se lautna hua !

Jo vaayda aankhon mey hua,

Veeranon mein Armaano ka majma laga

Parda naa hone ka malaal unhe,

Jab shafaaq-O-shabhnam thi darmiyaa,

Aaj phir us dar se lautna hua !

Khudgarz kab patjhad laga,

Saawan kasam dene laga…

Ek khwaab dil ke kareeb tha,

Khwaishon mein jo shaheed hua…

Tab himmat se haara karte the…

Ab kismet se haare jua…

Aaj phir us dar se lautna hua !

Jiske shafugta hone par jashn tha,

Jaane kahan wo gum hua,

Jinse rooh wabasta thi,

Kis mod wo Tanha hua,

Aaj phir us dar se lautna hua….

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आज फिर उस दर से लौटना हुआ…

आज फिर उस दर से लौटना हुआ…

एक राह मुज़रिम तंग थी,

2 मुसाफिरों का साथ चलना हुआ,

एक प्यार बेतरतीब यूँ…

कितने शिक़वे और एक मुफ़लिस शुक्रिया,

आज फिर उस दर से लौटना हुआ…

कोशिश रहेगी उम्र भर,

एक नाम पर निकले दुआ,

जिन कमरो में तन्हाई थी,

वहीं यादों से मिलना हुआ,

आज फिर उस दर से लौटना हुआ….

जो वायदा आँखों में हुआ,

वीरानों में अरमानों का मजमा लगा,

पर्दा ना होने का मलाल उन्हें,

जब शफ़ाक़ ओ शभनम दरमियाँ…

आज फिर उस दर से लौटना हुआ…

खुदगर्ज़ कब पतझड़ लगा,

सावन कसम देने लगा,

एक ख्वाब दिल के करीब था,

ख्वाइशों में जो शहीद हुआ…

तब हिम्मत से हारा करते थे,

अब किस्मत से हारे जुआ…

आज फिर उस दर से लौटना हुआ…

जिसके शगुफ़्ता होने पर जश्न था,

जाने कहाँ वो गुम हुआ,

जिनसे रूह वाबस्ता थी,

किस मोड़ वो तन्हा हुआ?

आज फिर उस दर से लौटना हुआ….

– मोहित शर्मा (ज़हन)

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Poem “Trapped Demon” by Mohit Sharma (Trendy Baba)

Trapped Demon_Mohit Shrama_Poetry_Template

Infra-Surkh Shayars vs. Life (Poetry Collection) #freelance_talents

Promo ISSvsL

A collection of poems in English, Hindi, Spanish and Urdu.

Infra-Surkh Shayars (What is Life?)
Pages: 43

Published: October 2013

ISBN: 9781311426581

Artists – Melina Dina (Melibee) :: Dr. Inayat Khan Qazi :: Mohit Sharma (Trendster)

Editor – Kamlesh Sharma

© Freelance Talents (2013), all rights reserved.
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भीगी बैसाखी (Jallianwala Bagh Massacre)

भीगी बैसाखी!!!!!

 Jallianwala Bagh Massacre (Amritsar, 13 April 1919)

 

बड़ा गहरा है तेरा कुआँ….
जो गुम हुई इसमे माँ की दुआ…
खुदगर्जी में तूने अपनी दीवारों को लाल कर डाला…
कितना ज़ालिम है तू ओ जलियांवाला…

खेलते बच्चों को किसने गुमसुम कर डाला,
कितना काला है वो गोरी चमड़ी वाला…

सुबह से खड़े थे वो तो तेरे जवाब सुनने के वास्ते,
शाम तक पट गए लाशो से संकरे रास्ते.

आयेंगे वो दिन उसको यकीन था,
दौड़ी चौखट तक…कोई नहीं था.

ऐसा तो न था मासूमो का विरोध,
जो तेरी ‘महारानी’ ने उन्हें तोहफे मे दिया बारूद.

कम पड़ रहे थे क्या भीगे जज़्बात,
क्यों पड़ने लगी ये बरसात?

पलके कहाँ झपकेंगी,
देखना है कितनी लम्बी होगी ये रात.

ज़ख़्मी बिछड़े अब कहाँ जायेंगे…
तेरे निजाम के कर्फ्यू मे अपनों से पहले लाशो तक गिद्ध, कुत्ते आयेंगे…

उसके मन मे था ये बैसाखी मेला लेकर आयेगी…
अब से वो अभागी कभी बैसाखी नहीं मनायेगी…

तेरी इबारत मे एक माँ ठगी गयी…
सच को दबाकर अपनी बात को तो साबित कर दिया सही…
अरे..रुक कर देख तेरी एक गोली किसी नन्हे से  दिल को भेद गयी…

– Mohit

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