Abhiman se Apman (Story for Kids) in Anubhav Magazine July 2019

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सलोना भालू फुलवारी वन का एक प्रतिभावान खिलाड़ी था। किशोरावस्था में ही वह अपनी उम्र से बड़े और अनुभवी खिलाडियों को नाकों चने चबवा देता था। जल्द ही उसका नाम फुलवारी वन और उसके आस-पास के इलाकों में भी फ़ैल गया। केवल एक खेल नहीं बल्कि भाला फेंक, शॉट पुट, 400/800 मीटर दौड़ और तेज़ चाल में वह कमाल का प्रदर्शन करता था। स्थानीय व अंतर-जंगलीय प्रतियोगिताओं में सलोना शीर्ष पदक जीतने लगा। आगामी प्रतियोगिता जंगलों के सबसे बड़ी, सम्मान वाली प्रतियोगिता थी। इसका नाम था जंगल ओलम्पिक। सलोना भालू का यह पहला ओलम्पिक था। वह कई महीनों पहले से गंभीर तैयारी में जुट गया। खेलों का आयोजन पुष्पपुर जंगल कर रहा था। लंबी यात्रा कर वहाँ पहुँचे सलोना को पुष्पपुर की दृष्टि की सीमा से विस्तृत फूलों की वादियों ने मोहित कर लिया। कम समय में सलोना बहुत से वन क्षेत्रों की यात्रा कर चुका था और अलग-अलग प्रजातियों के जानवरों से मिल चुका था। हर तरफ अपने कौशल की तारीफ़ सुनकर सलोना में दंभ भर गया था।
एकसाथ 4 खेलों में अपने जंगल का प्रतिनिधित्व करने वाला सलोना अकेला एथलीट था। अपनी जीत को लेकर वह इतना आश्वस्त था कि उसने अभ्यास छोड़ पुष्पपुर जंगल में विचरण और प्रतिष्ठित जानवरों के साथ उठना-बैठना शुरू कर दिया। इतना ही नहीं अपने अभिमान में वह अभ्यास कर रहे जानवरों का मज़ाक भी उड़ाता था। जब फुलवारी जंगल के अन्य खिलाडियों और प्रशिक्षक ने सलोना को समझाने की कोशिश की तो उसने उल्टा उन्हें अपना प्रदर्शन उसके बराबर लाने की चुनौती दे दी। इतने पदक जीत चुके सलोना को अधिक टोकने की हिम्मत किसी में भी नहीं थी। अगले सप्ताह खेल शुरू हुए और एक के बाद एक प्रतिस्पर्धा में सलोना भालू को हार मिलने लगी। शुरुआत में 800 मीटर दौड़ में कांस्य भी न मिला, उसके बाद शॉट पुट, भाला फेंक में भी सलोना प्रथम 5 स्थान में जगह नहीं बना पाया। पहले पहल भाग्य को दोष दे रहा सलोना अब अपनी 4 में से 3 प्रतिस्पर्धाओं में बिना पदक रह गया था। अंत में 20 किलोमीटर तेज़ चाल  प्रतिस्पर्धा में उतरते हुए सलोना में पहले का दंभ हार के डर में बदल गया था। परिणाम सबकी आशा अनुरूप ही था। सीमित तैयारी, बिगड़ी लय और खोये आत्मविश्वास के साथ सलोना ये प्रतिस्पर्धा भी हार गया। उस रात गुस्से में खिलाडियों, निर्णायकों और सहायक स्टाफ के लिए बने खेल गाँव में सलोना भालू ने खूब तोड़-फोड़ मचायी। उपद्रव मचाते हुए उसके वीडियो समाचारों की सुर्खियां बन गये। फुलवारी वन ने इस बार पदक तालिका में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया लेकिन जंगल की इस उपलब्धि को सलोना के हुड़दंग से हुई बदनामी ने फीका कर दिया। सलोना को अपनी भूल पर पछतावा देर से हुआ। फुलवारी जंगल खेल संघ ने सलोना के ऊपर स्थानीय या अंतर-जंगलीय किसी भी खेल खेलने पर 5 वर्ष का प्रतिबंध लगा दिया।
प्रतिबंध की अवधि पूरी करने के बाद सलोना भालू ने ज़बरदस्त वापसी की और अपने जंगल के लिए कई पदक अर्जित किये। हालांकि, सलोना को अक्सर एक मलाल रहता है। अपनी भूल के कारण उसने एक खिलाडी के रूप में अपने उत्कृष्ट वर्ष (जिनमें वह शारीरिक, मानसिक रूप से अपने चरम पर था) गँवा दिये, साथ ही इतने बड़े मंच पर अपने जंगल का नाम ख़राब किया।
समाप्त!
 
सीख – छोटी उपलब्धियों से दंभ में आकर जीवन के बड़े लक्ष्यों से भटकना नहीं चाहिए और अपने क्षेत्र के अनुभवी लोगों की सलाह को कभी अनसुना नहीं करना चाहिए।

3 Hindi Moral Stories for Kids #Zahan

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बच्चों के लिए ये तीन कहानियां 2018 में नींव पत्रिका में प्रकाशित हुई .

1) – सामान्य जीवन

बीनू बंदर अपने घर में सबका लाडला था। उसकी हर तरह की ज़िद पूरी की जाती थी। उसका परिवार भारत के उत्तराखण्ड प्रदेश स्थित जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय पार्क में रहता था। जंगल में अन्य युवा बंदर ऊँचे से ऊँचे पेड़ों पर लटकने, चढ़ने का अभ्यास करते रहते थे। वहीं बीनू को यह सब रास नहीं आता था। किसी के टोकने पर बीनू कहता कि जंगल के बाकी जीवों की तरह हमें सामान्य जीवन जीना चाहिए। उनकी तरह धरती पर विचरण करना चाहिए। छोटा और गुस्सैल होने के कारण कोई उसे अधिक टोकता भी नहीं था। एक बार वर्षा ऋतु में जंगल के बड़े हिस्से में बाढ़ आ गयी।

बंदर समुदाय ने कई जीवों की जान बचायी जबकि बीनू मुश्किल से अपनी जान बचा पाया। बीनू निराश था कि वह अन्य बंदरों की तरह जंगल के जानवरों की मदद नहीं कर पा रहा था। बाढ़ का पानी सामान्य होने के बाद बीनू के माता-पिता ने उसे समझाया। हर जीव की कुछ प्रवृत्ति होती है, जो उसके अनुसार सामान्य होती है। संभव है अन्य जीवों के लिए जो सामान्य हो वह तुम्हारे लिए ना हो। इस घटना से बीनू को अपना सबक मिला और वह तन्मयता से पेड़ों पर चढ़ना और लटकना सीखने में लग गया।

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2) – अवसर का लाभ

मीता को खेलों में बड़ी रूचि थी। वह बड़ी होकर किसी खेल की एक सफल खिलाडी बनना चाहती थी। एक बार मीता के स्कूल में जूनियर क्रिकेट कैंप का आयोजन तय हुआ। इस कैंप में जबलपुर, मध्य प्रदेश शहर के स्कूली लड़कों और लड़कियों की अलग प्रतियोगिता होनी थी। कैंप में अच्छा प्रदर्शन करने वाले बच्चों को भविष्य के लिए छात्रवृत्ति दी जाती। मीता ने सोचा कि क्रिकेट तो लड़कियों का खेल नहीं है। क्रिकेट में सिर्फ लड़कों का भविष्य है। उसने कैंप के लिए आवेदन नहीं दिया।

क्रिकेट कैंप के दौरान ही भारतीय महिला क्रिकेट टीम विश्व कप में उप-विजेता रही। इस खबर के बाद कैंप को अधिक प्रायोजक मिल गये। मीता की कक्षा की एक लड़की सौम्या को छात्रवृत्ति मिली और वह जूनियर स्तर की राष्ट्रीय क्रिकेट टीम में भी चुन ली गयी। अन्य खेलों में मीता हमेशा सौम्या से आगे रहती थी। अगर वह क्रिकेट कैंप में हिस्सा लेती तो निश्चित ही सौम्या की जगह सफलता पाती। मीता को सबक मिला कि जानकारी के अभाव में किसी अवसर को छोड़ देना गलत है। अगर किसी में प्रतिभा और लगन है तो किसी भी खेल में सफलता पायी जा सकती है। कोई खेल केवल लड़कों या लड़कियों के लिए नहीं बना है। मीता ने अब से हर अवसर का लाभ उठाने का निश्चय किया।

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3) – पर्यटन का महत्त्व (Fiction)

गुजरात स्थित गिर राष्ट्रीय उद्यान, वन्य अभ्यारण्य कई जीव-जन्तुओं को आश्रय देता है। वहाँ रहने वाले कुछ विद्वान जानवरों के बीच ज्ञान की होड़ थी। कोई किताबें पढता, कोई इंटरनेट पर खोजता तो कोई बड़े-बूढ़ों के साथ समय बिताता। हर विद्वान जानवर कई तरह से जानकारी हासिल करने की कोशिश में लगा रहता। हर वर्ष होने वाली विद्वानों की बैठक का समय था। सब विद्वान एक-दूसरे से अपना ज्ञान साझा करते और फिर सर्वसम्मति से विजेता की घोषणा की जाती थी। पिछले 12 वर्षों से भोला भालू सबसे बड़े विद्वान का खिताब जीत रहा था। इस बार भी विद्वानों की बैठक में भोला की जीत हुई। भोला मंच पर आया। उसने बताया कि वह इस प्रतियोगिता से संन्यास ले रहा है ताकि अन्य विद्वानों को अवसर मिल सके। साथ ही उसने अपनी जीत का राज बताया।

भोला – “जंगल के सभी विद्वान ज्ञान का भण्डार हैं। एक जैसे स्रोत होने के कारण सबकी जानकारी लगभग बराबर है। मेरी अतिरिक्त जानकारी और अनुभव के पीछे पर्यटन का हाथ है। मैं देश-विदेश के मनोरम स्थानों पर घूमने जाता हूँ। वहाँ रहने वाले जीवों से मिलता हूँ। उनका अलग रहन-सहन देखता हूँ। उनसे वहाँ प्रचलित कई बातें सीखता हूँ। इस तरह किताबी जानकारी के साथ मैं वास्तविक जीवन का अनुभव जोड़ता रहता हूँ। यही कारण है कि मैं इतने लम्बे समय से गिर का सबसे बड़ा विद्वान बन रहा था।”

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विकिपीडिया और बिकाऊ मीडिया के पार की दुनिया (कहानी) – मोहित शर्मा ज़हन

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नाखून चबाती मशहूर अभिनेत्री मेघना कमल कमरे में इधर-उधर टहल रही थी। फ़ोन पर अपने मैनेजर पर चिल्लाती हुई वो टीवी न्यूज़ चैनल्स बदल-बदल कर खुद पर आ रही खबरों को देखने लगी। पिछली रात पास के अपार्टमेंट में से किसी ने उसकी एक वीडियो बनाई थी जिसमें वो एक पिल्ले को किक मारती हुई अपने बंगले से बाहर कर रही थी। शुरुआत में हरकत कर रहा पिल्ले का शरीर मेघना की 5-7 लातें खाने के बाद निर्जीव हो गया। विडिओ पर ना सिर्फ जानवर के अधिकारों वाली संस्थाओं की तीखी प्रतिक्रिया आ रही थी बल्कि देश-विदेश की जनता मेघना की इस हरकत से गुस्से में थी। बड़े निर्माताओं, निर्देशकों पर मेघना को अपनी फिल्मों से बाहर करने, कॉन्ट्रैक्ट रद्द करने का दबाव बढ़ रहा था। कुछ ही देर में मेघना के घर के बाहर मीडिया का तांता लग गया।

मेघना ने अपने पिता और बीते ज़माने के सुपरस्टार अभिनेता हरीश कमल को फ़ोन किया।
“पापा…आई ऍम सॉरी, मेरी वजह से आपका नाम भी उछल रहा है। नशे में करियर बर्बाद कर लिया! सब ख़त्म हो गया!”

हरीश शांत स्वर में मेघना को समझाने लगे – “चिंता मत कर मेघू बेटे! ऐसे करियर बर्बाद होने लगते तो मैं कबका एक्टिंग छोड़ चुका होता। तेरा वीडियो मैंने देखा है। एक पार्सल भेजा है तुझे, बाकी फ़ोन पर नहीं समझाऊंगा। अपने मैनेजर और टीम को बुला ले उन्हें समझा दिया है, उनकी बात ध्यान से सुनकर वैसा ही करना… “

उस शाम मेघना ने अपने घर पर ही प्रेस कॉन्फ्रेंस रखी। कुछ सवालों के जवाब देने के बाद वह अपनी रिहर्स की हुई लाइनों पर आ गई।

“मैं जानती थी कि भारत के ज़्यादातर लोगो की जो मानसिकता हैं उनसे मुझे ऐसी ही प्रतिक्रिया मिलेगी। कल रात मैंने जानबूझ कर एक रोबोटिक खिलौने पप्पी को मारा, जो दूर से एकदम असली लगता है। यह देखिये इस पार्सल में उस से मिलता-जुलता खिलौना है। मेरा उद्देश्य लोगो में निरीह जानवरों के अधिकार, उनपर होने वाली हिंसा, मानव आबादी से कम होते जंगलों के लिए जागरूकता बढ़ाना था और देश क्या पूरी दुनिया का ध्यान आकर्षित करने के लिए इस स्टंट से बेहतर मुझे कोई उपाय नहीं लगा। इस बीच मुझे चुभने वाली एक सच्चाई का सामना करना पड़ा, एक लड़की के लिए चाहे वो एक सफल अभिनेत्री ही सही इस देश के लोग अपनी छोटी सोच दिखा ही देते हैं। भारत के लोगो और कई सेलेब्रिटीज़ की बातों ने मुझे आहत किया है।”

इतना कहते ही मेघना प्रेस वार्ता में रोने लगी। कैमरों की चमक से आँगन जगमगा उठा। हर ओर मेघना की तारीफ़ और चर्चे थे। इस घटना के बाद मेघना को कुछ अवार्ड मिले, तीन अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं ने मेघना को अपना गुडविल एम्बेस्डर बनाया और वो बड़े बजट निर्माताओं की पहली पसंद बन गयी। एक दिन हरीश कमल ने मेघना को हँसते हुए बताया कि मेघना का किया कांड तो कुछ भी नहीं उन्होंने अपने समय में कितने कानून तोड़े, लोगो को गायब तक करवाया पर आज भी देश उन्हें पूजता है।

समाप्त!
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Image – Watercolor Painting by artist Shilpi Mathur
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