Junction Planet Magazine (Issues 5 and 6)

Stories in latest Junction Planet Issues April 2020 and July 2020.

2 stories in April issue of Junction Planet. All Thanks to Comics Junction – CFS Team
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Comics Junction team announced that this edition of Comics Planet magazine is a theme based issue and the theme of this issue is….”Me”. Thank you for this honor, CFS team! They included 12-13 year-old stories and even typed in Devnagri as some of the stories were in Roman Hindi/Hinglish. #Humbled

Kahaniya’s ‘Colorblind Baalam’ Contests

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फ्लाई ड्रीम प्रकाशन और कहानियां ऐप के सौजन्य से मई 2020 और जून 2020 में “कलरब्लाइंड बालम” से जुड़ी कुछ प्रतियोगिताएं और क्विज आयोजित किए गए। ऐप, वेबसाइट और सोशल मीडिया पेज से कुछ झलकियां….

Colorblind Baalam Book

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एकसाथ दो किताबें… 🚁 “कलरब्लाइंड बालम” 🕺 Kahaniya और

FlyDreams Publications

की साझा पेशकश। ️🎊️🎉

पढ़ने के लिए क्लिक करें – https://www.kahaniya.com/s/colour-blind-balam-6eAP45

एप्लिकेशन डाउनलोड करने के लिए लिंक – https://play.google.com/store/apps/details?id=com.viven.android.kahaniyaofficial

#ज़हन

नया कहानी संग्रह – कुछ मीटर पर ज़िन्दगी (मोहित शर्मा ज़हन)

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नए जज़्बात – नई किताब: ‘कुछ मीटर पर ज़िन्दगी’ …उम्मीद करता हूं कि पहले की रचनाओं की तरह इसे भी आपका भरपूर प्यार मिलेगा। ई-संस्करण, एमेज़ॉन पर उपलब्ध –

https://amzn.to/3bXsGCW

#ज़हन

आगामी कहानी-संग्रह – कलरब्लाइंड बालम (मोहित शर्मा ज़हन)

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इस किताब में कुछ खास और अलग श्रेणियों की कहानियां रखी हैं। आशा है, हमेशा की तरह आप सबका स्नेह मिलता रहेगा।

Upcoming story collection Colorblind Balam (with FlyDreams Punlications)
Great work by cover artist Nishant Maurya.

Aap Dono Mere… #poetry

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दो साल पहले [19 April 2018] जीवन में एक बदलाव आया। कुछ आदतें बदली और कुछ आदतें बदलवाई। थोड़ी बातें और ढेर सारी यादें बनाई। एक रचनात्मक व्यक्ति की प्राथमिकताएं अलग होती हैं…उसे दुनिया में रहना भी है और दुनियादारी में पड़ने से भी परहेज़ है। ऐसे में डर होता है कि क्या शादी के बाद भी यह सोच बनी रहेगी या नहीं? पहले मेघा और अब प्रभव ने मिलकर मुझे जीवन के कई पाठ पढ़ाए। इन्होनें बताया कि प्राथमिकताएं कोई बाइनरी कोड नहीं जिन्हें या तो रखा जाए या छोड़ा जाए…इंसान नए नज़रिये और जीने के ढंग के साथ प्राथमिकताओं में कुछ बदलाव करके भी खुश रह सकता है। मेरे मोनोक्रोमेटिक जीवन को खूबसूरत पेंटिंग बनाने के लिए शुक्रिया मेघा और प्रभव!

आप दोनों के लिए 2 रचनाएं –

कुछ मैंने समझा…कुछ तुमने माना,

नई राह पर दामन थामा।

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कुछ मैंने जोड़ा…कुछ तुमने संजोया,

मिलकर हमने ‘घर’ बनाया।

दोनों की जीत…दोनों की हार,

थोड़ी तकरार…ढेर सा प्यार।

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मेरी नींद के लिए अपनी नींद बेचना,

दफ्तर से घर आने की राह देखना।

माथे की शिकन में दबी बातें पढ़ना,

करवटों के बीच में थपथपा कर देखना।

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साथ में इतनी खुशियां लाई हो,

एक घर छोड़ कर…मेरा घर पूरा करने आई हो।

पगडंडियों से रास्ता सड़क पर मुड़ गया है…

सफर में एक नन्हा मुसाफिर और जुड़ गया है।

चाहो तो अब पूरी ज़िंदगी इन दो सालों की ही बातें दोहराती रहो…

लगता है यह सफर चलता रहे…कभी पूरा न हो!

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(हास्य) [ध्यान दें – ये दोनों ही मेन लीड हैं, क्योंकि मेरी प्रोफाइल है इसलिए खुद को नायक बना रहा हूँ।]

मैं उपन्यास हूँ…आप दोनों मेरे प्लाट ट्विस्ट और मेन लीड,

मैं छुटभैया नेता हूँ…आप दोनों मेरे जुटाए कैबिनेट मंत्री और भीड़।

मैं अन्ना हजारे हूँ…आप दोनों मेरे संघर्ष और अनशन,

मैं वीडियो गेम हूँ…आप दोनों मेरे प्लेयर और लास्ट स्टेज के ड्रैगन।

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मैं एसयूवी हूँ…आप दोनों मेरे चेसिस और इंजन,

मैं सुबह की सांस हूँ…आप दोनों मेरे माउथवाश और मंजन।

मैं ट्रैक्टर हूँ…आप दोनों मेरे कल्टीवेटर और डाला,

मैं शक्तिमान हूँ…आप दोनों मेरे किलविश और कपाला!

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मैं सब्जीवाला हूँ…आप दोनों मेरा ठेला और टोकरा,

मैं धूम सीरीज़ हूँ…आप दोनों मेरे अभिषेक बच्चन और उदय चोपड़ा!

मैं हलवाई हूँ…आप दोनों मेरी दिवाली और मिठाई,

मैं तापसी पन्नू हूँ…आप दोनों मेरी पीआर एजेंसी और बीफिटिंग रिप्लाई!

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मैं अजय देवगन हूँ…आप दोनों मेरे रोहित शेट्टी और काजोल,

मैं बीजेपी हूँ…आप दोनों मेरे आरएसएस और बजरंग दल।

मैं इंदिरा गांधी हूँ…आप दोनों मेरे भारत रत्न और इमरजेंसी,

मैं पाकिस्तान हूँ…आप दोनों मेरे टेररिज़्म और इंसरजेंसी।

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मैं फ़ुटबॉल हूँ…आप दोनों मेरे जूता और लात, [ओ भाई…मारो मुझे मारो]

मैं हालात हूँ…आप दोनों मेरी यादें और जज़्बात।

मैं बाबा रामदेव…आप दोनों मेरे योग और पतंजलि,

मैं धड़कन…आप दोनों मेरे देव और अंजली।

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जीवन में नहीं रहा कोई अभाव,

मोहित को मिल गए मेघा और प्रभव।

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#ज़हन

Tanz (Hindi Story) #ज़हन

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तंज़

घरेलू बिजली उपकरण बनाने वाली कंपनी के बिक्री विभाग में लगे नदीम का समय अक्सर सफर में बीतता था। ट्रेन में समय काटने के लिए वह अक्सर आस-पास यात्रियों से बातों में मशगूल हो जाता। कभी उनकी सुनते और कभी अपनी कहते वक़्त आसानी से कट जाता। एक दिन नीचे चादर बिछा कर बैठे मज़दूर से उसकी जन्मपत्री मालूम करने के बाद नदीम ने अपना तीर छोड़ा।

“मौज तो तुम गरीब-लेबर क्लास और अमीरों की है। देश का सारा टैक्स तो मिडिल क्लास को देना पड़ता है। एक को सब्सिडी तो दूसरे को लूट माफ़ी।”

सहयात्रियों से “कौनसा स्टेशन आ गया?”, “बिजनौर में बारिश हो रही है क्या?” और “हरिया जी दुकान की गजक मस्त होती हैं!” जैसी बातों के बीच हालिया बजट से कुढ़ा नदीम व्हाट्सएप पर मिडिल क्लास के आत्मसम्मान को बचाती पंक्तियां मज़दूर पर फ़ेंक रहा था। वह मज़दूर कभी नदीम की बात समझने की कोशिश करता तो कभी मुस्कुरा कर रह जाता।

ऊपर अपने फ़ोन में मग्न गुरदीप से रहा नहीं गया।

“बड़े परेशान लग रहे हैं, भाई? अमीरों का पता नहीं पर देश के गरीब का जो हक है वह लेगा ही।”

नदीम को इतनी देर से बांधी गई भूमिका और अपनी बात कटती अच्छी नहीं लगी।

“अरे, लाल सलाम कामरेड! हा हा…मज़ाक कर रहा हूं। किस बात का हक? मुफ़्त की देन तो भीख हुई न?”

गुरदीप को ऐसे ही जवाब की उम्मीद थी।

“भाईसाहब! गरीब लोग तो जहां मिलें उनका शुक्रिया करो…ये गरीब-लेबर क्लास तो देश में सबसे ज़्यादा टैक्स देते हैं।”
यह अलग सा वाक्य सुनकर सब जैसे नींद से जागे और ऊपर से झांकते गुरदीप की ओर देखने लगे। इससे पहले कोई स्टेशन आ जाए या किसी का बच्चा चीख मार के ऐसा रोए कि 12-15 लोगों का ध्यान गुरदीप से हट जाए वह लगातार गरीबों के पक्ष में तर्क देने में लग गया।

“सबसे पहले तो गरीब कभी खाना-पीना और बाकी सामान एकसाथ नहीं लेते। 50 ग्राम तेल, 200 ग्राम आटा, कुछ ग्राम चावल और जीने के लिए ज़रूरी कई चीज़ें ये लोग अपनी रोज़ या हफ़्ते की कमाई के हिसाब से लेते हैं। अगर वही सामग्री ये लोग एकसाथ 5 किलो, डेढ़ किलो या ज़्यादा मात्रा में लें…जैसा हम मिडिल क्लास के लोग लेते हैं, तो इनकी 30 से 90 प्रतिशत तक बचत हो सकती है। ऐसा ये कर नहीं पाते क्योंकि एकसाथ कुछ भी उतना खरीदने के लिए इनके पास पैसे ही नहीं होते। सोचो इकॉनमी में ये करोड़ों लोग रोज़ कितना पैसा लगाते हैं।
पिछली पे कमीशन में मेरे पड़ोसी शर्मा जी को लाखों का पुराना बकाया एरियर और महीने की सैलरी में सीधे 8200 रुपए का फायदा हुआ था…अब इतने साल बाद नया पे कमीशन लगने वाला है। शर्मा जी को फिर से लाखों रुपए मिलेंगे और वेतन भी बढ़ेगा पर इस बीच के गुज़रे इतने सालों में मजाल है जो उनकी कामवाली बाई के इतना रो-पीटने के बाद भी कुल ढाई सौ रुपए महीना से ज़्यादा बढ़े हों।

आपका ये कहना की सरकारी अस्पताल “इनसे” भरे रहते हैं या सारी सुविधाओं, स्कीम पर ये लोग टूट कर पड़ते हैं भी गलत है। ये शहर की दूषित जगहों के पास बने घरों में रहते हैं…हर शहर की उस गंदगी का काफ़ी बड़ा स्रोत हम मिडिल क्लास लोग हैं। कम पैसों में शरीर ख़राब कर बीमारी देने वाले काम कर-कर के दुनियादारी का धुआं, धूल झेलकर तो इनका हक बनता है सरकारी सुविधाओं पर टूट पड़ना। मिडिल क्लास की यह कहानी है कि आपने 40-45 की उम्र तक ठीक बैंक बैलेंस, घर और गाड़ी जैसी चीज़ें जोड़ ली और अपने बच्चों के लिए उड़ने का प्लेटफॉर्म बना दिया, लेकिन इन्हें पता है कि इनमें से ज़्यादातर के बच्चे भी गरीबी का ऐसा ही दंश झेलेंगे। इस वजह से ये लाइन में लगकर ज़िंदगी से लड़ते हैं…”

नदीम कुछ कहने को हुआ तो वाइवा सा दे रहे गुरदीप की आवाज़ ने उसे दबा दिया।

“इस बेचारे को मेरी कोई बात समझ नहीं आई होगी पर ये वैसे ही मुस्कुरा रहा है जैसे आपके तानों पर मुस्कुरा रहा था। हम जीवन के वीडियो गेम की रोटी, कपड़ा और मकान वाली स्टेज से बहुत आगे निकल चुके हैं और इसका जीवन ही उनके पीछे भागना है। कार या तकियों पर बढ़े टैक्स की झुंझलाहट हर सांस में जीने का टैक्स देने वालों पर मत निकालो भाई।”

जिसका डर था वही हुआ…सामने महिला की गोद में खेल रहा बचा रो दिया और रेल की रफ़्तार में हिलते गुरदीप के विचारों की रेलगाड़ी का मोनोलॉग भी टूट गया। कुछ बातें कह दी, कई बातें रह गई! नदीम की सांस में सांस आई कि तभी गुरदीप ने कहा…

“एक बात और!”

सत्यानाश! नदीम की आँखें जैसे पूछ रही हों कि भाई नाली में लिटा-लिटा कर बुरी तरह पीट लिया अब…और भी कुछ बचा है?

“सही और गलत समझने के लिए और दूसरों के हक की बात करने के लिए लाल सलाम ब्रिगेड वाला होना ज़रूरी नहीं।”

नॉकआउट घूंसा पड़ चुका था और नदीम गृहशोभा पढ़ने की एक्टिंग करने लगा।

समाप्त!
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My latest Stats on Chess24 Website
829 Victories, 148 Losses, 144 Draws

लघु कहानी – मज़ा आना चाहिए बस… #zahan

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गगन कई महीनों बाद अपने दोस्त सुदेश के साथ सिनेमा हॉल आया था। 3-4 बार योजना बनाने और फिर नहीं मिल पाने के बाद आखिरकार दोनों को साथ फिल्म देखने का मौका मिला था। स्कूल के दिन तो कबके जा चुके थे पर इस तरह मिलकर दोनों स्कूल जैसा समय वापस जीने का प्रयास करते थे।

फिल्म से पहले चल रहे दूसरी फिल्मों के ट्रेलर विज्ञापनों पर गगन बोला – “क्या यार! ट्रेलर में तो इस पिक्चर का म्यूज़िक, कहानी और यहां तक की लोकेशन, किरदारों का मेकअप भी पिछले साल आई हॉलीवुड फिल्म से मिलते-जुलते हैं। कब सुधरेंगे ये बॉलीवुड वाले? हर दूसरी फिल्म का यही हाल है। साउथ और बाकी रीजनल सिनेमा वाले भी बहुत कॉपी मारते हैं। इतने लेखक, कलाकार बैठे हैं अपने इंडिया में उनसे ही कुछ ले लो…मगर नहीं! जो आईडिया बाहर पैसे कमाएगा उसकी हूबहू नक़ल ये लोग बना देंगे…”

सुदेश ने गगन की बातों वाली ट्रेन की चेन खींचकर उसे रोका – “भाई, तू इंजीनियर है, ज़्यादा प्रेमचंद मत बन! मज़ा आना चाहिए बस…बाकी सब फालतू की बातें हैं।”

कुछ महीने बीतने के बाद कॉलेज के दोस्तों में गप्पे लड़ाते हुए सुदेश बोला – “इंडिया वालों पर कुछ नहीं होता! कल छोटे से देश कोस्टा रिका के दो कलाकारों को ऑस्कर मिला और कई सालों की तरह इंडिया को ठेंगा। ये…”

अब गगन की बारी थी, उसने वह कालजयी डायलॉग कंठस्त कर लिया था – “रहने दे भाई….मज़ा आना चाहिए बस…बाकी सब फालतू की बातें हैं।”

समाप्त!
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Comedy Article in Junction Planet Magazine (January 2020 Issue)

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2-page ‘Comics Kaalchakra’ in January 2020 issue of Junction Planet.

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Thank you, Team! 🙂

Pages – 98
Language – Hindi
Editor – Upendra Raj
Co-Editor – Gaurav Shrivastav
Special Advisor – Balbinder Singh
Cover Art – Arjun Sharma “Arya”

#Update – Kuku FM 2020

Mohit Sharma

Among Kuku FM top contributors. I hope to break into Top 10 this year.

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In 2020, they are working towards bringing monetization for creators on their platform.
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