काव्य कॉमिक्स – मतलबी मेला (फ्रीलैंस टैलेंट्स)

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New poetry Comic “Matlabi Mela” published, based on my 2007 poem of the same name.
*Bonus* Added an extra poem “खाना ठंडा हो रहा है…” in the end.
Language: Hindi, Pages: 22
Illustration – Anuj Kumar
Poetry & Script – Mohit Trendster
Coloring & Calligraphy – Shahab Khan

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Available (Online read or download):
ISSUU, Freelease, Slideshare, Ebook Home, Archives, Readwhere, Scribd, Author Stream, Fliiby, Google Books, Play store, Daily Hunt, Smashwords, Pothi and Ebook Library etc.

Jug Jug Maro #2 – Nashedi Aurat (Alcoholic Woman)

Cover

 जुग जुग मरो #2
नशे, दारु की लथ में अपना पति खो चुकी औरत नशे में ही उसे ढूँढ रही है और पूछ रही है ऐसी क्या ख़ास बात है नशे में जो कितनी आसानी से कितनी ज़िन्दगीयां लील लेता है। इस बार एक कविता और एक नज़्म के साथ पेश है – नशेड़ी औरत! (काव्य कॉमिक्स)
Illustrator – Amit Albert
Poet, Script – Mohit Trendster
Colorist – Harendra Saini
Letterer – Youdhveer Singh

Read or Download 
(Combined Part 1-2 Ecomic available on Google Play, Google Books, Readhwhere, Dailyhunt, Scribd, AuthorStream, ISSUU, Archives and other major ebook websites)

Kavya Comic #12 – Kadr (कद्र)

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Deepjoy Subba (Illustrator), Mohit Sharma (Writer-Poet), Harendra Saini (Colorist), Youdhveer Singh (Letterer), Cover Artist – James Boswell

Intro Poem (2016), Comic Poem (2007), Cover Art (1939)

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बेटा जब बड़े हो जाओगे….
बेटा जब बड़े हो जाओगे ना…
…और कभी अपना प्रयास निरर्थक लगें,
तो मुरझाये पत्तो की रेखाओं से चटख रंग का महत्त्व मांग लेना।
जब जीवन कुछ सरल लगे,
तो बरसात की तैयारी में मगन कीड़ो से चिंता जान लेना।

बेटा जब बड़े हो जाओगे ना…
…और कभी दुख का पहाड़ टूट पड़े,
तो कड़ी धूप में कूकती कोयल में उम्मीद सुन लेना।
जब सामने कोई बड़ी चुनौती मिले,
तो युद्ध में घायल सैनिक से साँसों की कीमत जांच लेना।

बेटा जब बड़े हो जाओगे ना…
…और कभी अहंकार का दंश चुभे,
तो सागर का एक छोर नाप लेना।
जब कहीं विश्वास डिगने लगे,
तो कुत्ते की आँखों से वफादारी नेक लेना।
कभी दुनिया का मोल पता ना चले,
गुरु की चिता पर बिलखते शिष्य में कद्र सीख लेना।

बेटा जब मेरी याद आये…
…तो अपने बच्चे को छाँव देती किसी भी माँ में मुझे देख लेना।

#ज़हन
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कद्र (काव्य कॉमिक) अब Culture POPcorn वेबसाइट, Google Books-Play, Archives, Issuu, Ebooks Daily, Comicverse आदि पर उपलब्ध।

http://www.culturepopcorn.com/kadr-kavya-comic-web-comic/

अपना उधार ले जाना! (नज़्म) – मोहित शर्मा ज़हन

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अपना उधार ले जाना!
तेरी औकात पूछने वालो का जहां,
सीरत पर ज़ीनत रखने वाले रहते जहाँ,
अव्वल खूबसूरत होना तेरा गुनाह,
उसपर पंखो को फड़फड़ाना क्यों चुना?
अबकी आकर अपना उधार ले जाना!
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पत्थर को पिघलाती ज़ख्मी आहें,
आँचल में बच्चो को सहलाती बाहें,
तेरे दामन के दाग का हिसाब माँगती वो चलती-फिरती लाशें।
किस हक़ से देखा उन्होंने कि चल रही हैं तेरी साँसे?
तसल्ली से उन सबको खरी-खोटी सुना आना,
अबकी आकर अपना उधार ले जाना!
माँ-पापा के मन को कुरेदती उसकी यादें धुँधली,
देखो कितनो पर कर्ज़ा छोड़ गई पगली।
ये सब तो ऐसे ही एहसानफरामोश रहेंगे,
पीठ पीछे-मिट्टी ऊपर बातें कहेंगे,
तेरी सादगी को बेवकूफी बताकर हँसेंगे,
बूढे होकर बोर ज़िन्दगी मरेंगे।
इनके कहे पर मत जाना,
अपनी दुनिया में खोई दुनिया को माफ़ कर देना,
अबकी आकर अपना उधार ले जाना!
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ख्वाबों ने कितना सिखाया,
और मौके पर आँखें ज़ुबां बन गयीं…
रात दीदार में बही,
हाय! कुछ बोलने चली तो सहरिश रह गई…
अब ख्वाब पूछते हैं….जिनको निकले अरसा हुआ,
उनकी राह तकती तू किस दौर में अटकी रह गई….
कितना सामान काम का नहीं कबसे,
उन यादों से चिपका जो दिल के पास हैं सबसे,
पुराने ठिकाने पर …ज़िन्दगी से चुरा कर कुछ दिन रखे होंगे,
दोबारा उन्हें चैन से जी लेना…
इस बार अपना जीवन अपने लिए जीना,
अबकी आकर अपना उधार ले जाना!
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बेगैरत पति को छोडने पर पड़े थे जिनके ताने,
अखबारों में शहादत पढ़,
लगे बेशर्म तेरे किस्से गाने।
ज़रा से कंधो पर साढ़े तीन सौ लोग लाद लाई,
हम तेरे लायक नहीं,
फिर क्यों यहाँ पर आई?
जैसे कुछ लम्हो के लिए सारे मज़हब मिला दिए तूने,
किसी का बड़ा कर्म होगा जो फ़रिश्ते दुआ लगे सुनने….
छूटे सावन की मल्हार पूरी कर आना,
….और हाँ नीरजा! अबकी आकर अपना उधार ले जाना!
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*नीरजा भनोट को नज़्म से श्रद्धांजलि*, कल प्रकाशित हुई ट्रिब्यूट कॉमिक “इंसानी परी” में यह नज़्म शामिल है।

Kavya Comics (Volume 4)

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काव्य कॉमिक्स संग्रह – 4, विभिन्न कलाकारों के साथ रची शार्ट काव्य कॉमिक्स (पोएट्री कॉमिक्स) का संकलन है। इस संकलन की टाइमलाइन वर्ष 2011 से लेकर 2014 तक है।

Poetic Post (Desh Maange Mujhe) – मोहित शर्मा ज़हन

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Poetic Post – देश मांगे मुझे!

परिचित लोगो की प्रतिक्रिया अक्सर सामान्य प्रतीत होती है क्योकि हमे उनके व्यक्तित्व का भलीभाँती ज्ञान होता है। पर कभी कबार जानने वालो द्वारा किसी बात पर की गयी प्रतिक्रिया हमे चौंका देती है, ऐसा ही कुछ मेरे साथ हुआ जब मेरे एक अच्छे मित्र जो अपने संयमित व्यवहार के लिए जाने जाते है वो अपने प्रदेश बंगाल पर बनी एक पैरोडी पर बिफर पड़े कि आजकल लोगो को अपनी “जड़ों” का महत्व नहीं पता, बाहरी कंडीशनिंग ने स्थानीय बातों, चीज़ों रिवाज़ों, इतिहास को महत्वहीन बना दिया है आदि। पर यह वही मित्र है जो भारत का या बंगाल से इतर अन्य भारतीय हिस्सों का मज़ाक उड़ाते लेखो, पैरोडी जैसी बातों का बड़ा लुफ्त उठाते है साथ ही दूसरो से भी बाँटते है। यह रोष जो बंगाल पर कथित टिप्पणियों पर हुआ यह पूरे भारत पर भी आना चाहिए क्योकि यह देश जितना प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति का है उतना ही आपका और हर एक नागरिक का। देश की विविधता का सम्मान आवश्यक है, यह मानना कि आपका छोर बाकियों से ख़ास है (सिर्फ इसलिए कि उस से हम जुड़े है) सरासर गलत है। भारत की नींव अनेकता में एकता, इकाई से अनंत बनाने के संदेश पर रखी गयी थी पर यहाँ तो अनेको इकाइयों में इतनी आत्ममुग्धता, अहंकार समां गया है कि वो स्वयं को सर्वश्रेष्ठ मान सारी बुराईयाँ अन्य में निकालते रहते है। यह बात ज़रूरी है कि एकता में ही विकास और समृद्धि है, अलग कुढ़ते रहने में ना देश की भलाई है ना ही आपके प्रदेश की।

काव्य कॉमिक्स के ऑनलाइन प्रकाशन के लिए Red Streak Publications को धन्यवाद। यह मेरी एक पुरानी कविता पर बनायीं गयी है, नयेपन के लिए विज्ञापन में एक काव्य और जोड़ा गया। टीम सदस्य पंकज, आयुष, पियूष और युद्धवीर जी को भी बधाई!
आपका
मोहित शर्मा ज़हन

Desh Maange Mujhe (Kavya Comics Series)

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Cover – Desh Maange Mujhe published by Red Streak Publications11811445_1611330485781359_1418349231159270887_n

Comic Ad

एक क़र्ज़ मेरे ऊपर जो बोलता नहीं, सूखी है जिसकी आँखें मुंह खोलता नहीं।
आईने के उस पार से जो झांकता परे, खुद से किसी गिरह को पर खोलता नहीं।
ख्वाबो में जबरन झरोखे बना लिये, पहली दफा देखी बेशर्म पर्दानशीं।
दुनिया-जहान की बातों को तरजीह मिल गयी, उन तमाम बातों में वतन का नामोनिशां नहीं।
अपनी ही कश्मकश में ज़िन्दगी गुज़ार दी, मुल्क की शिकन को कोई तोलता नहीं।
इंसाफी मुजस्मा शर्मसार झुक गयी, किस्मत को कोसती मुझसे कहने लगी
पाबंदी है यह कैसी…मैं कुछ देखती नहीं और तू कुछ बोलता नहीं !

Poetic Post from latest Kavya Comic #kavya_comics

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नमस्ते! दुनियाभर में अनेको लोग अपनी इच्छा के विरुद्ध किसी संस्था, प्रभावशाली व्यक्ति, विचारधारा, सामाजिक प्रणालियों की परछाई में अपना जीवन काट देते है। उनसे अधिक दुर्भाग्यशाली लोग ऐसे होते है जो इतने जागरूक ही नहीं हो पाते कि अपनी सोच बना पायें। स्थापित प्रणाली पर बिना सवाल उठाये भेड़चाल का हिस्सा बन अपना जीवन काट देते है। उन्ही परिस्थितियों में काफी कम संख्या में लोग गलत परन्तु प्रचलित बातों के खिलाफ आंदोलन करते है। शांत, संतुष्ट जनता का बड़ा बहुमत होने के कारण सरकारों एवम शासको के लिए ऐसे विद्रोहों, आंदोलनों को कुचलना आसान बन जाता है।

अक्सर ऐसी कई आहुतियों की लपट हम तक पहुँच नहीं पाती। जैसे सूखी लकड़ियों और घी-कपूर में प्रज्वलित अग्नि में हवन सामग्री स्वाहा हो जाती है, वैसे ही शायद इस संघर्ष  का महत्त्व इन इकाई बलिदानो में साफ़ ना दिख पाये पर लगातार मंत्रो के बाद पड़ रही हवन सामग्री अग्नि की प्रचंडता समाप्त कर देती है, ठीक  वैसे ही लगातार छोटे-छोटे संघर्षों की बूँदें एक सैलाब बनकर भव्य शासको, शक्तिशाली विचारधारों को बहा ले जाती है। जनता को पूरे न्याय की ना जानकारी होती है और ना ही उम्मीद पर समस्या तब आती है जब बूँद-बूँद के लिए करोडो, अरबों को घिसटते हुए जीवन व्यतीत करना पड़ता है।  हर सक्षम नागरिक कि नैतिक ज़िम्मेदारी बनती है कि असल और ढोंग के संघर्षों में फर्क करते हुए अपने कम भाग्यशाली देशवासियों की मदद में योगदान दे, प्रयासरत रहे। इस काव्य कॉमिक की प्रेरणा मुझे तिब्बत संघर्ष में बरसो से खुद को जलाकर, अपनी बलि दे रहे प्रदर्शनकारियों से मिली।

यह यश ठाकुर ( हरीश अथर्व) जी कि पहली कॉमिक है जो काफी समय से अटकी हुयी थी, आखिरकार उनकी मेहनत सबके सामने है जिसके लिए उन्हें बहुत बधाई! हालाँकि, इस बीच उनकी कला में काफी सुधार आया है। पाठको और फेनिल शेरडीवाला जी के सुझावों, अवलोकन अनुसार आगे बेहतर काम आप सभी के सामने होगा।

आपका

मोहित शर्मा (ज़हन)

Meri Aazadi ka Ruab (Kavya Comics)

Meri Aazadi ka Ruab (Kavya Comics) exclusively at Fenil Comics website and social media pages. by yours truly, Yash (Harish Atharv) Thakur, Soumendra Majumder, Ajay Thapa and Manabendra Majumder. – Mohit Trendster

Meri Azadi ka Ruab

Mohit Trendy Baba (March 2015 Updates)

*) – Second paper in English and Hindi on Inland Waterways of India submitted to a publisher.
*) – Published Laghu Kathayen and special articles on various issues (Prabhat Dainik, Shah Times and First News), you can read some of those – Online Archives, OA Apr and Trendy Baba Mafia Blog.
*) – Couple of event appearances.
event
*) – Conducted creative workshops for Arya Foundation, Meerut members.
*) – Freelance Talents and ICF online brainstorming hangouts.
*) – Page from new Kavya Comic….
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