Sketch Poster, Motion Poster of Short Film Kathputli (A Struggle for Control)

 Motion Poster
 Sketch Poster

आगामी शार्ट फिल्म कठपुतली का मोशन पोस्टर और स्केच पोस्टर, Team: Anuraag Tripathi, Ankerarchit Singh, Mohit Sharma Trendster, Ankita Tripathi, Ashutosh Saxena, Kamal Joshi #freelance_talents

Also available: Facebook, Vimeo, 4Shared, Tumblr, Mediafire etc.

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Nazms in new novel

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Mit Gupta’s Teri Isshq Wali Khushboo #romantic Novel (sprinkled with nazms-poetic seasoning by yours truly) will be released on wednesday…Valentine’s Day! ❤ #romance #novel #mitgupta #hindi #literature #poetry #mohitness #mohit_trendster

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…..and a random bonus pic!

Nazm (Mastermind Hindi Novel)

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शुभानंद कृत मास्टरमाइंड (जावेद, अमर, जॉन सीरीज) नॉवेल में प्रकाशित नज़्म।

अभी तो सिर्फ मेरी मौजूदगी को माना,
दिमाग में दबे दरिन्दों से मिलकर जाना।
तुझे तड़पा-तड़पा कर है खाना,
पीछे दरिया रास्ता दे तो चले जाना।

कभी किसी की चीख से आँखों को सेका है?
कभी बच्चे का जिस्म तेज़ाब से पिघलते देखा है?
अभी वक़्त है…रास्ते से हट जाओ,
किसी का दर्द दिखे तो पलट जाओ।
जिसकी दस्तक पर दिलेरी दम तोड़ती है…
मौत से नज़रे मत मिलाओ!

क़ातिल आँधियों मे किसका ये असर है?
दिखता क्यों नहीं है हवा मे जो ज़हर है?
चीखें सूखती सी कहाँ मेरा बशर है?
ये उनका शहर है…

धुँधला आसमां क्यों शाम-ओ-सहर है?
आदमख़ोर जैसा लगता क्यों सफ़र है?
ढ़लता क्यों नहीं है ये कैसा पहर है?
ये उनका शहर है…

जानें लीलती है ख़ूनी जो नहर है.
माझी क्यों ना समझे कश्ती पर लहर है?
हुआ एक जैसा सबका क्यों हश्र है?
ये उनका शहर है…

रोके क्यों ना रुकता…हर दम ये कहर है?
है सबके जो ऊपर..कहाँ उसकी मेहर है?
जानी तेरी रहमत किस्मत जो सिफर है!
ये उनका शहर है….

इंसानों को तोले दौलत का ग़दर है!
नज़र जाए जहाँ तक मौत का मंज़र है!
उजड़ी बस्तियों मे मेरा घर किधर है?
ये उनका शहर है…
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#ज़हन

हाल ही में आयोजित सूरज पॉकेट बुक्स कार्यक्रम में यह नज़्म मंच पर पढ़ी।

Kids magazine #update

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Hey everyone! 😀 I have recently started working as a voice-over artist and author (different age groups) for bilingual kids magazine Neev. नींव बाल पत्रिका के विभिन्न आयु वर्गों के लिए वॉइस-ओवर (ऑडियो) और लेखन शुरू किया।

Neev Magazine Website

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Neev Magazine Twitter

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…also Co-judged Kalamkaar 2017 Contest (RD Magazine)#neev #mohitness #voicetalent #update #mohit_trendster

Jasoos Saas (Hasya Kahani)

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लक्ष्मी कुमारी स्वेटर बुनने से तेज़ गति से अपनी बहु पर विचार बुन रही थीं।  वैसे उनकी बहु शताक्षी ठीक थी….बल्कि जैसी कुलक्षणी, कलमुँही बहुएं टीवी और अख़बारों में दिखती हैं उनके सामने तो शताक्षी ठीक होने की पराकाष्ठा ही समझो। फिर भी लक्ष्मी को एक बात परेशान करती थी। केवल उन्हें ही नहीं, कॉलोनी की कुछ और सास भी इस मुद्दे पर चिंतित थीं। कई घरों की 25 से लेकर 40 साल की महिलाएं आपस में अक्सर झुंड में घंटों पता नहीं क्या बतियाती रहती थीं। बाहर से लगता कि मानो चुगलियों की कितने पहाड़ चढ़ रही हैं। बड़ा और सभी कोण से ढका घर होने के कारण अक्सर दर्जन भर स्त्रियां शताक्षी के घर पर डेरा जमाती।

मोहल्ले की सासों से जब रहा नहीं गया और उनकी मिसमिसी का रौला-रप्पा हो गया तो सबने पैसे मिलाकर अच्छी क्वालिटी के माइक्रोफोन और कैमरे लक्ष्मी कुमारी के आँगन में लगवाये, जहाँ बहुओं की चुगलियों का गोरख धंधा चलता था। दो दिन बाद वीकेंड को बहुओं की मैराथन बैठक हुई। अगले दिन सत्संग का बहाना बनाकर वृद्ध जेम्स बांडनियाँ गुप्त अड्डे पर मिलीं। कॉलोनी की सासें अपनी साँसें थाम कर बहुओं की मीटिंग की फुटेज देखना शुरू करती हैं।

“दीदी, कल छुटकी की वजह से छोटा भीम हार गया। मैं तो दूध उबलने रखने जा रही थी कि मीनू ने बताया कि कालिया को जीत कर टाइटल मिल गया। इतनी झुंझलाहट हुई कि मैं कच्चा दूध ही पी गयी और मीनू की अभ्यास पुस्तिका फाड़ी सो अलग…”

“हाँ! इस वजह से कल पूरा दिन मेरा भी मूड ऑफ रहा। ऑफिस से लौटे पीकू के पापा पुच्ची करने को बढे तो ऐसी कोहनी मारी मैंने…नील पड़ गया उनके होंठों पर। हुँह! भला कालिया को जिताना कोई बात हुई?”

छोटा भीम पर गंभीर चर्चा के बीच शिवा कार्टून सीरीज की फैन शताक्षी बोली।

“…पेड़ाराम ने अपनी पड़ोसन के चक्कर में शिवा का फूफा जो किडनैप करवाया उस से मेरा दिल बैठ गया सच्ची। अरे! आपने सुना…शक्तिमान को दोबारा शुरू कर रहे हैं।”

उसके बाद मोटू पतलू, माइटी राजू, गली गली सिम सिम, डोरेमॉन, शिनचैन पर शिद्दत से चर्चा हुई। इतना ही नहीं बीच-बीच में महिलाओं ने कार्टून सीरियल्स के मंगल गीत…टाइटल सांग भी गुनगुनाये। गृहणियों को जब फुर्सत मिलती थी तब टीवी के सामने बच्चे होते, जो कोई और चैनल चलने ही नहीं देते थे। कोई विकल्प ना होने के कारण थोड़े समय बाद कार्टून्स, एनिमेशन में बच्चों की तरह महिलाओं को भी मौज आने लगी और देखते ही देखते यह कार्टून क्रान्ति महिला मोर्चा बन गया।

बहुओं की बुराई और गप्पों के लिए ब्रेड रोल, पकोड़े तल कर लायी एक सास निराशा में बोली।

“भक…”

ये केवल एक ‘भक’ नहीं बल्कि ‘खोदा पहाड़ निकली चुहिया’ वाली हार की स्वीकृति थी। गुप्त फुटेज देख रही सास मंडली के सारे अंदेशों का मुरब्बा बन चुका था। धूलधूसरित पहलवान की तरह सब अपने कार्टूनी सत्संग से घर लौट आयीं।

समाप्त! भक!
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Art – Sebastien K.
#ज़हन

Article – Hum Sab (Anshik) Pagal Hain

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हम सब (आंशिक) पागल हैं #लेख

मानसिक रूप से अस्थिर या गंभीर अवसाद में सामान्य से उल्टा व्यवहार करने वाले लोगों को पागल की श्रेणी में रखा जाता है। समाज के मानक अनुसार सामान्यता का प्रमाणपत्र लेना आसान है – आम व्यक्ति, अपनी आर्थिक/सामाजिक स्थिति अनुसार हरकतें और आम जीवन। इतनी परतों वाला जीवन क्या केवल दो श्रेणियों में बाँटा जा सकता है? मेरी एक थ्योरी है। हम सब पागल हैं। अंतर केवल इतना है कि किस हद तक, किन बातों पर, किस दशा-माहौल में और किन लोगो के साथ हम खुद पर नियंत्रण रख पाते हैं। अक्सर शांतचित रहने वाले लोगों को काफी छोटी बात पर बिफरते देखा है। वही लोग जिनका व्यवहार बड़ी विपदाओं में स्थिर रहता है। उस छोटी बात में ऐसा क्या ख़ास है जो ऐसी प्रतिक्रिया आयी? वह बात और उस से जुडी बातें एक पज़ल समीकरण के अधूरे हिस्से की तरह उस व्यक्ति के दिमाग में यूँ जाकर लगी कि बात ने सुप्त गुस्से के लिए ट्रिगर का काम किया। केवल गुस्सा ही नहीं बल्कि किसी चीज़, व्यक्ति के प्रति सनक या ‘दीवानापन’ होने पर भी व्यक्ति की पूरी प्रवृत्ति सामान्य से अलग लगने लगती है।

अपने कम्फर्ट जोन-दिनचर्या की आदत बनाये व्यक्ति को लगता है कि वह अपनेआप को बहुत अच्छी तरह जानता है। स्वयं के अवलोकन के अभाव में ऐसे कई पहलु, कमियाँ और व्यवहार की असमानता हम देख नहीं पाते जो हमसे संपर्क में आये लोग अनुभव करते हैं। जब आपके साथ वैसी घटना हो जिसकी आपको आदत नहीं या जिसे आप नियंत्रित ना कर पाएं तो भी सामान्य चेहरे से अलग नयी अप्रत्याशित छवि दिखती है। जीवन की वर्तमान स्थिति अनुसार खुद को अलग-अलग “व्हॉट इफ” घटनाओं (ऐसा हो तो मैं क्या करूँगा) में सोच कर देखें। अगर सोच में अनियमितता लगे तो खुद को बदलने का प्रयास करें। अपने व्यवहार को अन्य व्यक्ति के स्थान पर होकर देखने की कोशिश करें। स्वयं के जीवन की फिल्म में मुख्य किरदार में रहें पर इतने आत्ममुग्ध ना हों कि अपनी आंशिक सनक, गुस्से, बेवकूफी को ही ना देख पाएं। आपके प्रियजन, मित्रों को आपकी आदत है और उनकी आपको इसलिए थोड़ा पागलपन सब झेल लेते हैं…बस ये ध्यान रखें कि उस थोड़े की सीमा को पार कर अन्य लोगो को परेशानी ना होने दें।
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#ज़हन

ख़बरों की ऊपरी सतह

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एक नामी कलाकार हैं जिनका नाम नहीं लूँगा, जिनका नाम उनके काम से ना होकर उनकी मार्केटिंग और ब्रांडिंग से हुआ है। थोड़े वर्ष पूर्व अपने क्षेत्र में उन्होंने कुछ व्यंगात्मक काम किये जो देश की व्यवस्था, सरकार पर कटाक्ष थे। ये काम काफी जेनेरिक नेचर के थे यानी आज़ादी के बाद से हर रोज़ देश भर में ऐसे कई व्यंग बनते हैं, चलते हैं, प्रकाशित होते हैं…पर पता नहीं कैसे उनकी ‘कला’ पर किसी की नज़र पड़ी और उन्हें गिरफ्तार कर कुछ दिनों के लिए जेल भेज दिया गया। छोटी बात पर ना किसी का ध्यान जाता है और ना आसानी से गिरफ्तारी होती है। हाँ, अगर किसी को स्टंट करके करोड़ों की भीड़ (जिनमें हज़ारों ऐसे भी हैं जो वैसी कला बल्कि बेहतर कला दशकों से कर रहें है) से बिना 20-25 वर्ष की मेहनत एक झटके में ऊपर आना है…तो अलग बात है। गिरफ्तारी हुई और उसके फोटो फैले बाकायदा ऐसे जैसे फोटोशूट चल रहा हो। छोटी बात की कुछ दिनों की सजा काट साहब बाहर आये और तब तक ये ख़बर अन्तर्राष्ट्रीय मीडिया पकड़ चुका था। वहाँ के लोगों ने बिना दिमाग पर ज़ोर डाले इस बात को ‘तीसरी दुनिया’ के देशों की बर्बरता की श्रेणी में रख दिया और ये कलाकार स्टार बन गया। टीवी, रेडियो पर आने लगा। अच्छी बात है, अगर प्रतिभा नहीं है तो स्टंट के दम पर कुछ समय के लिए ही सुर्ख़ियों में रहा जा सकता है। जो अच्छी बात नहीं हैं वो इसके बाद की है। बात ठंडी होने के बाद इन्होने समाज सुधारक का तमगा ले लिया और उसके आधार पर इनसे जुडी संस्थाओं को फंड मिलने लगे, ऐसी जगहों, आयोजनों पर ये “वक्ता” बन जाने लगे जहाँ विशेषज्ञ भी सोच में पड़ जाये।

पहली आपत्ति – आम विचारों को स्टंट की आड़ में छुपाकर दार्शनिक बनना।

दूसरी आपत्ति – दशमलव हुनर लेकर 95-100 प्रतिशत स्तर पर मौजूद कलाकारों की जगह वाली इज़्जत पाना।

तीसरी आपत्ति – एक स्टंट के बल पर जीवन भर मुफ्त की खाना।

चौथी आपत्ति – बाद में पैसे के दम पर ‘ऑन रिकॉर्ड’ काम के मामले में जाने कितने पहाड़ उखाड़ने वाले की तरह पहचाने जाना।

पांचवी आपत्ति – इस सफलता के बाद बहुत से लोग इस तरह के शॉर्टकट लेने को प्रेरित होंगे।

किसी विषय पर मन बनाने से पहले ख़बरों की ऊपरी सतह को हटाकर ज़रूर देखें।

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प्रकृति और मानव की एक कहानी पर कॉमिक…

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New Comic: Pagli Prakriti – पगली प्रकृति (Vacuumed Sanctity), Hindi – 15 Pages. English version coming soon.

Readwhere – https://goo.gl/r3snfZ

Google Play – https://goo.gl/Drp1Bs

Issuu – https://goo.gl/e7H8Hq

Nazariya Now – http://www.nazariyanow.com/2017/11/Vacuumed-Sanctity.html

Comics Our Passion – http://www.comicsourpassion.com/2017/11/vacuumed-sanctity.html

Also available: Dailyhunt App, Google Books, Slideshare, Scribd, Ebooks360 etc.Team – Abhilash Panda, Mohit Trendster, Shahab Khan, Amit Albert

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#abhilash #amit #amitalbert #shahab #mohitness #mohit_trendster#abhilashpanda #shahabkhan #trendybaba #freelancetalents #freelance_talents#ज़हन  #मोहितपन  #Vacuumed_Sanctity  #VacuumedSanctity #

01 Cover (2)

नादान मानव की छोटी चालों पर भारी पड़ती प्रकृति की ज़रा सी करवट की कहानी…

Khauff ki khaal (Nazm Poetry) – Pagli Prakriti: Vacuumed Sanctity Comic

VS PAGE 7

Art and Poetry: Pagli Prakriti – Vacuumed Sanctity Comic

खौफ की खाल उतारनी रह गयी,
…और नदी अपनों को बहा कर ले गयी!
बहानों के फसाने चल गये,
ज़मानों के ज़माने ढल गये…
रुक गये कुछ जड़ों के वास्ते,
बाकी शहर कमाने चल दिये।

खौफ की खाल उतारनी रह गयी,
गुड़िया फ़िर भूखे पेट सो गयी…
समझाना कहाँ था मुश्किल,
क्यों समीर को मान बैठे साहिल?
तिनकों को बिखरने दिया,
साये को बिछड़ने दिया?

खौफ की खाल उतारनी रह गयी,
रुदाली अपनी बोली कह गयी…
रौनक कहाँ खो गयी?
तानो को सह लिया,
बानो को बुन लिया।
कमरे के कोने में खुस-पुस शिकवों को गिन लिया।

खौफ की खाल उतार दो ना…
तानाशाहों के खेल बिगड़ दो ना!
शायद उतरी खाल देख दुनिया रंग बदले,
एक दुकान में गिरवी रखा हमारा सावन…
शायद उस दुकान का निज़ाम बदले!
घिसटती ज़िन्दगी में जो ख्वाहिशें आधी रह गयीं,
कुछ पल जीकर उन्हें सुधार दो ना!
खौफ की खाल उतार दो ना…
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ICF Awards 2017 Categories #ICFA_2017

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*) – Best Blogger-Reviewer
*) – Best Cartoonist
*) – Best Colorist
*) – Best Comics Collector
*) – Best Fanfiction Writer
*) – Best Fan Artist
*) – Best Fan Work (Comic, Video, Music etc)
*) – Best Webcomic
*) – ICF Hall of Fame

ICF Awards 2017 results to be calculated based on previous awards polls, nominations. Cosplay category discontinued after no recorded cosplay on any character from Indian Comics universe 2 years in a row. No category-wise separate polls this year. However, you can still nominate a fan or artist in these categories. Your nomination mail/message equals to one vote. Email nominee’s name, category (maximum 3 category nominations for 1 person) – letsmohit@gmail.com or inbox us (Indian Comics Fandom), Deadline is Tuesday, 31 October 2017
Image Credit – Vector Open
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#freelance_talents #icfawards #indiancomics #indiancomicsfandom #ICFA_2017 #freelancetalents #comics #art

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