Jug Jug Maro # 1 – मुआवज़ा (काव्य कॉमिक)

cover

जुग जुग मरो सीरीज की पहली कविता और कॉमिक्स के संगम से बनी काव्य कॉमिक्स, “मुआवज़ा” शराबियों और सरकार पर कटाक्ष है, जो अपने-अपने नशे में चूर पड़े रहते हैं और जब तक उन्हें होश आता है तब कुछ किया नहीं जा सकता। अपना मन बहलाने के लिए कड़े कदम और राहत की मोक ड्रिल की जाते है और फिर सब पुराने ढर्रे पर लौट आते हैं। मुश्किल सामने पड़ी चुनौतियाँ नहीं बल्कि उनसे निपटने की नियत रखने में है। समाज का एक तबका इतना व्यर्थ माना जाता है कि 10 जाएं या हज़ार मजाल है जो समाज ठिठक तक जाए।
मोहित शर्मा ज़हन की प्रतिलिपि प्रोफाइल
intro-and-credits-page
Intro Page
Advertisements

Kavya Comic #12 – Kadr (कद्र)

kadr-cover-copy

Deepjoy Subba (Illustrator), Mohit Sharma (Writer-Poet), Harendra Saini (Colorist), Youdhveer Singh (Letterer), Cover Artist – James Boswell

Intro Poem (2016), Comic Poem (2007), Cover Art (1939)

04-copy-1

intro-copy-1

बेटा जब बड़े हो जाओगे….
बेटा जब बड़े हो जाओगे ना…
…और कभी अपना प्रयास निरर्थक लगें,
तो मुरझाये पत्तो की रेखाओं से चटख रंग का महत्त्व मांग लेना।
जब जीवन कुछ सरल लगे,
तो बरसात की तैयारी में मगन कीड़ो से चिंता जान लेना।

बेटा जब बड़े हो जाओगे ना…
…और कभी दुख का पहाड़ टूट पड़े,
तो कड़ी धूप में कूकती कोयल में उम्मीद सुन लेना।
जब सामने कोई बड़ी चुनौती मिले,
तो युद्ध में घायल सैनिक से साँसों की कीमत जांच लेना।

बेटा जब बड़े हो जाओगे ना…
…और कभी अहंकार का दंश चुभे,
तो सागर का एक छोर नाप लेना।
जब कहीं विश्वास डिगने लगे,
तो कुत्ते की आँखों से वफादारी नेक लेना।
कभी दुनिया का मोल पता ना चले,
गुरु की चिता पर बिलखते शिष्य में कद्र सीख लेना।

बेटा जब मेरी याद आये…
…तो अपने बच्चे को छाँव देती किसी भी माँ में मुझे देख लेना।

#ज़हन
===============

कद्र (काव्य कॉमिक) अब Culture POPcorn वेबसाइट, Google Books-Play, Archives, Issuu, Ebooks Daily, Comicverse आदि पर उपलब्ध।

http://www.culturepopcorn.com/kadr-kavya-comic-web-comic/

अपना उधार ले जाना! (नज़्म) – मोहित शर्मा ज़हन

06-copy
अपना उधार ले जाना!
तेरी औकात पूछने वालो का जहां,
सीरत पर ज़ीनत रखने वाले रहते जहाँ,
अव्वल खूबसूरत होना तेरा गुनाह,
उसपर पंखो को फड़फड़ाना क्यों चुना?
अबकी आकर अपना उधार ले जाना!
 ======
पत्थर को पिघलाती ज़ख्मी आहें,
आँचल में बच्चो को सहलाती बाहें,
तेरे दामन के दाग का हिसाब माँगती वो चलती-फिरती लाशें।
किस हक़ से देखा उन्होंने कि चल रही हैं तेरी साँसे?
तसल्ली से उन सबको खरी-खोटी सुना आना,
अबकी आकर अपना उधार ले जाना!
माँ-पापा के मन को कुरेदती उसकी यादें धुँधली,
देखो कितनो पर कर्ज़ा छोड़ गई पगली।
ये सब तो ऐसे ही एहसानफरामोश रहेंगे,
पीठ पीछे-मिट्टी ऊपर बातें कहेंगे,
तेरी सादगी को बेवकूफी बताकर हँसेंगे,
बूढे होकर बोर ज़िन्दगी मरेंगे।
इनके कहे पर मत जाना,
अपनी दुनिया में खोई दुनिया को माफ़ कर देना,
अबकी आकर अपना उधार ले जाना!
 ==========
ख्वाबों ने कितना सिखाया,
और मौके पर आँखें ज़ुबां बन गयीं…
रात दीदार में बही,
हाय! कुछ बोलने चली तो सहरिश रह गई…
अब ख्वाब पूछते हैं….जिनको निकले अरसा हुआ,
उनकी राह तकती तू किस दौर में अटकी रह गई….
कितना सामान काम का नहीं कबसे,
उन यादों से चिपका जो दिल के पास हैं सबसे,
पुराने ठिकाने पर …ज़िन्दगी से चुरा कर कुछ दिन रखे होंगे,
दोबारा उन्हें चैन से जी लेना…
इस बार अपना जीवन अपने लिए जीना,
अबकी आकर अपना उधार ले जाना!
 ============
बेगैरत पति को छोडने पर पड़े थे जिनके ताने,
अखबारों में शहादत पढ़,
लगे बेशर्म तेरे किस्से गाने।
ज़रा से कंधो पर साढ़े तीन सौ लोग लाद लाई,
हम तेरे लायक नहीं,
फिर क्यों यहाँ पर आई?
जैसे कुछ लम्हो के लिए सारे मज़हब मिला दिए तूने,
किसी का बड़ा कर्म होगा जो फ़रिश्ते दुआ लगे सुनने….
छूटे सावन की मल्हार पूरी कर आना,
….और हाँ नीरजा! अबकी आकर अपना उधार ले जाना!
=====================
*नीरजा भनोट को नज़्म से श्रद्धांजलि*, कल प्रकाशित हुई ट्रिब्यूट कॉमिक “इंसानी परी” में यह नज़्म शामिल है।

Kavya Comics (Volume 4)

ZaTE9x1464992586

काव्य कॉमिक्स संग्रह – 4, विभिन्न कलाकारों के साथ रची शार्ट काव्य कॉमिक्स (पोएट्री कॉमिक्स) का संकलन है। इस संकलन की टाइमलाइन वर्ष 2011 से लेकर 2014 तक है।

Event news (March 2016)

news2

Amazing event!

Shayari #‎ज़हन

यूँ ही फिर दिल को कोई नयी बात लुभा गई,
गिचपिच, मन की संकरी गलियों से किसी पुरानी याद को हटा गई…
जो याद हटी….जाते-जाते आखरी बार ख़्वाब में आ गई…

=========================

दुनियाभर को बकवास जिसने बताया,
वो रुखा दार्शनिक…एक बच्चे की मुस्कान पर रिझ गया…
कितने बही खाते सिफर में उलझे रहे,
और एक तस्वीर में सारा जहाँ सिमट गया…
अब याद नहीं…बेमतलब बातों में कितना वक़्त साथ गुज़ारा,
तुमसे आँखों के मिलने का पल मेरे पास रह गया….

Poetic Post from latest Kavya Comic #kavya_comics

11179957_838540432888133_153516141283047222_n

नमस्ते! दुनियाभर में अनेको लोग अपनी इच्छा के विरुद्ध किसी संस्था, प्रभावशाली व्यक्ति, विचारधारा, सामाजिक प्रणालियों की परछाई में अपना जीवन काट देते है। उनसे अधिक दुर्भाग्यशाली लोग ऐसे होते है जो इतने जागरूक ही नहीं हो पाते कि अपनी सोच बना पायें। स्थापित प्रणाली पर बिना सवाल उठाये भेड़चाल का हिस्सा बन अपना जीवन काट देते है। उन्ही परिस्थितियों में काफी कम संख्या में लोग गलत परन्तु प्रचलित बातों के खिलाफ आंदोलन करते है। शांत, संतुष्ट जनता का बड़ा बहुमत होने के कारण सरकारों एवम शासको के लिए ऐसे विद्रोहों, आंदोलनों को कुचलना आसान बन जाता है।

अक्सर ऐसी कई आहुतियों की लपट हम तक पहुँच नहीं पाती। जैसे सूखी लकड़ियों और घी-कपूर में प्रज्वलित अग्नि में हवन सामग्री स्वाहा हो जाती है, वैसे ही शायद इस संघर्ष  का महत्त्व इन इकाई बलिदानो में साफ़ ना दिख पाये पर लगातार मंत्रो के बाद पड़ रही हवन सामग्री अग्नि की प्रचंडता समाप्त कर देती है, ठीक  वैसे ही लगातार छोटे-छोटे संघर्षों की बूँदें एक सैलाब बनकर भव्य शासको, शक्तिशाली विचारधारों को बहा ले जाती है। जनता को पूरे न्याय की ना जानकारी होती है और ना ही उम्मीद पर समस्या तब आती है जब बूँद-बूँद के लिए करोडो, अरबों को घिसटते हुए जीवन व्यतीत करना पड़ता है।  हर सक्षम नागरिक कि नैतिक ज़िम्मेदारी बनती है कि असल और ढोंग के संघर्षों में फर्क करते हुए अपने कम भाग्यशाली देशवासियों की मदद में योगदान दे, प्रयासरत रहे। इस काव्य कॉमिक की प्रेरणा मुझे तिब्बत संघर्ष में बरसो से खुद को जलाकर, अपनी बलि दे रहे प्रदर्शनकारियों से मिली।

यह यश ठाकुर ( हरीश अथर्व) जी कि पहली कॉमिक है जो काफी समय से अटकी हुयी थी, आखिरकार उनकी मेहनत सबके सामने है जिसके लिए उन्हें बहुत बधाई! हालाँकि, इस बीच उनकी कला में काफी सुधार आया है। पाठको और फेनिल शेरडीवाला जी के सुझावों, अवलोकन अनुसार आगे बेहतर काम आप सभी के सामने होगा।

आपका

मोहित शर्मा (ज़हन)