Comic Fan Fest # 5 (24 April 2016)

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Comic Fan Fest # 5 (24 April 2016) – Delhi, Lucknow and Hyderabad
Delhi Chief Guest – Writer Mr. Bimal Chatterjee

“Bimal ji sharing his experience at Comic Fan Fest 5. In background cover of a comic written by Mr. Bimal Chatterjee which broke all records that time.
Khooni Danav is also the first digest of Indian Comic Industry.”

24 अप्रैल 2016 को कॉमिक फैन फेस्ट इवेंट का पांचवा संस्करण कई यादगार पलों के साथ संपन्न हुआ। इस बार फेस्ट दिल्ली के साथ-साथ लखनऊ और हैदराबाद में भी मनाया गया। दिल्ली में मुख्य अथिति के रूप में श्री बिमल चटर्जी ने आयोजन की शोभा बढ़ायी। आने वाले सदस्यों को कुछ उपहार भी वितरित किये गए। हैदराबाद आयोजन जयंत कुमार ने सम्भाला तो लखनऊ की ज़िम्मा मेरे हिस्से आया। हर बार की तरह इस आयोजन के ज़रिये कुछ नए कॉमिक प्रेमी मित्रों से मिलना हुआ। – मोहित शर्मा ज़हन

Upcoming Freelance Talents Comics

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*) – 3 Runs ka Sauda (3 रन का सौदा) by Amit Albert (Illustrator) and Mohit Trendster (Writer)

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*) – Domuha Aakrman – Tadam Gyadu
(Penciller), Mohit Trendster (Writer), Haredra Saini (Colorist), Youdhveer Singh (Letterer)

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*) – Kadr ‪#‎WIP‬ – Deepjoy Subba, Mohit Trendster, Neel Eeshu
‪#‎kavya‬ ‪#‎kavyacomics‬ ‪#‎poetry‬ ‪#‎poem‬ ‪#‎art‬ ‪#‎teaser‬ ‪#‎promo‬‪#‎freelancetalents‬ ‪#‎deepjoy‬ ‪#‎deepjoysubba‬ ‪#‎mohitness‬ ‪#‎neel ‬‪#‎mohit_trendster‬ ‪#‎trendybaba‬ ‪#‎trendster‬ ‪#‎freelance_talents‬ ‪#‎india‬‪#‎comics‬

साक्षात्कार – अक्षय धर (मेटा देसी कॉमिक्स)

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काफी समय से कॉमिक्स जगत में सक्रीय लेखक-कलाकार-प्रकाशक अक्षय धर का मार्च 2016 में साक्षात्कार लिया। जानकार अच्छा लगा कि भारत में कई कलाकार, लेखक इतने कम प्रोत्साहन के बाद भी लगातार बढ़िया काम कर रहें हैं। पेश है अक्षय के इंटरव्यू के मुख्य अंश। – मोहित शर्मा ज़हन

Q – अपने बारे में कुछ बताएं? 

अक्षय – मेरा नाम अक्षय धर है और मैं एक लेखक हूँ। लेखन मुझे किसी भी और चीज़ से ज़्यादा पसंद है। मैं मेटा देसी कॉमिक्स प्रकाशन का संस्थापक हूँ। अपने प्रकाशन के लिए कुछ कॉमिक्स का लेखन और संपादन का काम भी करता हूँ। अपने काम में कितना सफल हूँ, यह आप लोग बेहतर बता सकते हैं।

Q – पहले और अब आर्टिस्ट व लेखकों में क्या अंतर महसूस किया आपने?

अक्षय – कॉमिक्स के मामले में ज़्यादा अंतर नहीं लगता मुझे, क्योकि विदेशो की तुलना में भारत में कभी भी उतना विस्तृत और प्रतिस्पर्धात्मक कॉमिक्स कल्चर नहीं रहा। हाँ पिछले कुछ वर्षों में विभिन्न कलाकारों, लेखकों का काम देखने को मिल रहा है। फिर भी पहले लेखकों की फोल्लोविंग अधिक थी, यह स्थिति धीरे-धीरे चित्रकारों, कलाकारों के पक्ष में झुक रही है। भारत के साथ-साथ अन्य देशो के कॉमिक इवेंट्स में लेखकों की तुलना में कलाकारों अधिक आकर्षण का केंद्र रहते हैं। अब कॉमिक्स की कहानियों और कला में बेहतर संतुलन देखने को मिल रहा है।

Q – आपके पसंदीदा कलाकार, लेखक और क्यों?

अक्षय – मेरे पसंदीदा लेखक और कलाकार पाश्चात्य प्रकाशनों से हैं क्योकि वहां जैसे प्रयोग, अनुशासन और अनुभव भारत में कम देखने को मिलते हैं। लेखकों में मैं Mark Waid, Greg Rucka, Jim Zum, Jeff Parker, Grant Morrison, Garth Ennis, Gail Simone and Warren Ellis का काम बड़े चाव से पढता हूँ। कलाकारों में Geof Darrow and J.H.Williams. हालांकि, Adam Hughes, Stjepan Sejic and Darick Robertson जैसे आर्टिस्ट्स का काम मुझे अच्छा लगता है।

Q – अपने देश में कॉमिक्स का क्या भविष्य देखते हैं?

अक्षय – भारत में बहुत सम्भावनाएं है। कला, कहानियों-किवदंतियों-किस्सों के रूप में हमारे पास अथाह धरोहर है। हमारे इतिहास में इन कलाओं के कई उदाहरण है। इतनी संभावनाओं के होने के बाद भी आम देशवासी का नजरिया कॉमिक्स के प्रति बड़ा नकारात्मक और निराश करने वाला है। अगर लोग कॉमिक्स को बच्चों की तरह बड़ो के लिए भी माने और उनको साहित्य में जगह दें। कॉमिक्स को नकारने के बजाये एक कहानी, शिक्षा को बताने का साहित्यिक तरीका मानें, तो भारतीय कॉमिक्स बहुत जल्द बड़े स्तर पर आ जाएंगी।

Q – इंडिपेंडेंट कॉमिक्स प्रकाशित करना इतना मुश्किल काम क्यों है?

अक्षय – भारत में इंडिपेंडेंट कॉमिक्स बनाना और प्रकाशित करना बहुत मुश्किल हैं, क्योकि –

1. “बचकानी चीज़” कॉमिक्स की जो छवि बनी है देश के लोगो के दिमाग में वो सबसे बड़ी बाधा है। लोगो को थोड़ा लचीला होना चाहिए।

2. दुर्भाग्यवश, पहले से ही कम कॉमिक पाठकों में अधिकतर भारतीय कॉमिक फैंस कुछ किरदारों या 2-3 प्रकाशनों के अलावा किसी नयी कॉमिक को पढ़ना पसंद नहीं करते। बैटमैन, नागराज, चाचा चौधरी पढ़िए पर नए प्रकाशनों को भी ज़रूर मौका दीजिये।

Q – अब तक का अपना सबसे चुनौतीपूर्ण और सर्वश्रेष्ठ काम किसे मानते हैं और क्यों? 

अक्षय – ग्राउंड जीरो ऍंथोलॉजी के अंतिम 2 कॉमिक्स के बारे में सोचकर गर्व महसूस करता हूँ। यह काम दर्जन भर से अधिक उन लोगो की ऐसी टीम के साथ किया जिन्हे कॉमिक्स के बारे में कोई अनुभव नहीं था। मुझे प्रकाशन का अनुभव नहीं था फिर भी जिस स्तर की ये कॉमिक्स बनी है देख कर अच्छा लगता है। साथ ही पाठको को हर कॉमिक्स के साथ हमारे लेखन, कला में सुधार लगेगा।

 रैट्रोग्रेड के लिए मन में एक सॉफ्टस्पॉट हमेशा रहेगा। दिल्ली में आयोजित, भारत के पहले कॉमिक कॉन में पॉप कल्चर द्वारा प्रकाशित मेरी यह कॉमिक पाठकों द्वारा काफी सराही गयी थी। यह एक बड़ी कहानी है, जिसे मैं आगे जारी करना चाहता हूँ, जिसपर विचार चल रहा है। अभी तक इवेंट्स में लोग हमारे स्टाल पर रूककर इस कॉमिक, कहानी के बारे में पूछते हैं।

Q – मेटा देसी कॉमिक्स के अब तक के सफर के बारे मे  बताएं।

अक्षय – मेटा देसी कॉमिक्स की शुरुआत मैंने उन प्रतिभाओं को मौका देने के लिए की थी, जिनसे मैं अपने देश भर में कॉमिक इवेंट्स के दौरान मिला था। अपनी तरफ से कुछ कलाकारों, लेखकों की मदद के लिए यह कदम उठाया था। धीरे-धीरे इसका इतना विस्तार हुआ कि अब मेटा देसी की अच्छी-खासी फॉलोइंग है। ग्राउंड जीरो सीरीज में 3 कॉमिक्स आने के बाद अब हमनें पाठको की मांग पर अभिजीत किनी द्वारा बनाए गए होली हेल को अलग कॉमिक दी है। जातक माँगा के रूप में हमारी वेबसाइट पर वेबकॉमिक चल रही है। जिसमे हम बिना शब्दों का प्रयोग कर माँगा स्टाइल में जातक कथाएं बना रहें हैं। हाल ही में चेरियट कॉमिक्स के साथ मिलकर एक नयी लाइन आईसीबीएम कॉमिक्स की शुरुआत की है, जिसमे पाठको को अलग अंदाज़ में कुछ कॉमिक्स मिलेंगी। ऐसा करने से प्रकाशन में हमारा खर्च भी साझा हुआ है।

Q – कॉमिक कॉन जैसे इवेंट्स में क्या सुधार होने चाहिए?

अक्षय – कॉमिक कॉन में दोनों तरह की बातें है। एक तरफ इतने बड़े इवेंट के रूप में कई इंडिपेंडेंट पब्लिशर, रचनाकारों को एक प्लेटफार्म मिलता है, वहीं दूसरी और उनपर मर्केंडाइज, गिफ्ट आदि कंपनियों को अधिक स्टाल देकर कॉमिक इवेंट को डाइल्यूट करने की बात कही जाती है। मेरे मत में अगर प्रकाशनों से उन्हें पर्याप्त सेल नहीं मिल रही तो अपना व्यापार बनाए रखने के लिए और आगे के इवेंट्स करने के लिए उन्हें अन्य कंपनियों की ज़रुरत पड़ती है।

यह कम करने के लिए हमे इवेंट्स पर और कॉमिक्स फैंस की ज़रुरत है। जो हमारी कॉमिक्स खरीदें और हमे बताये कि हम क्या सही कर रहें है, कहाँ हम गलत हैं, किस किरदार या रचनाकार में क्या सम्भावनाएं है।

Q – भविष्य में कॉमिक्स से जुडी योजनाओं के बारे में जानकारी साझा कीजिये। 

अक्षय – अभी कुछ प्रोजेक्ट्स शुरुआती चरण में है जिनके बारे में बताना संभव नहीं। वैसे इस साल चेरियट कॉमिक्स के साथ मिलकर 3 कॉमिक्स प्रकाशित करने की योजना है। जिनमे से एक होली हल का तीसरा अंक होगा।

Q – कई पाठक कम प्रचलित या नए प्रकाशन की कॉमिक्स, नोवेल्स और किताबे खरीदने से डरते है। उनके लिए आपका क्या संदेश है?

अक्षय – मेरा यही संदेश है कि हम लालची नहीं है, कला-कॉमिक्स और अंतहीन काल्पनिक जगत के प्रति अपने जनून के लिए कर रहें है। जैसा लोग कहते हैं सिर्फ जनून से पेट नहीं भरते इसलिए हमे आपके सहयोग और मार्गदर्शन की आवश्यकता है। यह बिल्कुल ज़रूरी नहीं कि जिस चीज़ से आप अंजान हों वह अच्छी नहीं होगी। नयी प्रतिभाओं को मौका दीजिये, कुछ नया मनोरंजन आज़मा कर देखिये…..हो सकता है आपके सहयोग से कई कलाकारों का जीवन सफल हो जाए। बहुत-बहुत धन्यवाद!

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“Bade ho jao!”- Writer Mohit Sharma Trendster

“बड़े हो जाओ!” – मोहित शर्मा (ज़हन)

अपनी बच्ची को सनस्क्रीन लोशन लगा कर और उसके हाथ पांव ढक कर भी उसे संतुष्टि नहीं मिली। कहीं कुछ कमी थी…अरे हाँ! हैट तो भूल ही गया। अभी बीमार पड़ जाती बेचारी…गर्दन काली हो जाती सो अलग। उस आदमी को भरी धूप, गलन-कोहरे वाली कड़ी सर्दी या बरसात में भीगना कैसा होता है अच्छी तरह से पता था। ऐसा नहीं था कि वो किसी गरीब या अभागे परिवार में जन्मा था। पर अपने दोस्तों, खेल या कॉमिक्स के चक्कर में वो ऐसे मौसमो में बाहर निकल आता जिनमें वो किसी और बात पर बाहर निकलने की सोचता भी नहीं। ये उसका पागलपन ही था कि जब समाचारपत्र उसके शहर में माइनस डिग्री सेल्सियस पर जमे, कई दशको के न्यूनतम तापमान पर हेडलाइन्स छाप रहे थे, तब बुक स्टाल पर उन्हें अनदेखा करते हुए वह ठिठुरता हुआ उन अखबारों के बीच दबी कॉमिक्स छांट रहा था। या जो भूले बिसरे ही अपनी कॉपी-किताबों पर मुश्किल से कवर चढ़ाता था, वह कुछ ख़ास कॉमिक्स पर ऐसी सावधानी से कवर चढ़ाता था कि दूर से ऐसा लगे की शहर का कोई नामी कलाकार नक्काशी कर रहा हो। या वो जिसे स्कूल में कॉमिक्स का तस्कर, माफिया तक कहा जाता हो। जाने कितने किस्से थे उसके जूनून के, जो औरों को बाहर से देखने पर पागलपन लगता था। “बच्चो वाली चीज़ छोडो, बड़े हो जाओ!” यह वाक्य उसने 11 साल की उम्र में पहली बार सुना। उसने तब खुद को तसल्ली दी की अभी तो वो बच्चा ही है। फिर उसे यह बात अलग-अलग लोगो से सुनने और इसे नज़रअंदाज़ करने की आदत हो गयी।

समय के साथ जीवन और उसकी प्राथमिकताएं बदली। यकायक व्यवहारिक, वास्तविक दुनिया ने चित्रकथा की स्वप्निल दुनिया को ऐसा धोबी पाट दिया कि कभी जो घर का सबसे ख़ास कोना था वह सबसे उपेक्षित बन गया। उसकी शादी हुयी! पत्नी द्वारा उस कोने की बात करने पर वह कोई ना कोई बहाना बनाकर टाल देता, जैसे वो अबतक अपने घरवालों को टालता आया था। जिसपर अब भी वह ख़ुशी से “बड़े हो जाओ” का ताना सुन लेता था। उसके दिमाग का एक बड़ा हिस्सा व्यवहारिक होकर स्वयं उसे बड़े हो जाने को कह रहा था। जबकि कहीं उसके मन का एक छोटा सा हिस्सा अक्सर नींद से पहले, सपनो में या यूँ ही बचपन, किशोरावस्था में उसके संघर्ष, जूनून की कोई स्मृति ले आता।  वो मन जिसे उसने वर्षो तक इस भुलावे में रखा था कि यही सब कुछ है बाकी दुनिया बाद में। अब मन का छोटा ही सही पर वह हिस्सा ऐसे कैसे हार मान लेता।

फिर उसके घर एक नन्ही परी, उसकी लड़की का आगमन हुआ। जिसने बिना शर्त पूरे मन (उस छोटे हिस्से को भी) हाईजैक कर लिया। आखिरकार, उसने अपनी हज़ारों कॉमिक्स निकाली। हर कवर को देख कर उसकी कहानी, वर्ष, रचनाकारों के साथ-साथ उस प्रति को पाने का संघर्ष उसके मन में ताज़ा हो गया। जैसे एक बार कमेंटरी में मोहम्मद अज़हरुद्दीन को डिहाइड्रेशन होने की बात बताये जाने पर उसने ही अपने मित्रों को इस बात का मतलब समझाया था…. क्योंकि एक बार डॉक्टर ने यह उसे तब बताया था जब उसके घरवाले उसे कमज़ोरी, चक्कर आने पर पड़ोस में ले गए थे। उसे चक्कर जून की गर्मी में बाहर किस वजह से रहने से आये होंगे यह बताने की ज़रुरत नहीं। 2 किशोर उसके घर आये जिन्हे उसने अपनी कॉमिक्स के गट्ठर सौंपे। बड़े जोश में उसने अपने किस्से, बातें सुनाने शुरू किये पर उनसे बात करने के थोड़ी ही देर में उसे अंदाज़ा हो गया कि समय कितना बदल गया है और दोनों पार्टीज एक दूसरे की बातों से जुड़ नहीं पा रहें है। अंततः उन किशोरों ने विदा ली और दरवाज़े पर उन्हें छोड़ते हुए, मन का वह छोटा हिस्सा जो अबतक रूठा बैठा था, दबी सी आवाज़ में बोला “ख़्याल रखना इनका।”

 कुछ महीनों बाद दिनचर्या बदली, काम और ज़िम्मेदारियाँ बढ़ीं। एक दिन पत्नी ने टोका – “इतने चुप-चुप क्यों रहते हों? क्या सोचते रहते हो? इंसान हो मशीन मत बनो! क्या हमेशा से ही ऐसे थे?”

अच्छा लगा कि फॉर ए चेंज`व्यवहारिक, वास्तविक दुनिया वाले दिमाग को खरी-खोटी सुनने को मिली। पर फ़िर से जीवन की किसी उधेड़बुन को सोचते हुए उसने कहा – ” …बड़ा हो गया हूँ! यही तो सब चाहते थे।” 🙂 
समाप्त!

#mohitness #mohit_trendster #trendybaba #freelance_talents

 Notes: काल्पनिक कहानी, यहाँ बाकी दुनिया को बेकार नहीं कह रहा, बस एक दुनिया छूट जाने का दर्द लिख रहा हूँ जो अक्सर देखता हूँ मित्रों में। Artworks by Mr. Saket Kumar (Ghulam-e-Hind Teaser)

Seasonal Unemployment (Indian Superheroes)

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Seasonal Unemployment (Indian Superheroes). :))

– #mohit_trendster #aakash #freelance_talents

Indian Comics Fandom Annual Poll 2015

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Campfire Graphic Novels (37.4% Votes) surpasses 3-time champion Holy Cow Entertainment (22.3% Votes) to win ICF’s Fourth Annual Poll !!! Congratulations Team CGN. Yali Dream Creations clinches podium spot with 11.8% Votes.

Partner Communities – Indian Comics Universe Fan Club, RFN, RCF, Indian Comics Galaxy, Indian Comics Fans Junction, Comics Diwane.

*Inactive publications featured during 2012-2014 polls, indie publishers with very little following or publishers which mainly publish reprints (ACK Media etc), not included in the poll list this year.

Interview with Mithilesh Gupta

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Promo Poster by Tadam Gyadu
 
कॉमिक्स प्रशंषक और कलाकार श्री मिथिलेश गुप्ता से उनकी आगामी फैन लाइव-एक्शन फिल्म “बांकेलाल और क्रुकबांड” और अन्य प्रोजेक्ट्स को लेकर हुयी बातचीत के अंश। आशा है इस फिल्म को अच्छा रेस्पोंस मिले और अपने उद्देश्य में सफल हो।
*) – अपना और अपने साथियों का संक्षिप्त परिचय हमसे करायें। 
पहले तो सभी कॉमिक्स प्रेमियों को मेरा नमस्कार, मैं भी आप सभी की तरह एक कॉमिक्स प्रेमी हूँ. मेरा नाम मिथिलेश गुप्ता है और मैं यु तो इंदौर का रहने वाला हूँ .पर यहाँ हैदराबाद में ३ साल से रह रहा हु और एक हेल्थ केयर MNC में काम करता हु। मेरी इस मूवी की टीम में और ३ मुख्य लोग शामिल हैं
जिनसे मेरी मुलाक़ात हैदराबाद कॉमिक्स कोंन  में हुयी थी ,सभी कॉमिक्स फंस हैं और हैदराबाद में ही कार्यरत हैं।
प्रद्युम्नदेव जोधा जी जो की राजस्थान से हैं  और वो विक्रमसिंह के किरदार में हैं .और इस फिल्म के प्रोडूसर भी हैं .उनके बिना ये फिल्म बनाना मुमकिन नही था। दुसरे “मोहन मौर्य ” जी हैं जो क्रूक् बांड के किरदार में हैं और राजस्थान से ही हैं, और उन्होंने इस फिल्म के लिए २ गाने लिखे हैं .
तीसरे सिद्धार्थ गुप्ता जी जो “ग्वालियर ” से हैं और इस फिम्ल में “मोटू ” के रोले में नज़र आएंगे .
*) – फिल्म को बनाने का विचार कैसे आया और क्या माहौल था मूवी बनने से पहले?
साल के पहले महीने में मेरी एक documentary film जो की चेतन भगत के नावेल “हाफ गर्लफ्रेंड ” पर आधारित है बन के रिलीज़ हो चुकी थी ..लोगो का अच्छा रेस्पोंसे मिला .जिसकी शूटिंग मेरे मोबाइल से मध्यप्रदेश और बिहार में की गयी थी। इस के बाद मैं अपनी एक हॉरर नावेल लव ट्रायंगल पर काम कर रहा था २ दिन की शूटिंग भी हो गयी थी पर कैमरा अच्छा नहीं था तो कहानी बंद टालनी  पड़ी। तभी मुझे कॉमिक्स पर कुछ काम करने का विचार आया ,हालाँकि ये विचार आने का एक रीज़न ये भी मान सकते हैं की प्रद्युमन भाई के पास कुछ कॉमिक्स चरित्रों के ड्रेस बने हुए थे कॉमिक कोंन के लिए,
मतलब अब मेरे दिमाग में कहानी घुमने लगी और प्लान बन गया बस मेने इन तीनो को मन में रखकर ४ चरित्रों वाली कहानी गढ़नी शुरू की . “बांकेलाल और क्रूक् बांड ” और मुझे लगता है सभी अपने किरदारों में एक दम फिट लगे हैं। मेने इन् चारो को फोन करके अपना कांसेप्ट सूनाया की मैं एक मूवी बनाना चाहता हूँ पहले तो कुछ लोग नहीं मान पाए ,मेने सन्डे को मिलके समझाने का कहा …और एक मीटिंग करवाया।
इसके पहले हम सब एक दो बार ही मिले थे ..हैदराबाद में, फिर क्या  था मेने जब अपने डायरेक्शन के नज़रिए से इन्हें समझाया यकीन मानिय एक ने भी ना नहीं बोला.मतलब सबको मेरा  कांसेप्ट पसंद  आ गया था। और प्रद्युमन भाई के पास २ बड़े कैमरे भी थे मतलब काम हो गया था और फिर इस मूवी पर पूरे जोरो से मेने काम करना शुरू कर दिया शूटिंग के लिए।
*) – क्या प्रक्रिया रही इस फिल्म को बनाने में? 
एक्टिंग. सबको यही लग रहा था होगा या नहीं ,मेने कहा जेसे आप उन् किरदारों को कॉमिक्स में पढ़ते हैं उसे अपने आप में ढाल लो .बस फिर उस एक हफ्ते सब उन् किरदारों की पढने में फिर से बिजी हो गए थे ….हालाँकि हमारे पास ओनली सन्डे ही था बाकी दिन ऑफिस का था .प्लान था एक सन्डे में इश  फिल्म को फिल्म लेन्गे. अब हमारे पास ड्रेस थी। २ बड़े कैमरे भी हो गए थे। मेने स्क्रिप्ट एक हफ्ते में लिख चूका था ..अगले हफ्ते ही हमारे मीटिंग के शूटिंग स्टार्ट कर दी गयी फ़रवरी के पहले वीक में .लोकेशन था प्रद्युमन भाई का बड़ा फ्लैट जिसे हमने क्रूक्बोंद का ऑफिस बनया था और कुछ बाहर की शूटिंग एक जंगल और रोड पर करनी पड़ी। एक दिन में शूटिंग नहीं हो पायी .क्युकी बांकेलाल और विक्रमसिंह के ड्रेसिंग में १ घंटा तक लग जाता था फिर मैं स्क्रिप्ट पढ पढ़ कर चारो के किरदारों को सेट पे एक्ट करने बताता था …काफी टाइम लग रहा था क्युकी बार बार प्रैक्टिस करनी पडी .अरे भाई पन्नो से चरित्रों को निभाना कोई आसान काम नही था, और फिर नेक्स्ट वीक फिर शूटिंग  करना पड़ा।
टाइम की कमी के कारण नेक्स्ट शूटिंग २ हफ्तों के बाद की, काफी सीन्स फिर से करने पड़े ,और ऐसे १ महिना निकल गया .काफी ट्विस्ट जनम लेने लगे थे ,हम सब एक्टर्स तो हैं नहीं फिर भी हमने अपने आप के एक्टर्स को बहार निकाल के एक्टिंग की है जो आपको जरुर पसंद आयेगी . सभी ने फिल्म को बनाने में काफी न्यू न्यू आइडियाज दिए हैं ,जो इस फिल्म की  जान हैं।
*) – फिल्म को बनाने में क्या क्या challanges आये ?
काफी सारे ,,,,,,,क्युकी सभी का अपना जॉब भी था और हमारे पास सिर्फ एक सन्डे होता था ,,,पर उसमे भी अगर एक का भी सन्डे फ्री न हुआ तो बाकी ३ कुछ नही कर पा रहे थे। रात रात भर जाग जाग जार शूटिंग करी गयी और काफी क्लोज हो गए हम सब, सेट पर डिनर के साथ साथ मस्ती भी काफी होती थी .
सभी की हार्ड वर्क की मैं तारीफ़ करूंगा जिन्होंने इतना साथ दिया और मेरे वर्क पे भरोसा किआ …मैं जेसा चाहता था मूवी उससे भी बेहतर बन रही है इसलिए टाइम लग रहा है और अब शूटिंग हो चुकी है। फिल्म को ज्यादा अच्छा बनाने के लिए अब २ sundays सिर्फ डबिंग में जा रहे है जो काफी समय ले रहा है .और मैं ऑफिस से आकर एडिटिंग वर्क भी कर रहा हु .तो वहीँ  सोंग्स की धून भी मोहन जी और मैं बना रहे थे। चूँकि ये fanmade फिल्म है और हमरे पास कोई फंडिंग नहीं थी, हम सबने मिलके ये सब किया है और वर्क तो बहुत जादा हुआ है कैमरे के पीछे भी काफी दोस्तों ने हार्ड वर्क किया है।
*) – किस तरह कि कहानी देखने को मिलेगी फैन्स को? 
कहानी एकदम न्यू होगी, क्युकी क्रूक बांड  और बांकेलाल तो एक कॉमिक्स के हैं नहीं मेने उन्हें दो अलग अलग कॉमिक्स से उठाया है . उन्हें वेसा ही दिखाया है जेसा वो कॉमिक्स में होते हैं . पर दोनों का एक साथ मिलाप एकदम सुपर है (हा हा हा ) खूब हँसेंगे आप सब। हमने कभी इन् किरदारों को पन्नो से बहार तो देखा नही , मुझे उम्मीद है आप लोगो को जरुर अच्छा लगेगा इन् दो कॉमेडी पात्रों को देख कर और इसमें कुछ सुपर हीरोज आपको गेस्ट रोले में भी दिख सकते हैं।
*) – आगामी प्रोजेक्ट्स के बारे में कुछ बतायें।
ट्रेलर काफी फंस को  पसंद आया है और आ भी रहा है। मूवी के अछे रेस्पोंसे मिलने पर ऐसे ही कुछ और प्रोजेक्ट्स आपको देखने को मिलेंगे .जो की लाइन में हैं और इसके बाद मैं अपनी होर्रोरे मूवी “माय रूममेट -एक होर्रोरे लव स्टोरी ” जो २ कपल्स की कहानी है – की शूटिंग स्टार्ट करूँगा जो की बहुत बेस्ट होगी ..जिसका एक पोस्टर भी आ चूका है, उसके बाद मोहित शर्मा जी के कुछ प्रोजेक्ट मेरे पास आ चुके है और वर्क चल रहा है .समाज से जुडी कुछ और मूवीज भी आने वाले है। अच्छा लग रहा है जादा से ज्यादा लोग जुड़ रहे हैं , उम्मीद है फ्यूचर में काफी अछे फिल्म बना पाउँगा और मेरा ये जुनून कामयाब होगा .
*) – कॉमिक्स फैन्स के लिए कुछ शब्द…. 
इतना ही कहूँगा मैं कोई दूसरा नही आपकी ही तरह एक कॉमिक्स फेन हूँ, हैदराबाद कॉमिक्स कोंन में “तिरंगा ” बनाने के बाद फंस ने बहुत लाइक किया जिसके दम पे ये बना पाया हु। प्रद्युम्न भाई जो को “डोगा “बनते आये हैं कॉमिक कोंन  में,वो मेरे लिए एक inspiration हैं उनको सलाम .
और मैं भी कॉमिक्स की दुनिया में कुछ अलग कर रहा हु, सायद आपको पसंद आये, कोई सपोर्ट नही है किसी से जो है आप सबके जेसे फंस ही है। तभी ये बना पाया हूँ. दिन रात हम जुटे हैं एक साथ ताकि फिल्म अच्छी बन के सामने आये, आप सब का सहयोग चाहिए बस।
थैंक यू आल .
“कॉमिक्स हैं हमारा जूनून “
आपका
मिथिलेश गुप्ता

You & Me Film-Production | Facebook

– मोहित शर्मा (ज़हन)

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