टीनएज ट्रकवाली (कहानी) #ज़हन

44e14862c5f1661fa38415d88d049c58

थाने में बैठा कमलू सिपाहियों, पत्रकारों और कुछ लोगो की भीड़ लगने का इंतज़ार कर रहा था ताकि अपनी कहानी ज़्यादा से ज़्यादा लोगो को सुना सके। पुलिस के बारे में उसने काफी उल्टा-सुल्टा सुन रखा था तो मन के दिलासे के लिए कुछ देर रुकना बेहतर समझा।

“हज़ारो किलोमीटर लम्बा सफर करते हैं हम ट्रक वाले साहब! एक बार में पूरा देश नाप देते हैं। जगह-जगह रुकता हूँ, सब जानते हैं मुझे। आपके थाने में 4 ढाबे पड़ते हैं पर रात में केवल एक खुला मिलता है तो अक्सर यहाँ रुकना होता है। एक बार उसके अगले पेट्रोल पंप के बाहर बैठी एक लड़की देखी, यहाँ की नहीं लग रही थी और पता नहीं रात को वहाँ क्या कर रही थी…या शायद मुझे पता था पर मैं मानना नहीं चाहता था। अगली बार जब आया तो वह लड़की मरी आँखों वाली एक औरत  बन गई थी। सोचा ‘काश उस दिन रुक जाता! पर रुककर, कर भी क्या लेता…रुक के देख तो ले पगले…शायद कुछ हो जाए।’ लोगो और पुलिस की नज़रों से बचने के लिए पेट्रोल पंप वाला धंधे पर एक-दो लड़कियाँ ही रखता था, जब किसी की नज़र पड़ती भी थी तो उसपर पैसे डाल दिया करता। पहले आप लोगो को बताया तो मुझे बाहर से ही भगा दिया फिर अपने जमा रुपयों से ये लड़की खरीदी और हेल्पर हटाकर इसे रख लिया। कुछ हफ्तों बाद यहाँ से जाते हुए एक लड़की दिखी, आदत ऐसे थोड़े ही जाती है। मैंने पंप के मालिक को समझाने की बहुत कोशिश की पर वो नहीं माना, उल्टा मुझे बेची लड़की ज़बरदस्ती वापस लेने की बात करने लगा। किसी तरह वो लड़की भी खरीदी, अब मेरी 2 हेल्पर हो गयीं। फिर महीनेभर बाद के चक्कर में एक और…मैंने कह-कहा के अपने एक दोस्त की शादी उस से करवा दी। जब अगले चक्कर में नई लड़की खड़ी दिखी तो रहा नहीं गया। मोड़ दिया ट्रक पेट्रोल पम्प की ओर और कुचल दिए उसके मालिक और 3 नौकर। फिर एक्सिलरेटर दबा के कूद गया बाहर, ट्रक लड़ा पेट्रोल टंकी में और ब्लास्ट हो गया।”

एक पत्रकार ने पूछा, “यह सही रास्ता नहीं है….तुम्हारे पागलपन में 2 निर्दोष लोग मारे गए और कुछ घायल हुए उनका क्या?”

कमलू मुस्कुराकर बोला – “उनका कुछ नहीं….जैसे रोज़ सबके सामने बिकती इन लड़कियों का कुछ नहीं। सही रास्ते पर चलकर देख लिया बाबू! कहीं नहीं जाता, बस गोल-गोल घुमाते हो तुम लोग और आदमी थक-हार कर लड़ाई छोड़ देता है।”

वह पत्रकार साथी पत्रकारों के सामने अपनी इतनी आसान चेक-मेट कैसे मान लेता, “अब इन लड़कियों का क्या होगा? इतनी ही फ़िक्र थी इनकी तो यह काम करने से पहले इनका तो सोचा होता।”

कमलू – “बाकी 15-16 की हैं पर इनमे एक 19 साल की है, उसको थोड़ा सिखाया है और लाइसेंस दिलवा दिए हैं। अभी छोटे रुट पर ट्रक चलाएगी बाकियों को बैठाकर।”

पत्रकार – “लाइसेंस दिलवा दिए हैं मतलब ट्रक के अलावा और क्या चलाएगी?”

कमलू – “ज़रुरत पड़ने पर बंदूक भी चलाएगी….”

समाप्त!

#मोहित_शर्मा_ज़हन #mohit_trendster

Advertisements

किन्नर माँ (कहानी)

13690846_1321315047897326_451597496295474496_n

बिल्लो के घर के बाहर उसके साथी किन्नरों का समूह जमा था। बिल्लो के बाहर निकलते ही सबने उसे घेर लिया, भावुक सरोज दल का नेतृत्व कर रहा था।

सरोज – “तू रूमी को क्यों पढ़ा रही है? तुझे उसकी माँ बनने का शौक चढ़ा है?”

बिल्लो – “रूमी बहुत होशियार है। ग्रैजुएशन कर लिया है, अभी पुलिस अफसर का एग्जाम निकाल देगी देखना!”

सरोज – “नशा किया है तूने? शादी का सीजन है, काम पे लगा इसको!”

बिल्लो – “क्यों तुझे चिढ मच रही है कि उसको नाचने-गाने के अलावा कुछ करने को मिल रहा है?”

सरोज रुँधे गले से बोला – “तुझे पता है रूमी फिजिकल टेस्ट में औरत नहीं निकलेगी…सबका बराबर हक़ बस कहने की बात है, हम जैसों को देखते ही निकाल देते हैं कोई न कोई बहाना बनाकर।”

बिल्लो – “तुझे पता है मैं साड़ी की जगह सलवार सूट क्यों पहनने लगी?”

बिल्लो ने अपना सूट ऊपर उठाया, जहाँ किडनी ऑपरेशन से बना बड़ा निशान था।

बिल्लो – “अपना पैसा लगाकर और तब भी पूरा नहीं पड़ा तो किडनी बेच कर रूमी का सेक्स चेंज ऑपरेशन करवाया है। डॉक्टर ने कहा माँ नहीं बन सकती पर मेडिकल में ये औरत ही आएगी। इसे अपने नरक से निकालने की मेरे पास यही एक तरकीब थी।”

रोता हुआ सरोज बिल्लो के गले लग गया। नम आँखें लिए पूरे दल के चेहरे पर एक सवाल था…“क्यों?”

“कभी मैं भी रूमी की तरह होशियार थी। मदद के लिए बहुत भागी, गिड़गिड़ाई पर किसी ने मेरे ‘हिजड़े’ की पहचान से आगे कुछ जानना ही नहीं चाहा।”

समाप्त!

=========

– मोहित शर्मा ज़हन

राष्ट्र-प्रकृति (कहानी) #mohit_trendster

13139313_10206692561252143_2704873297328074524_n

दुनिया के सबसे शक्तिशाली देशों में से एक सीन की राजधानी चीबिंग में 5 दिवसीय विश्व सम्मलेन होने वाला था जिसमे लाखों की संख्या में लोग आने की सम्भावना थी। लगभग उसी समय चीबिंग और आस-पास के क्षेत्रों में लगातार कुछ दिन भारी बारिश होने के आसार बन रहे थे। सीन के तानाशाह राष्ट्रपति ने वैज्ञानिकों से एक मौसमी प्रयोग करने को कहा जिस से इन 5 दिनों के सम्मलेन में मौसम का कोई व्यवधान ना पड़े। बड़े कार्गो हवाई जहाज़ों की मदद से लगातार हवा की ऊपरी परतों में रसायन छोड़े गए और तरह-तरह के वैज्ञानिक चोचले हुए। आखिरकार दबाव का क्षेत्र बदला और बादल-बरखा चीबिंग से छितर गए।

सम्मेलन अच्छी तरह निपटा और अहम मौके पर मौसम को मात देने की ख़ुशी में राष्ट्रपति छुट्टी मनाने देश के तटीय छोर पर आ गए। दबाव के क्षेत्र में बदलाव से देश का वातावरण उलट-पुलट हो गया। विश्व सम्मलेन में मौसम से की गयी छेड़छाड के कारण अचानक एक ऐसा तूफ़ान तेज़ी से सीन के तटीय क्षेत्रों की तरफ खिंचा चला आया जो सामान्य स्थिति में समुद्र तक सीमित रहता। ग्लाइडर पर प्रकृति का आनंद ले रहे राष्ट्रपति का प्रकृति ने आनंद ले लिया और उन्हें एक क्षतिग्रस्त न्यूक्लियर संयंत्र के कोर में ला पटका। सीन में भारी जान-माल का नुक्सान हुआ और बचाव कर्मियों ने विकिरण स्नान किये राष्ट्रपति को कोमा की हालत में पाया।

समाप्त!

– मोहित शर्मा ज़हन

एकल-युगल-पागल (कहानी) – मोहित शर्मा ज़हन

3429

“जी सर! मैंने चक्कू घोंप दिया ससुरे की टांगों में अब आपका जीतना पक्का।”

टेनिस एकल प्रतिस्पर्धा में स्टीव जो एक जाना-पहचाना नाम था, जिसके नाम कुछ टाइटल थे। हालांकि, पिछले कुछ वर्षों के दौरान वह सफलता से दूर ही रहा। फिटनेस के हिसाब से उसमे 2-3 सीजन का खेल बचा था और इस बीच वह अधिक से अधिक टाइटल अर्जित करना चाहता था। सबसे पहले वह तुलनात्मक रूप से आसान और नीची रैंक के खिलाड़ियों से भरे टूर्नामेंट चुनता था ताकि उसके जीतने की सम्भावना बढ़े, किस्मत से वह एक नामी टूर्नामेंट के सेमीफाइनल में पहुंचा जहां उसका प्रतिद्वंदी दुनिया का नंबर एक खिलाड़ी था। इस खिलाड़ी से पार पाना स्टीव के बस की बात नहीं थी। स्टीव ने उस खिलाड़ी को घायल करवाने के लिए अपने एक जुनूनी देशवासी को ब्रेनवाश किया कि देश के नाम और सम्मान के लिए उसे वर्ल्ड नंबर वन को खिलाड़ी घायल करना है। पूरी रात पार्टी कर अगले दिन वॉकओवर मिलना सुनिश्चित मान स्टीव कोर्ट पर उतरा जहाँ फिट्टम-फिट दुनिया का नंबर एक खिलाड़ी उसका इंतज़ार कर रहा था। उसके पैरो तले ज़मीन और खोपड़े छज्जे आसमान खिसक गए। काश कल न्यूज़ में कन्फर्म कर लेता तो दारु तो ना पीता, अब तो 6-0, 6-0 पक्का! पता नहीं किस बेचारे के पैरों में चक्कू घोंप दिया गधे ने?

बगल के कोर्ट में इस प्रतियोगिता का युगल (डबल्स) टेनिस खेल रही एक टीम को वॉकओवर मिला क्योंकि उनकी विरोधी टीम के एक खिलाड़ी पर पिछली रात टांगलेवा हमला हुआ था, यह खिलाड़ी विश्व डबल्स टेनिस में नंबर एक रैंक पर था।

इस कहानी से शिक्षा मिलती है जुनूनी के साथ-साथ थोड़ी अक्ल वाले बंदे-बंदियों से ऐसे काम करवाने चाहिए।

समाप्त!

जीवन दण्ड (कहानी) – Mohit Trendster

large

ढेरी नामक तटीय क्षेत्र के जंगल में मानव सभ्यता से दूर टोमस जंगली प्रजाति रहती थी। अब तक दुनिया में ऐसी गिनी-चुनी प्रजातियां रह गयीं थी जिनका मानव सभ्यता से कोई संपर्क नहीं हुआ हो। किसी भी संपर्क की कोशिश पर टोमस जंगली बेहद आक्रामक हो जाते और इनकी सुरक्षा के लिए सरकार या सेना को पीछे हटना पड़ता। समय के साथ प्रगति करते देश में विदेशी निवेशकों और उद्योगपतियों का प्रभाव बढ़ने लगा। कुछ वर्षों बाद एक प्रभावशाली उद्योगपति की नज़र उस जंगल और तटीय क्षेत्र पर पड़ी। वहाँ मिलने वाले कुछ खनिजों का उत्खनन उसकी संपत्ति कई गुना बढ़ा सकता था पर उसके रास्ते में थी टोमस प्रजाति। समय के साथ सरकार का रुख बदला और उद्योगपति ने छद्म रूप से टोमस जंगलियों को खत्म करवाना शुरू किया। साम-दाम-दण्ड-भेद के बल पर 1-2 वर्षों में टोमस प्रजाति के सौइयों लोगो को मारा गया और बाकी बचे जंगलियों ने अपनी सुरक्षा के लिए आस-पास के क्षेत्रों में प्रवास कर लिया।

अपनी सफलता पर इतराता वह कॉर्पोरेट माफिया उस क्षेत्र में बहुत सा निवेश ले आया और जंगल के बड़े हिस्से की कटाई के साथ खनन कार्य शुरू किया। गाहे-बगाहे उसे, उसकी टीम या मज़दूरों को वो जंगली दिख जाते तो जंगली घूरते हुए कुछ मंत्र पढ़ देते। ये लोग ऐसे जंगलियों को हँसी में टाल जाते। कुछ महीनों बाद 8 रिक्टर स्केल का भूकंप और सुनामी आई जिस से खनन के लिए हुआ सारा इंतेज़ाम तहस-नहस हो गया और उत्खनन कार्य मे लगे कई लोग मारे गए। बड़े भौगोलिक परिवर्तन में उस तटीय क्षेत्र और जंगल का एक बड़ा हिस्सा जलमग्न हो गया और साथ ही उस उद्योगपति का सारा निवेश डूब कर उसे कंगाल बना गया। कर्जदारों से बचने के लिए उसने आत्महत्या करने की ठान ली पर अपने हाथों से अपनी जान लेने की उसकी हिम्मत नहीं हुई। अपराधबोध-ग्लानि से भरे उस व्यक्ति ने प्रजाति के प्रमुख के सामने समर्पण कर दिया कि वो तो उसे मार ही देगा। प्रमुख ने उसे ज़िंदा छोड़ दिया और अब वह कॉर्पोरेट किंग अपने अपराधों के बोझ ढोता जंगलों में भटकता है…शायद मरने के बाद भी भटकेगा।

समाप्त!

लोड शैडिंग (कहानी) – मोहित शर्मा ज़हन

gr

यमराज के सामने एक छोटे द्वीप समूह देश का बड़ा अर्थशास्त्री (इकोनॉमिस्ट) बंदी बना खड़ा था। उसपर (उस व्यक्ति के भूत पर) 700 लोगो को डराकर मारने का आरोप था, जो उसने तुरंत मान भी लिया था। उसने बताया कि मरने के बाद उसकी अतृप्त आत्मा देश की अर्थव्यवस्था की बिगड़ी हालत से परेशान थी। दुनिया से जाते-जाते उसने सोचा कि देश के लिए कुछ कर के जाना चाहिए। तब उसने कई परम्यूटेशन-कॉम्बिनेशन पर विचार किया और एक तरीका सोचा जो उसके हिसाब से देश की अर्थव्यवस्था से भार कम कर सकता था।

मॉर्निंग या इवनिंग वॉक को जाने वाले बुज़ुर्ग लोगो को वह अपना मुँह बिगाड़कर और मुंडी, खून की कटोरी जैसे प्रॉप्स के साथ डरावना धप्पा करता था। यह भूतहा धप्पा इतना डरावना होता था कि ज़्यादातर बुड्ढे-बुड्ढीयां हार्ट अटैक से मर जाते। 2 दिन के अंदर उसने देश के 700 वरिष्ठ नागरिकों को चलता किया। यह असामान्य गतिविधि ऊपर देवलोक में देखी गई और उसे तुरंत बंदी बना लिया गया।

यमदूत ने अर्थशास्त्री को समझाया – “आइडिया कागज़ पर अच्छा है पर जीवनचक्र में कई बातों का ध्यान रखना चाहिए। इन 700 लोगो में 246 लोगो ने देर से शादी की थी जिस कारण इनमे से कई की कई ज़िम्मेदारियाँ अभी पूरी नहीं हुई थी। इनमे कई लोग सेवानिवृत होने के बाद भी देश के लिए लाभ वाले काम कर रहे थे। तो इतना आसान नहीं है कि बुड्ढे उड़ा दो और देश का भार कम। बूढ़ा व्यक्ति समाज का बोझ नहीं ज़रूरत है। अब तुम्हारी सज़ा यह है कि इन 700 बुड्ढे-बुड्ढीयों की लिखा-पढ़ी तुम ही करोगे। नासपिटे! किसने दी तुम्हे डॉक्टरेट की उपाधि? जूत ही जूत बजा दें उसके!”

समाप्त!

बाहरी परत (कहानी) – मोहित शर्मा ज़हन

1267213_G08_W01

ओलम्पिक 800 मीटर दौड़ क्वालीफाइंग राउंड में रमन ने गिर कर भी रस पूरी की और क्वालीफाई किया। हालांकि, गिरने के दौरान रमन की कुछ पसलियां टूट गईं, और अंदरूनी चोटें लगी। अन्य राउंड के दौरान यह अपडेट दुनियाभर में दर्शकों को मिली। उन्हें यह भी बताया गया कि रमन ने फाइनल राउंड में दौड़ने का फैसला लिया है। इस हालत में और दौड़ने का मतलब था नुकसान को बढ़ाना। अपने घर पर ओलम्पिक खेलों का सीधा प्रसारण देख रहा आलोक बोला – “सरफिरा है यह इंसान! दौड़ के लिए जान दांव पर लगा रहा है।”

फाइनल में रमन ने दर्द से लड़ते हुए रजत पदक जीता। फिर साक्षात्कार के एक सवाल में जैसे उसने घर बैठे आलोक को उत्तर दिया।

“मेरी उम्र 29 साल है, 4 साल रुकने का कोई औचित्य नहीं था क्योंकि 33 वर्ष का एथलीट अब ओलम्पिक की इस श्रेणी में नहीं दिखता। पिछले 22 वर्षों से मैं इस मंच पर आने के लिए कड़ी मेहनत कर रहा हूँ। रोज़ सुबह 4 बजे से रात 10 बजे तक मेरी ट्रैनिंग, खान-पान, विचार सब ओलम्पिक मेडल की तरफ केंद्रित रहे। यहाँ आने के लिए मैंने दोस्तो के कई प्लान मिस किए हैं, मेरे जीवन में कॉलेज-प्यार जैसे पड़ाव मैंने स्किप कर डाले, परिवार के साथ तसल्ली से बैठकर बातें करना-समय बिताना छोड़ा है….सपनो की चुभन से रोज़ चैन की नींद छोड़ी है। अब यहाँ तक आकर कैसे लौट जाता? मैंने आगे के जीवन में चैन की नींद चुनी, मैंने अपने घरवालों, मित्रों और चाहने वालो से आँखें मिलाना चुना।”

आलोक को समझ आया कि अक्सर बातों और लोगो की दिखाई दे रही बाहरी परत के अलावा भी दुनिया होती है।

समाप्त!

===============

#mohitness #mohit_trendster #trendybaba #freelance_talents #freelancetalents

स्वर बंधन (लघुकथा) – मोहित शर्मा ज़हन

097-500x281

आलीशान बंगले में एक अंधी महिला ने प्रवेश किया। स्टाफ मे नई सेविका ने उत्सुकतावश हेड से पूछा।

“ये कौन है?”

स्टाफ हेड – “मैडम के बच्चे चीकू की देखभाल के लिए…”

सेविका – “पर ये तो देख नहीं सकती? क्या मैडम या साहब को दया आ गई इस बेचारी पर और कहने भर को काम दे दिया?”

स्टाफ हेड – “तुझे साहब लोग धर्मशाला वाले लगते हैं? उनकी मजबूरी है इसलिए चला रहे हैं। ये औरत पहले से ही बच्चे की देखभाल करती थी, एक दुर्घटना में इसकी आँखें चली गईं, पर अब भी नन्हा चीकू इसकी लोरी, कहानियां सुने बिना नहीं सोता है। जब चीकू थोड़ा बड़ा होगा इस बेचारी का यहाँ आना बंद हो जाएगा।”

समाप्त!

#mohitness #mohit_trendster #trendybaba #freelance_talents #freelancetalents

कला की डोर (लघुकथा) – मोहित शर्मा ज़हन

12279058_1520317528285601_6039908102744049501_n

रोज़ की तरह मंदिर के पास से घंटो भजन गा कर उठ रहे बुज़ुर्ग को पंडित जी ने रोका।

पंडित जी – “बाबा मैंने सुना आपकी पेंशन आपका नकारा लड़का और बहु खा रहे हैं। आप घर से सटे टीन शेड में सोते हो?”

बाबा – “हाँ, शायद अपने ही कर्म होंगे पहले के जो सामने आ रहे हैं।”

पंडित जी – “तो पड़ोसी-पुलिस-रिश्तेदार किसी से बात करो। ठीक से खाना भी नहीं देते वो लोग आपको…यहाँ छोटी सी जगह गाने आते रहोगे तो मर जाओगे किसी दिन।”

बाबा – “पंडित जी, ऐसी हालत में मर तो बहुत पहले जाना चाहिए था पर कलाकार जो ठहरा, कला की डोर पकड़े जीवन चला रहा हूँ…खाने का तो पता नहीं पर यहाँ न आया तब मर जाऊंगा।”

समाप्त!

Art – Jorgina Sweeney

=============

Author Note – कुछ रचनात्मक लोगो को सामान्य दृष्टि से अलग कामो से संतुष्टि मिलती है। ऐसे काम जो सामान्य लोगो द्वारा धन-सम्पत्ति-यश जुटाने की तरफ बढ़े कदमों से परे एक अलग दुनिया में काल्पनिक महल करने से प्रतीत होते हैं। दूर से उनको देखकर हँसी आती है पर अगर गलती से आप उनकी दुनिया में भटक जाएं तो आपको एक ऐसा शिल्पकार दिखेगा जो हर दिन-हर घंटे-हर मिनट अपनी कला में तल्लीन रहता है। सामान्य दुनिया में आने पर उसमे एक शून्यता, अनुपस्थिति सी दिखाई देती है यह उसकी कल्पना के बंधन होते हैं जो उसे बेचैन रखते हैं। तभी अक्सर ऐसे लोग आम दुनिया में पिछड़ जाते हैं और फिर भी कई आगे बढ़े लोगो से सुखी दिखाई पड़ते हैं।

2 अंत (लघुकथा) – मोहित शर्मा ज़हन

f7adbc69b8c7fe66b10068cabf423bd7

एक निजी कंपनी के 2 सहकर्मी दोपहर का भोजन साथ कर रहे थे।

अनिरुद्ध – “मुझे पता चला कि आप हवाई यात्रा नहीं करते। अफवाह है या विमान में बैठने से डर लगता है?”

रोनित – “सही सुना है आपने। हवाई यात्रा से डर नहीं लगता, पहले कई बार बैठ चुका हूँ।”

अनिरुद्ध – “अरे…आपको कंपनी के काम से देश में कहाँ-कहाँ जाना पड़ता है। ऐसे तो बहुत समय बर्बाद होता होगा…आखिर विमान यात्रा से बचने का क्या कारण है?”

रोनित – “हमारे घर के एक पुराने पंडित जी हैं, आज तक उनकी बताई हर बात सच हुई है। उन्होंने बताया कि मेरी मृत्यु एक विमान दुर्घटना में होगी तो मैंने सोचा जब तक सिर पे कोई आपात स्थिति न पड़े तब तक तो विमान यात्रा से बचने का प्रयास करूं।”

अनिरुद्ध – “हम्म…जैसा आप अपने पंडित जी के बारे में बता रहे हैं फिर तो इतनी सावधानी सही है।”

उसी रात रोनित को अनिरुद्ध का फोन आया।

अनिरुद्ध – “माफ कीजिए अब कॉल कर रहा हूँ, रोनित जी। एक विचार मन में आया सोचा आपसे साझा करूं। यह भी तो हो सकता है कि विमान दुर्घटना में विमान जिस जगह पर क्रैश हो वहाँ आप मौजूद हों।”

अंत 1) – रोनित को उस रात के बाद से कभी चैन की नींद नहीं आई।

================

अंत 2) – अनिरुद्ध की बात सुनकर रोनित कुछ बोल पाता उस से पहले ही कॉल कट गई और कुछ देर बाद ही अनिरुद्ध को पता चला कि रोनित के घर पर एक यात्री विमान गिरा है जिसमे सभी यात्रियों समेत रोनित की मृत्यु हो गई है।

समाप्त!

#mohitness #mohit_trendster #freelancetalents #freelance_talents #trendybaba

« Older entries