“डगमगाहट के लिए खेद है!” (कहानी) #mohit_trendster

12241778_1520298031620884_6830006920093972549_n

वैसे तो जय अकेले काम करने में विश्वास करता था पर चाय की गुमटी से पर उसे एक नया बंदा मिला था साथ काम करने के लिए। शैंकी नामक उस किशोर में जय को अपना 5-7 साल पहले वाला रूप दिखता था जब उसने चोरी-चकारी शुरू की थी। इन वर्षो में अपनी लगन और जीतोड़-शरीर फोड़ मेहनत के चलते उसने काफी जल्दी ठगी के कई पैंतरे सीख लिए थे। अब वो कुछ बड़ा करना चाहता था ताकि जीवन में लंबे समय के लिए आर्थिक स्थिरता आ जाए। शैंकी के रूप में उसे एक लगनशील, गुणवान छात्र मिला था जो उसकी ही तत्परता से सब कुछ सीख रहा था। कुछ महीनों के लिटमस प्रयोगों के बाद आखिरकार बड़े जोखिम की घड़ी आयी। कस्बे के सबसे धनी सुनार-लाला रूपचंद के घर डकैती डालने का जय का बचपन का सपना आज पूरा होने जा रहा था। करोड़ों की बाज़ी थी और शैंकी के साथ जय ने हफ्तों इसकी ड्रिल की थी। संयुक्त परिवार वाले लाला रूपचंद के घर में आज एक गार्ड के अलावा 2 ही लोग थे, लाला और उनकी लाली।

अंधेरे का फायदा उठाकर शैंकी ने गार्ड को क्लोरोफॉर्म सुंघा कर बेहोश किया और कुछ ही सेकंड के अंदर सोते लाली-लाली को भी डिफ्यूज कर दिया। जय हक्का-बक्का रह गया।

जय – “तुझे तो लगता है ज़्यादा सीखा दिया यार…आज मुझे आना ही नहीं चाहिए था। अकेला तू ही बहुत था!”

शैंकी – “अरे नहीं भईया! आपसे ही सब सीखा है। आपको इम्प्रेस करने के लिए सब जल्दी निपटा दिया।”

फिर शैंकी और जय घर से पैसे और गहने बटोरने लगे। जय को बड़ा अजीब लग रहा था, सब इतनी आसानी से हो रहा है, कोई अड़चन-हड़बड़ी नहीं। तब उसका ध्यान लाला-लाली पर गया जो सांस नहीं ले रहे थे। उसकी हल्की चीख निकली – “अरे मर गए क्या ये दोनों?” शैंकी ने दोनों की नब्ज़ देखी, दोनों मर चुके थे। जय ने गार्ड को देखा तो उसकी आँखें भी उलट गई थीं। जय गुस्से में बोला – “पागल! इतनी जल्दी क्या थी कि मार ही दिया इन्हे? इतनी बार प्रैक्टिस कराई थी तुझे! डकैती में तो एक बार बच भी जाएं पर ट्रिपल मर्डर में तो पूरे जिले की पुलिस पीछे पड़ जाएगी। साले! डोज़ चेक नहीं की थी क्या रूमालों में लगाते समय?” जय सिर पकड़ कर बैठ गया।

सहमा हुआ शैंकी बोला – “लगता है बस एक ही रुमाल में सही डोज़ थी।”

जय – “अब क्या फायदा उल्लू के पट्ठे…तीनो मर गए”
शैंकी ने झटके से जय को रुमाल सुंघाया।

शैंकी – “फायदा है भैया! उन 3 रूमालों में मौत वाली डोज़ थी और आपके वाले चौथे रुमाल में सिर्फ बेहोशी वाली डोज़ है।”

जय की बोझिल होती आँखों के सामने शैंकी उसके पैर छूकर सारा माल लेके चंपत हो गया। कुछ देर बाद लाला के परिवार के कुछ सदस्य घर पर आए और उन्होंने पुलिस के आने तक गुस्से में जय को मार-मार कर, मार-मार कर…मार ही डाला।

समाप्त!

मोहित शर्मा ज़हन

Artwork – Jorgina Sweeney (Jorgi girl)

ज़रूरत (कहानी) – मोहित शर्मा ज़हन

13501731_10210174846354253_4578819429850548116_n

तकनीकी गड़बड़ी से एक यात्री विमान ज़मीन से हज़ारों मीटर ऊपर भीषण डीकम्प्रेशन से बिखर कर बंगाल की खाड़ी में गिर गया था। अचानक दबाव के लोप हुआ धमाका इतना भीषण था कि किसी यात्री के बचने की संभावना नहीं थी। 279 यात्रियों और विमान दल में केवल 112 व्यक्तियों की क्षत-विक्षत लाशें मलबे से चिपकी या तैरती मिली, बाकी लोगो को सागर लील गया। बैंक लिपिक रूबी के पिता शॉन इस फ्लाइट में थे। पूरे दिन के सफर के बाद जांच-बचाव केंद्र पर पहुंच कर रूबी को पता चला की एक को छोड़कर बाकी सभी शवो की उनके परिजनों द्वारा पहचान हो चुकी है। हाल ही में कैंसर पीड़ित अपनी माँ को खो चुकी रूबी ने बुझे मन से आखरी शव को देखा तो चेहरा और शरीर पहचान में न आ सकने वाली हालत में थे, पर शव के पैर पर चोट का लंबा निशान रूबी के लिए अपने मृत पिता को पहचानने के लिए काफी था। सिसकती हुई रूबी औपचारिकताओं के लिए आगे बढ़ी तो उसे एक आवाज़ ने रोका।

“तुम्हे कोई गलतफहमी हो गई है बेटी! यह मेरे पति हैं।”

रूबी ने उस वृद्धा को दया से देखा और कुछ देर समझाने की कोशिश की, पर वह औरत अपनी बात पर अड़ी रही। थोड़े समय बाद रूबी के सब्र का बांध टूट गया और वह उस बूढ़ी महिला पर चिल्लाने लगी। आस-पास अन्य यात्रियों के कुछ परिजन और जांच अधिकारी आ गए। भीड़ मे कोई बोला – “अरे…ये औरत पागल हो गई है। पहले 2 लाशों को अपना पति बता रही थी फिर वहां से भगाया इसे।”

अब रूबी ने उस औरत पर ध्यान दिया, उसका हुलिया व्यवस्थित था। वह शांत थी और उसके व्यवहार में पागलपन जैसा कुछ नहीं दिख रहा था।

एक अधिकारी ने मामला सुलझाना चाहा – “देखिए अगर शव पहचान में विवाद है तो डीएनए जांच के लिए भेजे जा सकते हैं।”

रूबी – “नहीं ऑफिसर! डीएनए टेस्ट मत करवाइये, मैं अपना क्लैम वापस लेती हूँ…यह मेरे पिता नहीं हैं।”

सबकी अविश्वास भरी नज़रों और मुँह पर लेकिन के जवाब में रूबी दबी ज़ुबान में बोली “…शायद इस समय मुझे मेरे पिता से ज़्यादा इन्हे इनके पति की ज़रूरत है।”

एक बार शव को प्यार से छूकर रूबी ने नम आँखों से ही पिता का अंतिम संस्कार कर विदा ली।

समाप्त!

#mohitness #mohit_trendster #trendybaba #freelance_talents #freelancetalents

शोबाज़ी (कहानी) – मोहित शर्मा ज़हन

random-picture-2

छात्रों के पास से गुज़रती प्रोफेसर के कानो में कुलदीप की एक बात पड़ी।

“हमारे पूर्वजो ने तुम्हे बचाया। तुम लोगो के घर-बार और तुम्हारी बहु-बेटियों की इज़्ज़त लुटने से बचाने वाले हम लोग ही थे। अगर हम न होते तो क्या होता तुम्हारे समुदाय का?”

प्रोफेसर के कदम थम गए, ऐसा वाक्य उन्होंने पहली बार नहीं सुना था। वो उन लड़को के समूह के पास गईं और बोलीं।

“तो क्या अपने पूर्वजो के कामो की अलग से रॉयल्टी चाहिए?”

प्रोफेसर को उग्र देख कुलदीप सहम कर बोला – “ऐसी बात नहीं है मैम…मैं तो बस…”

प्रोफेसर – “देखो कुलदीप, जिन समुदाय-लोगो की तुम बात कर रहे हो उनकी संख्या करोड़ो में थी और इतिहास देखोगे तो हर धर्म के लोगो ने अनेको बार एक दूसरे पर एहसान और अत्याचार किए हैं। यह संभव है जिन पूर्वजो की तुम बात कर रहे हो उनके पूर्वजो या उनसे भी पहले उस मज़हब के लिए किसी और समुदाय ने कुछ अच्छे काम किए हों जिनसे उनके जीवन मे सकारात्मक बदलाव आए हों। इतिहास जानना ज़रूरी है पर पुरखों से शान उधार लेकर अपने नाम पर लगाना गलत है। खुद समाज के लिए कुछ करो फिर यह शोबाज़ी जायज़ लगेगी…हाँ, माता-पिता या दादा आदि की संपत्ति, गुडविल, रॉयल्टी अलग बात है पर 1492 में कुलदीप से ऊपर 32वी पीढ़ी ने क्या तीर मारे वो किताबो तक ही रहने दो, उनका क्रेडिट तुम मत लो…क्योंकि ऐसे हिसाब करोगे तो फिर कभी हिसाब होगा ही नहीं।”

समाप्त!

#mohitness #mohit_trendster #trendybaba #freelancetalents #freelance_talents

अन-बेवकूफ (संवाद कहानी) – मोहित शर्मा ज़हन

cultural-exchange-regina-1

Mr. A – एक बात काफी सुनता हूँ मैं….”आज का यूथ जागरूक है, बेवकूफ नहीं है!”
मतलब कल या पहले के यूथ – तुम्हारे माँ-बाप-दादे बेवकूफ थे? जितने साधन उनके पास थे उस हिसाब से बहुत सही थे। शायद गूगल-इंटरनेट के सहारे टिके “यूथ” से कहीं बेहतर…

Miss B – …लेकिन गलतियां तो हुई हैं पहले लोगो से?

Mr. A – किसी पीढ़ी का आंकलन उस समय की परिस्थितियों को संज्ञान में लिए बिना नहीं करना चाहिए। एक जार में किसी तरह की अशुद्धियां डालिए और उस जार को हिलाइए, ऐसा होने पर बड़ी मात्रा में अशुद्धियां वापस तल पर जमने में समय लेंगी, जैसे आज़ादी और विभाजन के बाद भारतीय लोगो को नई स्थिति में जमने में सालों लग गए। साथ ही उस वक़्त अकाल, सूखा और अनाज की कमी के कारण लोग जीने के लिए आवश्यक मूलभूत बातों के लिए जूझ रहे थे। इसी दौरान भारत को तीन बड़े युद्धों को झेलना पड़ा, इन सबके बीच आम लोगो को आधारभूत (रोटी-कपड़ा-सर पर छत) सीढ़ी को चढ़ने में कुछ दशक लगे, जिसके चलते लोग अन्य मुद्दों तक जा नहीं पाए। एक और महत्वपूर्ण बात यह है कि अविकसित क्षेत्र में अगर कोई शक्ति पा जाए तो उसे हटाने में समय लगता ही है, जो लोग पहले गलत बातों का विरोध करते थे उनके पास आर्थिक, सामाजिक और जन-जन तक अपनी बात ले जाने का कोई सहारा नहीं होता था। वैसी स्थिति अगर आज के दौर में होती तो मुझे नहीं लगता आज की पीढ़ी कुछ बेहतर कर पाती।

Miss B – एक बात मैं भी जोड़ना चाहती हूँ, यह सुपिरियोरीटी कॉम्प्लेक्स भावना लगभग हर पीढ़ी में होती है…तो माफ की जा सकती है। धीरे-धीरे कई सामान्य लोगों में अपने आप दूसरों और उनकी स्थिति समझने की और तुलना ना करने की अक्ल आ जाती है।

समाप्त!

#mohitness #mohit_trendster #trendybaba #freelance_talents #freelancetalents

Old Stories (Mail Drafts 2008)

आज 2 पुराने मेल ड्राफ्ट्स दिखे जिनमे ये कहानियां थी। इनसे संतुष्ट तो नहीं हूँ पूरी तरह क्योकि रिसर्च और सही प्रारूप की कमी लग रही है पर फिर भी यहाँ शेयर कर देता हूँ।

13645348_10208482299948777_8396147519582459478_n

1. मुफ्तखोर

जिला न्यायालय के बाहर एक व्यक्ति को कुछ मीडियाकर्मी घेरे खड़े थे।

पत्रकार – “जैसा हमने ब्रेक से पहले दर्शकों को बताया कि अभिनेता-कॉमेडियन हरबंस जी ने नामी कॉमेडियन सुखबीर पाल पर अपने 4 चुटकुले चुराने का केस दायर किया है। अब वो हमारे साथ हैं, हरबंस जी सभी जानना चाहते हैं हैं कि सिर्फ 4 चुटकुलों के लिए आपने सुखबीर पाल जी पर केस क्यों डाला। इतना तो आपको उन 4 चुटकुलों से मिलता नहीं जितना आप अब भाग-दौड़ में गंवा देंगे?”

हरबंस – “बात पैसों की न होकर सही-गलत की है। एक सच्चा कलाकार वर्षों तक अपनी विधा में मेहनत कर अलग स्टाइल, कंटेंट खोजता है जबकि सुखबीर पाल जैसे लोग एक ऐसे सॉफ्टवेयर (एग्रीगेटर) की तरह होते हैं जो अपना समय सिर्फ अन्य कलाकारों खासकर छोटे या स्थानीय मंच वाले कलाकारों की कला चुराकर पेश करने का काम करते हैं। केवल मैं ही नहीं उनके शोज़ में अन्य हास्य अभिनेताओं का छिटपुट काम दिख ही जाता है। हम लोग 2-4 शहरों में रोज़ी के लिए बुढ़ापे तक दौड़ते रहते हैं और इन्हे देश-दुनिया में लोग राजा बना देते हैं फिर एक दिन किसी पार्टी में हमारे किसी किस्से या पंच पर पीछे से कोई गाली देते हुए कहता है ये तो फलाने सुपरस्टार का उठा लिया मुफ्तखोर ने! पते की बात यह है कि सब पता होते हुए भी, दुकानदार से मोल-भाव में झूझते हुए, पत्नी-बच्चों को बेहतर जीवन न दे पाने पर उनसे नज़रे चुराने के बाद भी हम लोग सफलता का ऐसा रास्ता नहीं अपनाते क्योकि…दिल नहीं मानता।”

समाप्त!

=============

2. सुधार

आज के मुख्य समाचार पर 2 भाइयों की नज़र थी, “वर्षो से पीड़ित AZ वर्ग को फलाना क्षेत्र में 50% कोटा मिला, जहां पहले उनकी भागीदारी केवल 28% थी और XW वर्ग का वर्चस्व था।
भरत – “वाह! यह तो अच्छी खबर है, समान अधिकार सबका हक़ है।”सुमंत – “खबर तो अच्छी है पर कुछ चिंता का विषय भी हैं।”भरत – “आप फैसले से खुश नहीं, हम XW वर्ग से हैं कहीं इसलिए तो आप परेशान नहीं?”सुमंत – “ऐसी बात नहीं है। बात यह है कि एक क्षेत्र में 2 वर्गों के बीच अंतर कई सदियों से बना है जिसको एकदम से अगर बराबर करने की कोशिश की जाएगी तो देश पर और भावी पीढ़ियों पर बहुत दबाव पड़ेगा। दोनों वर्गों में उस काम और क्षेत्र के प्रति जो मानसिकता है उसके कारण AZ वर्ग में उस क्षेत्र से जुड़ी शैक्षिक योग्यता, अनुभव और कौशल काफी कम है। इस आदेश के बाद 50 प्रतिशत के लक्ष्य को पूरा करने के लिए ज़बरदस्ती कम योग्य लोग लिए जाएंगे जिसका असर ना केवल इस क्षेत्र पर बल्कि देश की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ेगा। साथ ही XW वर्ग के कई योग्य उम्मीदवार रह जाएंगे, क्योंकि यहाँ हज़ार-डेढ़ हज़ार लोगो की नहीं लाखों-करोड़ों लोगो की बात हो रही है।”

भरत – “तो इसका समाधान क्या होना चाहिए?”सुमंत – “28 प्रतिशत की वर्तमान भागीदारी में हर सीजन 2-3 प्रतिशत कोटा बढ़ायें ताकि उचित संख्या में भागीदारी होने तक देश पर अतिरिक्त दबाव ना पड़े। नहीं तो यहां वही हाल होगा कि गांव के नेतृत्व में महिलाओं की भागीदारी की बात चली और प्रधान ने सीट छोड़ी तो बेचारी गरीब महिलाओं को किसी ने नहीं पूछा बल्कि प्रधान की पत्नी ही गांव की नई प्रधान बन गई और खानापूर्ति के लिए सरकारी रिकॉर्ड में दिखा दिया कि यह गांव एक महिला के नेतृत्व में है। तो धीरे-धीरे पहले नींव मजबूत हो फिर आगे काम किया जाए।”

समाप्त!

– मोहित शर्मा ज़हन

#मोहितपन update

dailyhunt

*) – My ebooks and works now available on Dailyhunt, eSansar App, Website. Domuha Aakrman Comic uploaded on Comics Reel Website.

trtt

*) – Shabdnagri Newsletter Puraskrit Rachna.

अकूत संपत्ति (कहानी) – मोहित शर्मा ज़हन

11 SC badminton

2 पुराने दोस्त राजीव मेहरा और मयंक शर्मा 18-20 सालों बाद मिले थे। भाग्य के फेर से अपनी ज़िंदगियों में काफी व्यस्त और एक-दूसरे से हज़ारों किलोमीटर दूर की शुरू के कुछ सालों बाद दोनों जैसे भूल ही गए अपने जिगरी यार के हाल-चाल लेना। इतने समय में कई चीज़ें बदल गयीं थी। अब प्रौढ़ अवस्था में वो किशोरों वाली फुर्ती नहीं थी और न ही हर बात पर ठहाके-ठिठोली। हाँ, पर दोनों की आँखों में वही पहले वाली चमक थी। बातें करते-करते दोनों छत पर आ गए, किनारे चेस बोर्ड और प्यादे पड़े थे।

मयंक – “यार पहले की तरह उछला-कूदा नहीं जा सकता पर चेस तो खेल ही सकते हैं। आ बैठ चारपाई पे!”

दोनों चेस की बाज़ी के साथ जीवन की बातें करने लगे।

राजीव – “भाई बड़ा मलाल हो रहा है। एक प्रॉपर्टी मुझे 4 साल पहले 37 लाख की मिल रही थी, मैंने तब ली नहीं किसी और चक्कर मे पड़ा था। उसके आस-पास कुछ सोसाइटी अप्रूव हो गईं, हाई-वे बन गया अब कीमत 8 करोड़ है उसकी। उस समय इधर ध्यान दिया होता, नादानी न की होती तो आज तेरा भाई आराम से रिटायर होता।”

मयंक – “बुरा हुआ!…तेरी बात से याद आया मैंने भी करोड़ो-अरबों की संपत्ति गंवा दी अपने हट और नादानी की वजह से।”

राजीव – “मज़ाक मत कर यार! मैं तुझे जानता हूँ… तू ठहरा एक साधु आदमी, ये प्रॉपर्टी वगैहरह में तू कभी नहीं पड़ने वाला।”

मयंक – “सोनिया देशपाल का नाम सुना है?”

राजीव – “हाँ, वो बैडमिंटन मे वर्ल्ड नंबर वन ना? अभी ओलिम्पिक मे कोई मेडल भी जीता है बच्ची ने…”

मयंक – “हाँ, वही! अंदर 14 नेशनल मीट में मेरी 12 साल की बच्ची रूपल ने अपनी सीनियर सोनिया को फाइनल मे हराया था। पढ़ाई मे औसत थी वो और क्लास 7 बड़ी मुश्किल से पास करवाई थी हमने उसे। टूर्नामेंट के बाद उसके क्लास 8 के पेपर थे, उसका ध्यान न डिगे इसलिए नेशनल मीट के बाद मैंने और तेरी भाभी ने इसे इतना मारा और सुनाया की उसने बैडमिंटन छोड़ दिया और यही हम चाहते थे।”

राजीव – “ओह! भाई ये तो बड़ी गलती हो गई! आज शायद रूपल भी सोनिया जैसे मेडल ला रही होती, बाहर के टूर्नामेंट जीत रही होती…पर तूने तो सिर्फ छोटी निवेदिता से मिलवाया। रूपल कहाँ है?”

मयंक – “उसके कुछ दिन बाद तनाव में रूपल ने आत्महत्या कर ली…अरबों-खरबों की संपत्ति, अपनी परी को मैंने अपने पागलपन में गंवा दिया।”

समाप्त!
===========
#mohitness #mohit_trendster #trendybaba #freelancetalents #freelance_talents

प्रशंसा का अनुपात (लघुकथा) #trendster

11653_1276068545813_4780605_n

टी.वी. पर एक अभिनेता द्वारा बाढ़ त्रासदी पीड़ित लोगो के लिए ढाई करोड़ के दान की खबर चल रही थी तो वर्मा जी साथ बैठे अपने मित्र श्रीवास्तव साहब से तुनक कर बोले।

“अरे 2-ढाई अरब की संपत्ति बना ली है इसने, उसमे से ये चिल्लर दान कर दी तो क्या बड़ा काम कर दिया? ये न्यूज़ वाले भी ना…हुंह!”

श्रीवास्तव साहब का मत दूसरा था – “वर्मा जी, बात तो आपकी सही है पर यह बात हमपर तब शोभा देती है जब हम लोग अपनी लगभग दो करोड़ की संपत्ति में से ऐसी त्रासदियों में इस अभिनेता की तरह प्रॉपर्टी के अनुपात की ‘चिल्लर’ यानी 2-3 लाख रुपये दान में दें तो…”

वर्मा जी झेंप गए – “अब आप भी ऐसी बातें करोगे? कहाँ हम मध्यम वर्गीय परिवार और कहाँ वो सुपरस्टार…”

समाप्त!

– मोहित शर्मा ज़हन

==============
#mohitness #mohit_trendster #trendybaba #freelancetalents #freelance_talents

दिल की मजबूरी (प्रॉम्प्ट लेखन)

312d4d4a52fab6e9f8d83307b423b4d8

Prompt – “Use CSR (Corporate Social Responsibility) in a different way…”

सरीन पिछले दशक में देश के सबसे लोकप्रिय पॉपस्टार में से एक बन गया था। उसकी एक आदत प्रायोजकों और साथ की एजेंसी को खल रही थी। आखिरकार उस आदत के लिए एजेंसी हेड सरीन से मिलने आए।

“सरीन तुम्हारा एक-एक सेकंड हमारे लिए कीमती है और जब हम देश-दुनिया के बड़े शहरों में शोज़ कर सकते हैं तो हर साल 2-3 महीने इन पहाड़ी कस्बों में छोटे-मोटे कंसर्ट करने का क्या फायदा?”

सरीन – “लेकिन यह बात तो मैंने अपने कॉन्ट्रैक्ट में रखी थी…”

एजेंसी हेड ने बात काटी – “हाँ पर तब चीज़ें अलग थी। अब इतना पैसा लगा है स्पोंसर्स का तुम पर… समझ यार!”

सरीन – “सिंह साब, जब मैं कुछ नहीं था तब इन कस्बों ने मुझे पाला, तराशा। यहाँ लोगो के पास कुछ खास नहीं है पर मेरे टैलेंट के बदले जैसे सबने मुझे गोद ले रखा था। ये 2-3 महीने जाने कहाँ-कहाँ से लोग आकर रुकते हैं यहाँ, मेरे बहाने इन कस्बों के लोग पैसे कमा लेते हैं। अगर यहाँ आना छोड़ दूंगा तो शायद म्यूजिक में वो बात न रहे। सिर्फ पैसों या हालात की मजबूरी में ही काम नहीं करना चाहिए….कुछ कामो को दिल की मजबूरी बना लेना चाहिए। न जमे तो अपने लिए आप कॉर्पोरेट सोशल रेस्पोंसिबिलिटी समझ लो इसे….”

समाप्त

#mohitness #mohit_trendster #trendybaba #freelancetalents #freelance_talents

भूतनी बीवी (कहानी) – मोहित शर्मा ज़हन

beautiful-ghost

गर्मी और उमस से परेशान क्षितिज छत पर टहल रहा था तभी एक आवाज़ से वह ठिठका, जैसे किसी ने उसका नाम लिया हो। मन का वहम मान कर वह मुड़ा तो “हू!” उसकी पत्नी राधिका हँस रही थी। क्षितिज की घिग्घी बंध गई, राधिका को मरे 4 महीने हो गए थे। डर के मारे क्षितिज की लो फ्रीक्वेंसी चीख निकली जो इंसान तो नहीं पर शायद चमगादड़ सुन सकते थे। हँसते-हँसते पागल राधिका की आत्मा इस मोमेंट को भी एन्जॉय कर रही थी। फिर उसने क्षितिज को समझाया।

“डरो मत तुमसे मिलने आई हूँ बस, कुछ नहीं करुँगी।” क्षितिज ने खुद को सम्भाला, आत्मा होते हुए भी राधिका के चेहरे की वजह से डर की जगह उसके मन में पुरानी यादें चलने लगी।

क्षितिज – “क्या करती हो यार? अभी यहीं पजामे में ही सू-सू कर देता मैं! मुझे लगा तुम्हारा अकेले मन नहीं लग रहा तो मुझे मारने आई होगी।”

राधिका – “हा हा हा….तुम्हारा चेहरा देख कर इतनी हँसी आई कि मन तो था थोड़ा कायदे से डराऊं तुम्हे। फिर सोचा कहीं फ्री फण्ड में हार्ट अटैक न आ जाए।”

क्षितिज बोला – “…और यह बताओ तुम्हे हू करने की क्या ज़रुरत है तुम तो पहले से ही…“

कुछ देर ख़ामोशी में दोनों एक-दूसरे को देखते रहे जैसे आँखों को भी बातें करने का मौका दे रहें हों, फिर राधिका बोली। “बस तुम्हे देखने आई थी, दूर से देखकर जा रही थी पर मन नहीं माना। बस एक चीज़ देखने की इच्छा है, नहीं तो मेरी आत्मा को शांति नहीं मिलेगी।”

क्षितिज आतुर होकर बोला – “क्या? जो बोलो वो लाकर दूँ, क्या करूँ?”

राधिका – “वो जो शॉर्ट्स में तुम चिकनी चमेली और बेबी डॉल में सोने की मैशअप पर डांस करते थे प्लीज वो दिखा दो….प्लीज प्लीज प्लीज!”

क्षितिज – “सत्यानाश जाए तेरा करमजली चुड़ैल! हे भगवान….किसी को भेजो इसको ऊपर लाने के लिए।”

फिर क्षितिज ने शॉर्ट्स में इन आइटम सांग्स पर अपने अंदाज़ मे डांस किया और राधिका के ठहाके गूंजने लगे। जब गाने ख़त्म हुए तब नम हुयी आँखों को क्षितिज ने पोंछा पर अब राधिका वहां नहीं थी।

समाप्त!
====================

#mohitness #mohit_trendster #trendybaba #freelancetalents #freelance_talents

« Older entries