Result – Freelance Talents Championship 2015-16

Freelance Talents Championship 2015-16
Final Team Standings
 
CHAMPIONS
Team # 20 (Behnam Balali & Karan Virk) – 442/600 (73.67%) 
 
2) – Team # 12 (Frank Heiner & Mark Trump) – 440/600 (73.33%)
 
3) – Team # 10 (Eric Vasquez & Joseph Andrews) – 431/600 (71.83%)
 
4) – Team # 14 (Ajitesh Bohra & Siddhant Shekhar) –  424/600 (70.67 %) 
 
5) – Team # 01 (Giorgio Baroni & Dharmesh Talwar) – 415/600 (69.17%)
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6) – Team # 24 (Kapil Chandak & Soumendra Majumder) – 410/600 (68.33%)
7) – Team # 23 (Vibhuti Dabral & Manan Sharma) – 409/600 (68.17%)
8) – Team # 02 (Amit Kumar & Avijit Misra) – 391/600 (65.16%)
9) – Team # 07 (Tadam Gyadu & Ranjana Sharma) – 390/600 (65%)
10) – Team # 06 (Manabendra Majumder and Rahul Ranjan) – 385/600 (64.17%)*
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11) – Team # 27 (Deepjoy & Rishav Adarsh) – 385/600 (64.17%)*
12) – Team # 19 (Dheeraj Kumar & Anurag Singh) – 383/600 (63.83%)
13) – Team # 16 (Akash Kumar & Ayush Jha) – 349/600 (58.17%)
14) – Team # 15 (Amit Albert & Rishi Sri) – 348/600 (58%)
15) – Team # 25 (Navneet Singh & Vaibhav Singh) – 335/600 (55.83%)
16) – Team # 26 (Abhilash Panda & Ashutosh S. Rajput) –  323/600 (53.84%)
17) – Team # 13 (Harendra Saini & Ankur Singh) – 321/600 (53.50%)
18) – Team # 05 (Dominik Gutzeit & Kuldeep Gupta) – 299/600 (49.83%)
19) – Team # 03 (Handika Taurus & Vyom Dayal) – 275/600 (45.83%)
20) – Team # 17 (Jorge N. & Ren Taylor) – 243/600 (40.5%)
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Participatory / Forfeit Teams
21) – Team # 22 – (Piyush & Neel) (122 Points)**
22) – Team # 11 – (Yohan & Jen) (55 Points)**
23) – Team # 18 – (Andrey & Jenny) (53 Points)**
24) – Team # 09 – (Rory & Evans) (45 Points)**
25) – Team # 04 – (Jan & Moinac) (40 Points)**
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Team 8) – Ana Rocio Jimenez Zepeda – Amend Aeson
Team 21) – Anand Singh – Yogesh Amana Yogi
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I would like to thank all the artists, authors and judges (Pankaj V., Mayank Sharma) for their efforts in this event! 🙂 

Prizes, Trophies will be dispatched soon!

Best Ranked Indian Artist Mr. Ajitesh Bohra wins a free website.
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*In case of tie team ahead in 2 out of 3 rounds gets higher overall ranking.
** Participatory teams forfeit after 1 or 2 Rounds
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50 वर्ष की अनिद्रा (कहानी) – मोहित शर्मा (ज़हन)

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कुश्ती में विश्वविख्यात पहलवान शिव मोंगा बढ़ती उम्र की वजह से संन्यास ले रहे थे। उन्हें विश्व कुश्ती परिषद एवम अन्य स्थानीय, अंतर्राष्ट्रीय फेडरेशन्स सम्मानित कर रहीं थी। पत्रकारों, प्रशंषको से सवालों की बौछार हो रही थी। करियर के हर पड़ाव को याद कर शिव किस्से सुना रहे थे।

जब सवाल पूछा गया कि उनके लिए सबसे कठिन चुनौती कौन पहलवान था। तो उनके जवाब से पहले कई मशहूर पहलवानो के नाम जनता में से आने लगे जिनके साथ वर्षो तक शिव की तगड़ी प्रतिद्वंदिता चली।

“ऐसे एक नहीं दो पहलवान थे, पर जो आपने अंदाज़ा लगाया रेसलिंग में ना सर्बिया का चैंपियन ना मेक्सिको का दैत्य मेरे लिए सबसे बड़ी चुनौती था। गांव में निर्मल भूरा नाम के पहलवान ने मुझे खूब पटखनी दी। उन कुछ महीनो में अक्सर निर्मल से हार कर मैं इतना हतोत्साहित हो गया था कि कुछ और काम करने की सोचने लगा था, पर ऐसा होने से पहले गरीबी में वह पहलवानी छोड़ पटवारी बन गया और मैं घर के सहयोग से आगे बढ़ता चला गया। मैं चाहता तो उस वक़्त पैसो की मदद से उसको पहलवानी जारी रखवा सकता था पर मैंने ऐसा किया नहीं। दूसरा मेरा जुड़वाँ भाई विष्णु। वह मुझसे कुछ सेकण्ड्स छोटा था पर फूर्ति और दांवपेच में बहुत आगे। बचपन उसके साये में बीत रहा था। मैं तंग आ गया था उसे मिल रहे प्यार और इनामों से। 8-9 साल की उम्र में एक बार नहर में नहाते हुए उसे धक्का दे दिया और वह डूब कर मर गया। शायद ऊपर मेरा भाई, माँ-बाप और जनता मुझे माफ़ कर दें। ये मेरी आँखों के नीचे काले घेरे बचपन से हैं। 50 सालों से करवट बदलता रहा हूँ। कम से कम आज के बाद चैन से सोऊंगा।”

समाप्त!

Read New Story इंटरनेटी अफवाह (लघुकथा) – मोहित ट्रेंडस्टर

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इंटरनेटी अफवाह (लघुकथा) – मोहित ट्रेंडी बाबा

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प्राइम टाइम न्यूज़ का सेट, जिसपर लाइव देश का प्रख्यात पत्रकार-एंकर आनंद कुमार। 

“…और ब्रेक से पहले जैसा हम चर्चा कर रहे थे इंटरनेट की विश्वसनीयता और वहां फैले झूठ, अफवाहों की। पिछले बुलिटिन में ही हमने आपको खबर दी थी कि गुमनामी में रहने वाले प्रख्यात लेखक सोहन वर्मा की हृदयघात से मौत हो गयी है जबकि कुछ देर पहले हमारे पत्रकार ने उनसे मिलकर उनके ठीक होने की पुष्टि की है। सोशल मीडिया पर अच्छी फोर्मैटिंग और भाषा-शैली की अफवाहों से धोखे में ना पड़े।”

अपनी फैन फॉलोइंग द्वारा उसके हर अंदाज़ की तारीफ से जन्मी आत्म मुग्धता में आनंद ने प्रोटोकॉल से बाहर आकर चुटकी ली।

“यह देखिये अभी तक हमारे स्टूडियो का टेली प्रॉम्पटर सोहन जी की मृत्यु का समाचार दिखा रहा है। हा हा हा… लगता है आज टीम ने चाय-कॉफी नहीं ली।”

सामने गुस्से में प्रोडूसर से भी प्रोटोकॉल टूट गयी और वो चिल्ला कर बोला।

“अबे! इस बार वो सच में मर गए हैं।”

समाप्त!

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Mrig Marichika #update

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मृग मरीचिका के ख़ास छमाई दोहरे अंक में मेरी रचना “आज फिर उस दर से लौटना हुआ”, टून को जगह मिली। संपादक सुरेन्द्र जी का बहुत आभार!

#Bageshwari Magazine (Mar-Apr 2016)

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New article in Bageshwari Magazine (March-April 2016 Issue)

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Firozi Ananas #mohit_trenster

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वैज्ञानिक नोमन आज कुछ पगलाया सा था। ख़ुशी में हल्काहट, बीच-बीच में उसकी चाल से अपने आप नाच तक निकल रहा था। कई हफ़्तों की मेहनत के बाद उसने एक उल्कापिंड के टुकड़ो के गिरने के स्थान को चिंहित करने के साथ एक अनूठी खोज की थी। उल्कापिंड के टुकड़े जिस घने जंगली, सुनसान स्थान पर गिरे थे वहां बहुत से अनानास के पेड़ थे। उल्कापिंड में मौजूद तत्वों के प्रभाव से अनानास के पेड़ और फल विशालकाय और फिरोज़ी रंग के हो गए थे। अब नोमन दुविधा में था। अगर किसी और को या सरकार को बताया तो संभव है कि इस खोज का श्रेय, आगे का अनुसंधान और पैसा किसी और को मिल जाए, इसलिए इन परिवर्तित फिरोज़ी अनानास का असर वह जीवों और मानवो पर देखना चाहता था। वह कुछ जानवरों को पिंजरे में लाया पर उसकी लापरवाही से जानवर भाग गए। उसके पास समय कम था। किसी और अनुसंधानकर्ता या जांच एजेंसी के उस छोटे से स्थान तक पहुँचने से पहले ही उसे एक विस्तृत रिपोर्ट बनानी थी।

नोमन को याद आया की शहर से दूर वीरान आखरी पेट्रोल पंप पर उसे एक स्थिति-भ्रमित, भूखी-अधमरी औरत दिखी थी। वह उसे खाना खिलाने का लालच देकर अपने कारवान वाहन में उस स्थान पर ले आया। फ़ोन पर अपने पिता से जब नोमन ने बात बांटी तो उन्होंने आपत्ति जताते हुए कहा कि किसी निरीह पर ऐसे प्रयोग  करना ठीक नहीं। पर नोमन अपना मन बना चुका था। उसने अपने पिता की बात को अनसुनी कर कहा – “मानवता की तरक्की के लिए कुछ कुरबनियां तो देनी पड़ती है।”

नोमन ने उस औरत को उन फिरोज़ी अनानासों से अपनी भूख शांत करने को कहा। औरत ने ऐसा ही किया जबकि इधर नोमन अपने कैमरे, डायरी एवम अन्य उपकरणों से औरत की गतिविधियों पर नज़र रखने लगा। प्रयोग में किसी खतरे से बचने के लिए उसने अपना वाहन बंद कर लिया। बाहर वह औरत जैसे किसी रियासत की मालकिन हो गयी थी। सभी फिरोज़ी अनानासो का अकेले सत्यानाश करने की मंशा बना ली थी उसने।

कुछ अनानास खाने के बाद उस औरत की तबियत बिगड़ने लगी। जितना खाया उस से ज़्यादा उल्टी में निकाल दिया। लो बेड़ागर्क जाए नोमन का अब औरत भी फिरोज़ी हो गयी। औरत सामान्य हुयी और गाडी में बैठे नोमन की तरफ देखा। औरत चीते सी दौड़ती हुयी उस गाडी के पास आई और उसे खोलने की कोशिश करने लगी। नोमन दुखी था पर अपनी सुरक्षा के प्रति उस बख्तरबंद सी गाडी में निश्चिंत था। तभी फिरोज़ी महिला ने गाडी पर फिरोज़ी उल्टी की और गाडी की शीट का बड़ा हिस्सा पिघल गया। फिर वह अंदर घुसी और नोमन को खा गयी। बहुत बुरा हुआ!

पर जैसा नोमन ने कहा था – “मानवता की तरक्की के लिए कुछ कुरबनियां तो देनी पड़ती है।”

समाप्त!

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 Read New Story मुनीम रोबोट

मुनीम रोबोट – लेखक मोहित शर्मा (ज़हन)

आर्यन और उसके जूनियर्स की टीम ने आखिरकार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक के ऐसे उन्नत रोबोट्स बना लिए थे, जो दुर्गम से दुर्गम स्थान पर पहुँच कर कठिन कामो को करने में सक्षम थे। रोबोटिक ऐड नामक 48 रोबोट्स की पहली टुकड़ी आपातकालीन स्थितियों और प्राकृतिक आपदाओं के समय बचाव कार्यों के लिए तैयार की गयी। इन रोबोट्स की ख़ास बात यह थी कि इनमे अन्य निर्देशों के साथ-साथ इंसानो की तरह तर्कशक्ति भरी गयी थी।

बड़े देश में उनकी ज़रुरत तीसरे दिन ही पड़ गयी। पहाड़ी क्षेत्र में भूकंप के असर से हुए भूस्खलन और बाढ़ से काफी नुक्सान हुआ था और कई लोग  मदद का इंतज़ार कर रहे थे। रोबोटिक ऐड ने हज़ारो लोगो को बचाया भी पर उन्होंने कई लोगो को मरता छोड़ कुछ अन्य लोगो को बचा लिया। उनके तर्क में कुछ बड़ी खराबी थी। कुछ जगह न्यूज़ कवरेज और सीसीटीवी फुटेज पर गौर करने पर पाया गया कि रोबोट सबसे अधिक प्राथमिकता साधन संपन्न लोगो को दे रहे थे। उसके बाद मध्यम वर्गीय लोगो को बचाया जा रहा था। मदद की गुहार लगाते मरते हुए गरीब लोगो को रोबोट्स देख कर भी अनदेखा कर रहे थे।

बाद में इस घटना की जांच होने पर मिशन मे रोबोटिक ऐड के ऐसे व्यवहार का कारण टीम लीडर ने खुद बताया।

“हमने उन लोगो को बचाया जो बचाये जाने के बाद, खुद को और अपने बच्चो को अच्छे स्तर का लंबा जीवन देने में सक्षम थे या जिनमे हमें ऐसा करने की ज़्यादा उम्मीद दिखी। ऐसे  लोगो को बचा कर क्या फायदा जिन्हे घिसट-घिसट के औसतन 10-15 साल जीना है और अपनी अगली पीढ़ी को भी वैसा भविष्य देना है? बाकी लोगो को बचाने के लिए समय कम था इसलिए गरीबों को नहीं बचाया।”

यह रोबोट की अपनी सोच नहीं थी। इसमें इंसानी तर्क और पूर्वभासों की मिलावट थी, जिसमे फायदे को सही और नुक्सान को गलत माना जाता है। यहाँ फायदा हुआ या नुक्सान? रोबोट्स का तर्क अच्छा था पर भावनाओं बिना तर्क में अर्थ नहीं था।

समाप्त!

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Read New Story – फिरोज़ी अनानास

Shayari #‎ज़हन

यूँ ही फिर दिल को कोई नयी बात लुभा गई,
गिचपिच, मन की संकरी गलियों से किसी पुरानी याद को हटा गई…
जो याद हटी….जाते-जाते आखरी बार ख़्वाब में आ गई…

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दुनियाभर को बकवास जिसने बताया,
वो रुखा दार्शनिक…एक बच्चे की मुस्कान पर रिझ गया…
कितने बही खाते सिफर में उलझे रहे,
और एक तस्वीर में सारा जहाँ सिमट गया…
अब याद नहीं…बेमतलब बातों में कितना वक़्त साथ गुज़ारा,
तुमसे आँखों के मिलने का पल मेरे पास रह गया….

भूत स्वैग – लेखक मोहित शर्मा ज़हन #mohitness  

 

Holi festival 2014 Pic
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टीनएजर भूतों के एक ग्रुप के लड़के एक दूसरे पर शेखी बघार रहे थे।

भोलू भूत – “भाई एक बार मैं इंद्र देव की मूर्ति के बगल से निकल चुका हूँ।”

भक भूत – “चल बे! इतने में ही बस ..मै तो शिवजी भोलेनाथ की प्रतिमा के सामने से गया हूँ।”

पीछे से आवाज़ – “बस-बस! लिपरीडिंग की थी तब तेरी सबने! कांपते हुए शंकर जी के सामने नर्वसनेस में जय संतोषी माता निकल रहा था तेरे मुंह से। वो तो बाइचांस की बात है कि भोलेबाबा ने तुझे माफ़ कर दिया होगा।”

थोड़ा झेंपने और ध्यान बंटने के बाद फिर डिस्कशन चालू।

भोलू भूत – “यार तू भरी सुबह में क्यों निकलता है। कोई तांत्रिक पकड़ ले, कुछ उंच नीच हो जाए तो क्या इज़्ज़त रह जायेगी तेरी फैमिली की?”

भक भूत – “अबे भाई-यार भक बे! तुम डरपोक सुबह साढ़े तीन बजे निकल लेते हो, हम साढ़े 6 से पहले वापस नहीं जाते, अपनी शान में रहते है।”

पीछे से आवाज़ –  “….और तभी रोशनी से झुलस कर फ्राइड मोमोज़ हुए फिरते हो।”

भक भूत ने मण्डली के हंसने से पहले ही नया दावा किया – “मेरे सुबह घूमने की आदत की वजह से…बाय चांस मुझे देख कर एक बार एक अंकल जी को हार्ट अटैक आ गया और वो मर गए।”

पीछे से आवाज़ – “वो उन्हें पहले से ही अटैक पड़ा था, तू तो बस क्रेडिट लेने कूद पड़ा उनके सामने उनके मरने के बाद।”

भक भूत – “अरे! ये कौन है पीछे से अफवाहें फैला रहा है? अब एक हीरो शान्ति से अपने किस्से भी नहीं सुना सकता !!”

पीछे की आवाज़ का मालिक आगे आया – “मै वही अंकल जी का भूत हूँ, जिसकी नेचुरल डेथ का क्रेडिट तू अपनी दहशत के नाम चढ़ा रहा था। आजा मेरी नन्ही परी…कुछ छड़ी खा ले….तेरे अंदर का स्वैग निकालू।”

समाप्त!

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