#FTC1516 Teams

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50 creatives qualified out of thousands of artists and writers/poets…..25 artists are randomly paired with 25 authors-poets, and now we have 25 uber-talented teams competing against each other to win Freelance Talents Championship 2015-16.

1) – Giorgio Baroni – Dharmesh Talwar

2) – Amit Kumar – Avijit Misra

3) – Handika Taurus – Vyom Dayal

4) – Jan Różański – Moinac Patel

5) – Dominik Gutzeit – Kuldeep Gupta

6) – Manabendra Majumder – Rahul Ranjan

7) – Tadam Gyadu – Ranjana Sharma

8) – Ana Rocio Jimenez Zepeda – Amend Aeson

9) – Rory Jasper McGinnity – Evans Elise

10) – Eric Vasquez – Joseph Andrews

11) – Yohan Haash – Jen Steen

12) – Franz Heiner – Mark Trump

13) – Harendra Saini – Ankur Singh

14) – Ajitesh Bohra – Siddhant Shekhar

15) – Amit Albert – Rishi Sri

16) – Prince Ayush – Akash Kumar

17) – Jorge Noriega – Ren Taylor

18) – Andrey Ivanov – Jenny Dawnikins

19) – Dheeraj Dkboss Kumar – Anurag Singh

20) – Behnam Balali – Karan Virk

21) – Anand Singh – Yogesh Amana Gurjar

22) – Piyush Kumar – Neel Eeshu

23) – Vibhuti Dabral – Joe Thomas

24) – Soumendra Majumder – Kapil Chandak

25) – Yash Thakur – Vaibhav Singh

#FTC1516 #FTC201516 #FTC #Freelance_Talents #Freelancetalents

Bageshwari Magazine (Sep-Oct 2015)

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Read my latest Laghukathayen (short stories) in Bageshwari Magazine (September – October 2015 Issue). Published by Yoguru Technologies.

#mohitness #mohit_trendster #trendybaba

इंसानी गिद्ध (कहानी) – लेखक मोहित शर्मा (ज़हन)

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“क्या अम्मा, कैसे हुआ यह?” सहानुभूति भरे स्वर में इलाके के नेता ने पूछा।”

“बस भईया भगवान की मर्ज़ी थी, उन्हें अपने पास बुला लिया।” बुढ़िया ने सुबकते हुए बताया।

गाँव में एक वृद्ध की प्राकृतिक मौत के बाद यह नेता और इसके गुर्गे वैसी ही तेज़ी से वृद्धा के पास पहुंचे जैसे किसी ख़ुशी के अवसर पर जाने कहाँ से किन्नर आ जाते है। यह पहला मौका नहीं था, इस से पहले इस गाँव और आस-पास के गाँवो में अनेकों जगह नेता जी ऐसी शोक की घड़ियों का हिस्सा बने थे।

नेता ने बात बनती देख काम जल्दी निपटाने का फैसला किया। “ओये सुदामा! अम्मा जी को पैसे दे और बॉडी को रखवा गाडी में तरीके से।”

अम्मा को ढाई हज़ार रुपये पकड़ा कर सुदामा एक खरीददार के जैसे हक़ से मृत शरीर की तरफ बढ़ा।

 अम्मा संकोच से बोली – “बेटा ज़रा…”

नेता ने आदतानुसार बात काटी – “अम्मा, काका जी, मेरे भी पिता सामान थे। पूरी रीति से करेंगे उनका अंतिम संस्कार, अब कहाँ भागती फिरोगी इंतज़ाम के लिए बुढ़ापे में और यह पैसा सरकार दे रही है आपको, रख लो। यह तो आपका हक़ है।”

यह कहकर वृद्धा का आशीर्वाद लेते हुए टोली वहां से निकली।

नेता – “वाह! आज काम कितनी जल्दी हो गया, इस अम्मा की तरह बाकी सब नहीं मिलते घंटो झिक-झिक करते है। चल अब संभावली को मोड़ गाडी।”

एक जूनियर गुर्गा बोला – “नेता जी वहां लगातार पाँच किये है, किसी और गाँव चलते है।”

फिर इस टोली ने एक अलग गाँव में जगह छाँट कर मृत वृद्ध के गले में फंदा डाल के पेड़ से लटका दिया। अगले दिन तहसीलदार एवम बाकी अधिकारीयों को बताया गया कि एक और कर्ज़े में डूबे किसान ने फसल बर्बाद होने की वजह से आत्महत्या कर ली। वृद्धा के नाम पर मिले एक लाख रुपये का मुआवज़ा कुछ सरकारी अफसरों के साथ बाँट कर नेता एंड पार्टी ने बचे 50 हज़ार गटके और किसी दूर दराज़ इलाके में अगली मौत का इंतज़ार करने लगे। पर नेता अनुसार वो शरीफ था क्योकि कम से कम वो मुआवज़े के लिए लोगो के मरने का इंतज़ार तो करता था, नहीं तो कुछ जगहों पर ऐसे नेता बूढ़े, लाचार और बेसहारा लोगो की हत्या तक कर रहे थे सरकार से राहत राशि पाने के लिए।

समाप्त!

– मोहित शर्मा (ज़हन)

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ए माइनस बनाम बी प्लस (story) – मोहित #ट्रेंडस्टर

A Minus – “जब-तब लोगो को कहते सुनता हूँ कि फलाना 25 वर्षों से हमारी समिति के सदस्य है, यह वरिष्ठ सदस्या ढिमकानी बहन जी दशको से इस संस्था की सेवा करती आ रही है। इन उदाहरणों में थोड़े वेरिएशंस और जोड़ लो।”
B Plus – “हाँ तो दिक्कत क्या है, कोई वर्षो तक कहीं अपना योगदान दे तो उसका सम्मान होना चाहिए। यह तो लग रहा है तुम जलनवश कह रहे हो प्रादेशिक समिति पुरूस्कार समाहरोह में ऐसे वरिष्ठ लोगो कि धूम देख कर।”
A Minus – “जलन से नहीं अपने विश्लेषण से कह रहा हूँ। अब देखो जैसे तुम समिति से लगभग 4-5 सालों से जुड़े हो जिसमे तुम हर सप्ताह 1-2 बार समिति के कार्यक्रमों, कैंप्स और यहाँ तक कि अवकाश के दिनों में ग्रामीण टूर्स पर भी जाते हो। यानी लगभग सवा 300 सश्रम हाज़िरीयां, अब कई “वरिष्ठ” सदस्य ऐसे होते है जो खानापूर्ति के लिए समिति के वार्षिक समारोह और इक्का-दुक्का ख़ास मौकों पर दिख जाते है और फिर कहते है हम 20 साल से समिति की सेवा में लगे है, यानी 50-60 हाज़िरियां। अब बताओ किस कोण से वो तुमसे अधिक वरिष्ठ हुए?”
B Plus – “पर उनके घर-परिवार भी होंगे, अन्य ज़िम्मेदारियाँ होंगी, क्या पता उनमे कोई-कोई पांच-सात समितियों का भी सदस्य हो। ऐसे कुछ निर्णय सुना देना ठीक नहीं!”
A Minus – “यहीं छिपी है असल बात, जिसने जहाँ जितना योगदान दिया उसको वहां उस अनुपात में फायदा हो, नाम-मान्यता मिले। जो यहाँ नियमित आ रहे है निश्चित ही वो अपनी दूसरी ज़िम्मेदारियों से समय और योगदान बचा कर यहाँ लगा रहे है। अब यह थोड़े ही कि सचिन भी बन जाओ और न्यूटन भी हो लो हवा में। संख्याओं और तुलनात्मक बातों को समझने, उनके पीछे जाने की आदत नहीं है हम सबकी इसलिए आलस में बिना जाँचे फैसले लेते है, इस कारण कई सहायक किरदार भी सुपर हीरो-हीरोइन बना दिए जाते है।
समाप्त!
– मोहित शर्मा (ज़हन)
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छद्म मुफ्तखोरी – लेखक मोहित शर्मा #ट्रेंडस्टर

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“जीवन में कुछ भी मुफ्त का खाने वाले मुझे बिलकुल नहीं पसंद ! अरे मेहनत करो, संघर्ष करो दुनिया में, अपनी पहचान बनाओ।” नीतू ने पिकनिक में लंच करते हुए, यूँ ही डिस्कशन कर रही मित्रमण्डली के सामने अपने विचार रखे।

माहौल हल्का करने के लिए उसकी पुरानी बेस्टी सरिता ने कहा – “देखो मैडम को मुफ्त का खाने वाले नहीं पसंद और बातों-बातों में परांठे के एक कौर में ढक कर मेरा आचार ही गायब कर दिया।”

सबके चेहरों पर मुस्कराहट आ गयी पर बातों को समझने में समय लगाने के कारण ग्रुप की ट्यूबलाइट कही जाने वाली लड़की रीमा अब भी नीतू की बात का विश्लेषण करते हुए बोली – “पर नीतू तुम खुद भी तो कितना मुफ्त का खाती हो! तो दूसरो से शिकायत क्यों?”

सरिता – “लो बहनजी ने सिग्नल लेट तो पकड़ा ही आज गलत भी पकड़ा। तेरा बॉयफ्रेंड निगल लिया क्या नीतू ने फ्री में?”

रीमा ने सरिता को नज़रअंदाज़ करके नीतू से कहा – “देखो नीतू मैं हमेशा तुम्हे किसी समूह की ओट लिये देखती हूँ, उनकी सामूहिक साख या उनके इतिहास का सहारा लिए देखती हूँ। जैसे “मुझे गढ़वाली होने पर गर्व है”, “प्राउड टू बी ए गर्ल”, “ब्राउन पीपल आर द बेस्ट”, “पक्की ठाकुर लड़की हूँ” और भी बहुत कुछ। ऐसा अकेली तुम नहीं करती, ये आम आदत है लोगो में। यह सब क्या है? जिन बातों पर हमारा बस नहीं, केवल हमारे जन्म से हमसे जुड़ गयी…उनपर गर्व या शर्म करने का क्या मतलब? कुछ गिनाना है तो अपनी व्यक्तिगत उपलब्धियाँ, प्रतिभा, मेहनत से मिली चीज़ें गिनाओ, ऐसे समूह की आड़ लेकर खुद को महान घोषित करना भी अव्वल दर्ज़े की मुफ्तखोरी है।

कुछ देर के लिए बगले झांकती सहेलियाँ आज “ट्यूबलाइट” की चमक में फ़ीकी पड़ गयीं।

समाप्त!

– मोहित शर्मा (ज़हन)
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Freelance Talents Championship 2015-16 Info

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Freelance Talents invites entries (stories / poems) for the Qualification round of Freelance Talents Championship 2015-16. Think you have what it takes to challenge world’s top talent? Enter the Qualifiers of 3rd Annual International Freelance Talents Championship for your chance to win gift hampers, cash and get published in Freelance Talents Anthologies.

Rules:

1. One submission per individual, Submissions should consist of one short story or poem or extract from a longer work up to 1500 words in length.

2. Entries should be original works and should not have won previous awards or contests. Email your story/poem to: letsmohit@gmail.com

3. 5 Bonus Brownie points for top 10 Authors of FTC 2013 and FTC 2014.

4. Themes – Thriller, Romance

5. Languages – Hindi / English / Hinglish

6. Deadline – 17 September 2015 (11 PM)

*) – Thriller
Thriller fiction is a genre of fiction that uses suspense and tension to dramatically affect the reader. A thriller can provide surprise, anxiety, terror, anticipation, etc., in order to provide a rush of emotions and excitement that progress a story. It should generally be based around the strength of the villain and the protagonist, as well as their struggle against each other. This category might encompass several other genres, including horror, science fiction, and crime.

*) – Romance
Romance fiction can encompass and draw themes, ideas and premises from other genres and can vary widely in setting, dialogue, characters, etc. Generally, however, romance fiction should include a love story involving two individuals struggling to make their relationship work and an emotionally satisfying ending.

Best of Luck! ‪#‎freelancetalents‬ ‪#‎ftc‬ ‪#‎freelance_talents‬ ‪#‎ftc201516‬‪#‎FTC1516‬

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Digital artists, Pencillers and Painters looking to make a splash on the international stage (and win exciting gifts, cash) are invited to register for the Freelance Talents Championship 2015-16.

This year, competition format requires artists and authors to collaborate and create one page artwroks / paintings / pinups based on different round-wise themes given by FTC committee.

Please attach few samples artworks or include link(s) of your online art portfolio. E-mail us the following details: 1) – Name, 2) – Type of artist (Digital, Traditional), 3) – I can color my artworks. (YES / NO), 4) – Experience in years to letsmohit@gmail.com or freelancetalents@yahoo.com, Limited spots! Registration is on a first come, first served basis. Hurry!

Parikrama Comic

PARIKRAMA

Parikrama, is a comic based on fanfic work (part of advert series) written by yours truly in 2007. Illustrated by Yash Atharv Thakur and Colored by Inderjeet Bhanoo. Exclusively available – desi-american.com and sister websites, forums. Cover by Saket Kumar.

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A page from Parikrama

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नशीले शेड्स (लघुकथा) by Mohit Trendy Baba

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“क्या हुआ चौबे साहब, कुछ चिंतित लग रहे है?” तहसीलदार ने शहर के दानी उद्योगपति श्री लोमेश चौबे से पूछा।

चौबे जी ने गंभीर स्वर में कहा, “कुछ लोगो को शहर के रैनबसेरे, धार्मिक स्थलों आदि कहीं पर भी ठोर ठिकाना नहीं दिया जाता था उनके चाल-चलन की वजह से, ऐसे बेसहारा लोगो के लिए शहर में कुछ जगह शेड्स लगवाये थे।”

तहसीलदार उनके सामने अपने पॉइंट्स बनाते हुए बोला, “वाह! धर्मात्मा हो तो आपसा, जिनको सबने दुत्कार दिया उनके लिए आपने सोचा। वैसे कौन अभागे लोग हैं वो?”

लोमेश चौबे – “स्मैकिया-नशेड़ी-चरसी लोग, जो शेड्स लगवाये थे वहां लगे बाकी सामान के साथ बेच कर उन गधो ने उसका भी नशा कर लिया।”

यह बात सुनकर सहमे खड़े तहसीलदार की हँसी नहीं छूटी बल्कि पूरा ठहाका निकल गया। जो पॉइंट्स उसने चौबे जी की तारीफ़ करके बनाये थे उनसे ज़्यादा कट कर उसका अकाउंट माइनस मे चला गया। इधर चौबे जी की ज़मीन पर खुले आकाश के नीचे नशेड़ी लोट लगा रहे थे, ऐसी लोट लोग अपने बाप के यहाँ भी नहीं लगाते।

समाप्त!

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मुदित चोर नहीं है! – लेखक मोहित शर्मा (ज़हन)

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“गलती आपकी है जो 150 की जगह 1500 का रिचार्ज कर दिया।” मन ही मन खुश होते मुदित ने दुकानदार से कहा।

दुकानदार – “कभी-कबार जीरो की गलती हो जाती है, आँखें कमज़ोर हो गयी है। अभी सब देने को नहीं कह रहा बाद में जब इस्तेमाल कर लो तब दे देना, या धीरे-धीरे लौटा देना। अब बुढ़ापे में ऐसा तो….”

मुदित – “बूढ़े हो गए है तो घर पर बैठिये। मैंने डेढ़ सौ बोला था उतने ही दूंगा, बाकी आपने क्या देखा, किया उस से मुझे मतलब नहीं। इतनी चलती है आपकी शॉप, अभी दो-चार घंटो में सब वसूल हो जायेगा।” इतना कहकर वृद्ध दुकानदार की बातें अनसुनी करता हुआ मुदित वहाँ से निकल गया। उसने यह भी सोचा कि अब से वह इस जगह टॉपअप-रिचार्ज करवाने नहीं आएगा।

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कुछ दिन बाद व्यथित मुदित फ़ोन पर एक डिश कंपनी के कॉलसेंटर कर्मी पर अपना गुस्सा निकाल रहा था।

मुदित – “अरे ऐसे कैसे काट लिए 75 रुपये मेरे टीवी पैक से?”

कालसेंटर कर्मी – “सर एक महीने के लिए हमारा स्पेशल “महालोलू पैक” फ्री था तब आपने उसका सब्सक्रिप्शन लिया था। समय पूरा होने के बाद भी आपने पैक हटवाया नहीं इसलिए ऑटोमैटिक डिडक्ट हो गए पैसे।”

मुदित – “अच्छा मुझे मत पढ़ा बे! बस लोगो को लूटने के लिए ऑफर्स बना रखें है। हुँह! चोर है सब @#$&% “

समाप्त! 

– मोहित शर्मा (ज़हन)
#mohitness #mohit_trendster #laghukatha #message

सबकी अनैतिक बढ़त – लेखक मोहित शर्मा (ज़हन)

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अंतर्राष्ट्रीय साइकिल रेस के लिए चुना गया नेचुरल कोर्स शिव के लिए नया नहीं था। आखिर यही वह रास्ता था जहाँ वो वर्षो से प्रतिदिन अभ्यास करता था। उसके मित्रों और जानने वालो को पूरा विश्वास था कि यह रेस जीतकर शिव अंतर्राष्ट्रीय सितारा बन जाएगा। कॉलेज में कुछ हफ्ते पहले ही उसको यह दर्जा मिल गया था। शिव के कोच राजीव मेहरा मानकर बैठे थे कि अगर उस दिन कुछ ऊँच नीच हुयी, तब भी शिव शुरुआती कुछ रेसर्स में आकर बड़ी इनामी राशि अर्जित कर लेगा। स्थानीय कंपनियों में यह बात फैली तो उससे कुछ स्पोंसर्स जुड़ गये।

रेस का दिन आया और रेस शुरू हुयी। पहले चरण में शिव काफी पीछे रहा, लोगो ने माना कि शायद वह अपनी ऊर्जा बचा रहा है या यह उसकी कोई रणनीति  है। पर रेस ख़त्म होने पर कुशल साइकिलिस्ट शिव औसत 17वें स्थान पर आया। स्थानीय लोगो और उसके करीबियों में अविश्वास और रोष था। जो रेस शुरू होने से पहले लाइमलाईट लेने में सबसे आगे थे, वही कोच और स्पोंसर्स रेस के बाद ताने देने वालो में सबसे आगे थे। जबकि एक शून्य में खोया शिव प्रतियोगिता की घोषणा के दिन से ही अलग उधेड़बुन में था।

माहौल शांत होने के बाद एक शाम अपने मित्र सुदीप्तो के सामने उसने अपना दिल खोला।

शिव – “मैंने खुद को बहुत समझाया पर मन को समझा नहीं पाया। मुझे लगा कि एक रास्ता जिसके हर मोड़, उंच-नीच यहाँ तक कि हवाओं की दिशा तक से मैं इतना करीब से परिचित हूँ पर मेरा जीतना अनैतिक होगा, एक चीटिंग होगी बाकी साइकिलिस्टस के साथ। धीरे-धीरे यह बातें मेरे दिमाग पर इतनी हावी हों गयी कि रेस के दिन वो बोझ मेरे पैरों, मेरे शरीर पर महसूस होने लगा और परिणाम तुम जानते ही हो।”

सुदीप्तो – “भाई, पहली बात तो ये कि दिमाग बड़ी कुत्ती चीज़ है, किसी मामले में बिलकुल परफेक्ट और कहीं-कहीं बिलकुल फ़िर जाता है। तो यह जो तुम्हारे साथ हुआ ये किसी के साथ भी हो सकता था। किसी बात में जब हमे सीधा लाभ मिलता है और हम किसी भी रूप में प्रतिस्पर्धा का हिस्सा होतें है तो कभी-कभी अपराधबोध लगता है कि हमे मिली यह बढ़त तो गलत है। पर इस बढ़त को एक मौके की तरह देखो जिसे पाकर तुम अपने और अपने आस-पास के लोगो के लिए एक बेहतर कल सुनिश्चित कर सकते हो। सोचो अगर यह रेस तुम जीतते तो अपने साथ-साथ कई लोगो का जीवन बदल देते और क्या पता आगे इस पूरे कस्बे की तस्वीर बदल देते। जहाँ तक अनैतिक बढ़त या चीटिंग की बात है वह तो तुम अब भी कर रहे हो, बल्कि हम सब करते है।”

शिव – “भला वो कैसे?”

सुदीप्तो – “तुम्हारे साधन-संपन्न माता-पिता है, क्या यह उन लोगो के साथ चीटिंग नहीं जो बचपन में ही अनाथ हो गए या जो किसी स्थिति के कारण गरीब है? तुम 6 फुट और एथलेटिक बॉडी वाले इंसान हों, क्या यह उन लोगो पर अनैतिक प्राकृतिक बढ़त नहीं जो अपाहिज है? तुम्हारे क्षेत्र में शान्ति है, क्या यह देश और दुनिया के उन लोगो पर बढ़त नहीं जिन्हे युद्ध के साये में जीवन काटना पड़ता है?”

शिव – “इस तरह तो मैंने कभी सोचा ही नहीं।”

सुदीप्तो – “इस तरह सोचोगे तो कभी जीवन में कोई मौका भुना नहीं पाओगे। ऐसे एंगल से सब सोचने लगे तो दुनिया के सारे काम उलट-पुलट जायेंगे। हाँ, हमे कुछ बातों में दूसरो पर प्राकृतिक या अन्य बढ़त हासिल है पर कुछ बातों में दूसरो को लाभ है। पते की बात यह है कि हम स्वयं को बेहतर बनाने में और अपने काम को अच्छे ढंग से करने पर ध्यान दें, अब अगली रेस कि तैयारी करो। गुड लक!”

समाप्त!

– मोहित शर्मा (ज़हन)

#mohitness #freelancetalents #trendster #freelance_talents #trendybaba #message #social

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