Poetic Post (Desh Maange Mujhe) – मोहित शर्मा ज़हन

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Poetic Post – देश मांगे मुझे!

परिचित लोगो की प्रतिक्रिया अक्सर सामान्य प्रतीत होती है क्योकि हमे उनके व्यक्तित्व का भलीभाँती ज्ञान होता है। पर कभी कबार जानने वालो द्वारा किसी बात पर की गयी प्रतिक्रिया हमे चौंका देती है, ऐसा ही कुछ मेरे साथ हुआ जब मेरे एक अच्छे मित्र जो अपने संयमित व्यवहार के लिए जाने जाते है वो अपने प्रदेश बंगाल पर बनी एक पैरोडी पर बिफर पड़े कि आजकल लोगो को अपनी “जड़ों” का महत्व नहीं पता, बाहरी कंडीशनिंग ने स्थानीय बातों, चीज़ों रिवाज़ों, इतिहास को महत्वहीन बना दिया है आदि। पर यह वही मित्र है जो भारत का या बंगाल से इतर अन्य भारतीय हिस्सों का मज़ाक उड़ाते लेखो, पैरोडी जैसी बातों का बड़ा लुफ्त उठाते है साथ ही दूसरो से भी बाँटते है। यह रोष जो बंगाल पर कथित टिप्पणियों पर हुआ यह पूरे भारत पर भी आना चाहिए क्योकि यह देश जितना प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति का है उतना ही आपका और हर एक नागरिक का। देश की विविधता का सम्मान आवश्यक है, यह मानना कि आपका छोर बाकियों से ख़ास है (सिर्फ इसलिए कि उस से हम जुड़े है) सरासर गलत है। भारत की नींव अनेकता में एकता, इकाई से अनंत बनाने के संदेश पर रखी गयी थी पर यहाँ तो अनेको इकाइयों में इतनी आत्ममुग्धता, अहंकार समां गया है कि वो स्वयं को सर्वश्रेष्ठ मान सारी बुराईयाँ अन्य में निकालते रहते है। यह बात ज़रूरी है कि एकता में ही विकास और समृद्धि है, अलग कुढ़ते रहने में ना देश की भलाई है ना ही आपके प्रदेश की।

काव्य कॉमिक्स के ऑनलाइन प्रकाशन के लिए Red Streak Publications को धन्यवाद। यह मेरी एक पुरानी कविता पर बनायीं गयी है, नयेपन के लिए विज्ञापन में एक काव्य और जोड़ा गया। टीम सदस्य पंकज, आयुष, पियूष और युद्धवीर जी को भी बधाई!
आपका
मोहित शर्मा ज़हन

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