विलेन वकील – लेखक मोहित शर्मा (ज़हन)

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वैसे तो भीड़ हर पेशे में है और बढ़ रही है पर कुछ पेशों में भीड़ के दुष्परिणाम बड़े व चिंताजनक होते है। ऐसा ही एक वर्ग है वकीलों का जो सीमित न्यायालयों में हर वर्ष तेज़ी से बढ़ते जा रहे है। इस बात में कोई दोराय नहीं कि हर जगह की तरह यहाँ अच्छे-बुरे दोनों तरह के लोग होते है। पब्लिक इंटरैक्शन यहाँ काफी होता है आम व्यवसायों के मुकाबले और किन्ही वजहों से उपद्रवी तत्वो की संख्या भी बाकी जगहों से ज़्यादा होती है। तो इस व्यावसायिक समुदाय में लोग आपस में प्रतियोगी तो होते है पर क्लाइंट्स के लिए इन्हे अपना एक बड़ा समूह बनाना पड़ता है। अब दिक्कत यह होती है कि लोगो कि मदद करने वाले कुछ अच्छे समूह होते है पर कई असामाजिक तत्व भी एक जैसी प्रवृति के कारण साथ आ जाते है। फिर अदालतों के साथ-साथ ऐसे तत्व स्थानीय शैक्षणिक संस्थानों, सरकारी दफ्तरों में सक्रीय होकर दबदबा बनाते हुए मनमानी करते है जो इनकी कमाई का प्रमुख साधन भी बनते है। बड़ी विडंबना है की जिन्हे कानून की धाराओं का सबसे अधिक ज्ञान है वो ही अपने तरीकों से उन्हें तोड़ने में लगे रहते है। न्यायालयों में इनमे से कई वकील बूढ़े, अनपढ़ लोगो को जो किन्ही केसेज में फ़से होते है उन्हें बेवजह दौड़ाते रहते है।
फिर आते है कभी जाने-अनजाने इनसे`उलझने वाले अफसर, दुकानदार, ट्रांसपोर्ट चालक, पुलिस, आम जनता की हालत पर। लड़ाई किसी की होगी पर झुण्ड 32 का तुरंत बन जायेगा और बिना स्थिति जाने सब यह मान कर बैठते है कि अगर दो पक्षों का विवाद है और उनमे से एक वकील है तो वही सही होगा। ऐसी स्थितयों में अक्सर दूसरे पक्ष के लोगो की जमकर पिटाई होती है और कभी-कबार घायलों की मृत्यु होती है। अब अगर मार खाने वाला पक्ष वकील/वकीलों का है (जो काफी कम होता है) तब आप अगले दिन आप सुर्खियां पढ़ेंगे कि “फलाना शहर के अधिवक्ताओं की अनिश्चितकालीन हड़ताल।” मतलब अगर आपका इनसे विवाद है और आप सही है तो आप कि ऐसी की तैसी निश्चित।  भगवान ना करें कि बात अधिक बढे नहीं तो आप पर कुछ भारी मुक़दमे दर्ज हो जायेंगे जिनको निपटाने में आपका काफी समय एवम धन व्यर्थ होगा। गज़ब की बात है कि स्थानीय मीडिया सदैव इनके पक्ष में रहता है, शायद काम पड़ता रहता होगा इसलिए दोस्ती निभायी जाती है। तो कोशिश करिये कि किसी मामले में पड़ने पर अच्छी जाँच के बाद अपना वकील चुने। यह भी ध्यान रखें की कहीं भी इनसे डील, इंटरैक्शन करते समय धैर्य, सावधानी से काम लें। सार्वजानिक स्थल पर किसी भी वजह से हुए विवाद को बातों से निपटाने की कोशिश करें। सरकारों के रवैये और कानून में भी कुछ बड़े बदलावों की आवश्यकता है ताकि नासमझी, मनमानी और गुंडागर्दी में कमी आये। लखनऊ, मेरठ, भोपाल और दिल्ली में अपने अनुभव के आधार पर यह लेख।
– मोहित शर्मा (ज़हन) #mohitness #mohit_trendster
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